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विशेष फल देने वाला होगा सकट चौथ
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 15 Jan 2017 01:20 AM IST
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सूर्य उत्तरायण होने पर मकर संक्रांति के साथ सकट व्रत का भी प्रचलन है। तिल और गुड़ के साथ इस व्रत में चार चांद लग जाते हैं। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में यह मनाया जाता है। सकट चौथ का त्योहार रविवार को है। पूर्वाह्न 11 बजकर 38 मिनट तक तृतीय तिथिी रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। यह अगले दिन सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजकर 23 मिनट तक ही रहेगी। शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा उदय पर चतुर्थी तिथि रहना अति मंगलकारी है। यह योग कई साल बाद बन रहा है।
राजेंद्रनगर के पंडित रमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि रविवार को रात्रि आठ बजकर 33 मिनट पर चंद्रा उदय होगा और इसी समय पुत्रवती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर पुत्र की दीर्घायु, यश, मान, उन्नति व निरोग रहने का वरदान मांगती है। कई मान्यताआें के अनुसार इस दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश की उत्पत्ति मानी जाती है। इस पर्व को तिलकुटी व वक्रतुंड चतुर्थी और गणेश चौथ भी कहते हैं। जगतपुर के आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि इस वर्ष रविवार का दिन मघा नक्षत्र, आयुष्मान योग, सिंह राशि पर चंद्र होने से कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे संयोग कई दशकों बाद देखने को मिलता है। ऐसे में त्योहार का महत्व बढ़ गया है। आचार्य ने बताया कि मघा नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं जो ज्ञान वंश वृद्धि कारक गृह माना जाता है। केतु ग्रह के स्वामी भगवान गणेश हैं। सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं जिनका विशेष दिन रविवार है। चंद्रमा का सूर्य की राशि में रहने से गणेश की पूजा चमत्कारिक सिद्ध होगी।
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राजेंद्रनगर के पंडित रमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि रविवार को रात्रि आठ बजकर 33 मिनट पर चंद्रा उदय होगा और इसी समय पुत्रवती महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर पुत्र की दीर्घायु, यश, मान, उन्नति व निरोग रहने का वरदान मांगती है। कई मान्यताआें के अनुसार इस दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश की उत्पत्ति मानी जाती है। इस पर्व को तिलकुटी व वक्रतुंड चतुर्थी और गणेश चौथ भी कहते हैं। जगतपुर के आचार्य मुकेश मिश्रा बताते हैं कि इस वर्ष रविवार का दिन मघा नक्षत्र, आयुष्मान योग, सिंह राशि पर चंद्र होने से कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे संयोग कई दशकों बाद देखने को मिलता है। ऐसे में त्योहार का महत्व बढ़ गया है। आचार्य ने बताया कि मघा नक्षत्र के स्वामी केतु ग्रह हैं जो ज्ञान वंश वृद्धि कारक गृह माना जाता है। केतु ग्रह के स्वामी भगवान गणेश हैं। सिंह राशि के स्वामी सूर्य देव हैं जिनका विशेष दिन रविवार है। चंद्रमा का सूर्य की राशि में रहने से गणेश की पूजा चमत्कारिक सिद्ध होगी।
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