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शहजिल के खिलाफ अब सीलिंग की जमीन पर पेट्रोल पंप बनाने की जांच
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बरेली। सपा विधायक शहजिल इस्लाम के पेट्रोल पंप को गिराने और उसकी एनओसी रद्द किए जाने के बाद अब उनके खिलाफ सीलिंग की जमीन पर कब्जे की जांच शुरू हो गई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि खतौनी में शहजिल के पिता इस्लाम साबिर का नाम है। खतौनी में उनका नाम कैसे शामिल हुआ, इसका पता लगाने के लिए दस्तावेज छाने जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप की कंपाउंडिंग के लिए शहजिल इस्लाम ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद 2020 में बीडीए ने पत्र भेजकर अरबन सीलिंग विभाग से एनओसी मांगी थी। प्रस्तावित जमीन में सीलिंग का हिस्सा होने से अरबन सीलिंग विभाग ने एनओसी जारी करने के बजाय आवेदन खारिज कर दिया था। शहजिल इस्लाम ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जिसकी सुनवाई अभी चल रही है।
इसी दौरान शहजिल ने खतौनी में अपना नाम और जमीन पर कब्जा बताते हुए उसे सीलिंग से मुक्त करने का प्रत्यावेदन दिया था। मगर इस प्रत्यावेदन को भी तत्कालीन अरबन सीलिंग के सक्षम प्राधिकारी ने खारिज कर दिया था। पेट्रोल पंप इसी जमीन पर बना था। उसे गिराने की बीडीए की कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने सीलिंग प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं।
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एडीएम सिटी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पेट्रोल पंप की जमीन की खतौनी में इस्लाम साबिर के नाम होने का पता चला है। इसकी जांच के लिए सभी राजस्व रिकॉर्ड तलब किए गए हैं। इस जमीन का मालिक पहले कौन था, फिर कैसे वह इस्लाम साबिर के नाम आई। उसमें कितना हिस्सा सीलिंग का है, इन तथ्यों का पता लगाया जा रहा है।
इस्लाम साबिर का था जमीन पर कब्जा
शुरुआती जांच में पता चला है कि 1979 में तत्कालीन एसडीएम ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 229 बी के वर्ग नौ के तहत कार्रवाई की थी। तत्कालीन परिस्थिति के अनुसार जमीन किसी और की थी मगर उस पर कब्जा इस्लाम साबिर का था। इसी आधार पर तत्कालीन एसडीएम ने खतौनी में इस्लाम साबिर का नाम दर्ज कर दिया था। 2009 में धारा 143 के तहत भूमि को गैर कृषक दर्ज किया गया जिसे साल 2016 में संशोधन के बाद धारा 80 कर दी गई है। दस्तावेजी तथ्यों के आधार पर गंभीरता से सघन जांच की जा रही है।
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बताया जा रहा है कि पेट्रोल पंप की कंपाउंडिंग के लिए शहजिल इस्लाम ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बाद 2020 में बीडीए ने पत्र भेजकर अरबन सीलिंग विभाग से एनओसी मांगी थी। प्रस्तावित जमीन में सीलिंग का हिस्सा होने से अरबन सीलिंग विभाग ने एनओसी जारी करने के बजाय आवेदन खारिज कर दिया था। शहजिल इस्लाम ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जिसकी सुनवाई अभी चल रही है।
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इसी दौरान शहजिल ने खतौनी में अपना नाम और जमीन पर कब्जा बताते हुए उसे सीलिंग से मुक्त करने का प्रत्यावेदन दिया था। मगर इस प्रत्यावेदन को भी तत्कालीन अरबन सीलिंग के सक्षम प्राधिकारी ने खारिज कर दिया था। पेट्रोल पंप इसी जमीन पर बना था। उसे गिराने की बीडीए की कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने सीलिंग प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं।
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एडीएम सिटी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पेट्रोल पंप की जमीन की खतौनी में इस्लाम साबिर के नाम होने का पता चला है। इसकी जांच के लिए सभी राजस्व रिकॉर्ड तलब किए गए हैं। इस जमीन का मालिक पहले कौन था, फिर कैसे वह इस्लाम साबिर के नाम आई। उसमें कितना हिस्सा सीलिंग का है, इन तथ्यों का पता लगाया जा रहा है।
इस्लाम साबिर का था जमीन पर कब्जा
शुरुआती जांच में पता चला है कि 1979 में तत्कालीन एसडीएम ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 229 बी के वर्ग नौ के तहत कार्रवाई की थी। तत्कालीन परिस्थिति के अनुसार जमीन किसी और की थी मगर उस पर कब्जा इस्लाम साबिर का था। इसी आधार पर तत्कालीन एसडीएम ने खतौनी में इस्लाम साबिर का नाम दर्ज कर दिया था। 2009 में धारा 143 के तहत भूमि को गैर कृषक दर्ज किया गया जिसे साल 2016 में संशोधन के बाद धारा 80 कर दी गई है। दस्तावेजी तथ्यों के आधार पर गंभीरता से सघन जांच की जा रही है।