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UP: मां की नौकरी हड़पने के लिए किया खेल तो फंसा बेटा, मरने से 12 घंटे पहले बनवा लिया मौत का प्रमाणपत्र

Fri, 27 Jun 2025 07:15 AM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 27 Jun 2025 07:15 AM IST
सार

आरोप है कि चंद्रा देवी का जो मृत्यु प्रमाण पत्र बेटे प्रहलाद ने विभाग में जमा कराया गया है उसके अनुसार चंद्रा देवी की मृत्यु 28 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर हुई है। जीवित डिस्चार्ज कराने से करीब 12 घंटे पहले ही प्रहलाद ने मां की मौत का प्रमाणपत्र दिया जिससे बेटे की भूमिका संदिग्ध हो गई।

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Son got into trouble for playing a trick to grab his mother job got death certificate made 12 hours before dea
मृतक चंद्रा देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आठवीं वाहिनी पीएसी की कुक चंद्रा देवी की रिटायरमेंट के दिन संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में बेटे प्रहलाद सिंह मेहर पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोप है कि मौत रात की बजाय कई घंटे पहले सुबह के वक्त दिखा दी गई। बताते हैं कि कुक की जगह मृतक आश्रित में नौकरी हासिल करने के लिए ऐसा किया गया।

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आठवीं वाहिनी पीएसी के शिविरपाल रामनाथ राणा ने कैंट थाना पुलिस को बताया कि महिला कुक चंद्रा देवी की 27 फरवरी को तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल भेजा गया था। वहां डॉक्टरों ने चंद्रा देवी के पुत्र प्रहलाद सिंह मेहर को परामर्श दिया कि उन्हें किसी बड़े अस्पताल ले जाएं। प्रहलाद अपनी मां को भोजीपुरा के निजी मेडिकल कॉलेज ले गया। वहां से चंद्रा देवी को एसपीजीआई लखनऊ रेफर कर दिया गया। चंद्रा देवी को वहां आईसीयू में भर्ती करा दिया गया। 28 फरवरी को प्रभारी दल नायक चिरांशु कुमार की मौजूदगी में प्रहलाद ने शाम 5 बजकर 33 मिनट पर मां चंद्रा देवी को जीवित अवस्था में डिस्चार्ज कराकर डिस्चार्ज स्लिप भी प्राप्त कर ली।

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आरोप है कि चंद्रा देवी का जो मृत्यु प्रमाण पत्र बेटे प्रहलाद ने विभाग में जमा कराया गया है उसके अनुसार चंद्रा देवी की मृत्यु 28 फरवरी की सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर हुई है। जीवित डिस्चार्ज कराने से करीब 12 घंटे पहले ही प्रहलाद ने मां की मौत का प्रमाणपत्र दिया जिससे बेटे की भूमिका संदिग्ध हो गई। कैंट थाना पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच में जुट गई है।

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गाय चोरी का सदमा बताकर प्रचारित किया
रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले ही चंद्रा देवी गंभीर बीमार पड़ गईं। तब उनके बेटे और बहू ने प्रचारित किया कि चंद्रा देवी जिस गाय को पालती थीं, वह चरने के लिए गई तो लौटी नहीं। परिवार ने बताया कि गाय की चोरी के बाद से चंद्रा देवी ने खाना पीना छोड़ दिया है। कुछ समय उनका घर पर ही इलाज कराया और फिर सरकारी अस्पताल में दिखवाया। पीजीआई से अचानक डिस्चार्ज कराने की भी स्पष्ट वजह नहीं बताई। चर्चा है कि मृतक आश्रित की नौकरी पाने के लिए चंद्रा देवी की जान अपनों ने ही ले ली। पुलिस को इसी सच से पर्दा उठाना है।

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