Bareilly: कभी मुस्कुराहट तो कभी आंसुओं से हर दिल में समा गई 'सैयारा', जूही बब्बर ने अभिनय से दिया खास संदेश
अदाकारा जूही बब्बर द्वारा लिखित, निर्देशित सैयारा की कहानी किताब के पन्ने पलटने से शुरू हुई। यादों में खोई सैयारा ने अपने अतीत को खुली किताब की तरह दर्शकों के समक्ष रखा।
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मां और बाबा की लाडली सैयारा ने अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव को कभी मुस्कुराकर तो कभी आंसुओं के बीच साझा किया। कम उम्र के प्यार, निकाह और तलाक के साथ धोखे की कहानी की सच्चाई बताई। वह अपने बगीचे में लगे पेड़-पौधों, तितलियों और चिड़ियों से बात करती है, लेकिन वहां आने वाले गिरगिट उसे पसंद नहीं, क्योंकि वह इंसानों की तरह रंग बदलते हैं।
दो बार तलाक का दर्द झेल चुकी सैयारा की कहानी को मशहूर अदाकारा जूही बब्बर सोनी ने मंगलवार को बरेली के आईएमए भवन के मंच से जीवंत किया। अमर उजाला की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘विद लव आपकी सैयारा’ के नाट्य मंचन में एक ऐसी मुस्लिम महिला की कहानी दिखाई गई, जो आज की आधुनिक, पढ़ी-लिखी और ऊंची सोच की भारतीय महिला है। बावजूद इसके दो बार तलाक का शिकार हो चुकी है। एक सफल व्यवसायी होने के बाद भी पति की फटकार और पिटाई सहती है।
अदाकारा जूही बब्बर द्वारा लिखित, निर्देशित सैयारा की कहानी किताब के पन्ने पलटने से शुरू हुई। यादों में खोई सैयारा ने अपने अतीत को खुली किताब की तरह दर्शकों के समक्ष रखा। मुंबई के बड़े कारोबारी की बेटी दो बार तलाक होने के बाद अपने जीवन आत्मकथा से ही परेशान दिखी। इसमें फिल्म और वेब सीरीज बनाने वाले अपने मुताबिक बदलाव चाहते हैं।
दर्शकों से रूबरू सैयारा ने अपने जीवन के पन्ने खोलने शुरू किए तो कॉमेडी, ट्रेजडी और ड्रामा एक साथ मंच पर उतर गया। पहले पढ़ाई के दौरान फिजिक्स के अधेड़ उम्र के टीचर से प्यार की कहानी बताई। इस रिश्ते का पता जब टीचर के बच्चों को चला तो वह सैयारा के घर पहुंचकर उससे झगड़ा करना चाहते हैं। ऐसे में जब वह अपने पति से बात करना चाहती है तो पति उसे दुत्कारते हुए बिफर जाता है और तलाक तक बात पहुंच जाती है।
इस दर्द से टूट चुकी सैयारा ने अपने माता-पिता के साथ रहकर उनके व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पिता ने अपना कारोबार उसे सौंप दिया और अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहचान बना चुकी सैयारा की मुलाकात एक मुस्लिम डॉक्टर से हुई।
दूसरी बार निकाह के कुछ दिन बाद अचानक इनके रिश्तों में कड़वाहट आती है और इस बीच पति के अस्पताल की एक नर्स की चिट्ठी ने सैयारा को दोबारा तोड़ दिया। इसमें डीएनए रिपोर्ट के साथ नर्स के गर्भवती होने के खुलासे के सवाल पर डॉक्टर के जवाब की वजह से एक बार फिर उसका तलाक हो जाता है। इसके बाद नाटक में एक अकेली महिला को हर दूसरे व्यक्ति की ओर से तकलीफ दिए जाने की कहानी भी दिखाई गई।
महिलाएं ही नहीं, पुरुष भी मानसिक तनाव से पीड़ित
मंचन के समापन में कलाकार जूही बब्बर ने समाज को संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि समाज में केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में पुरुष भी मानसिक तनाव में हैं। ऐसे में परिवार के लोगों की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों से संवाद करें और उन्हें अवसाद से बाहर लाएं।
मानसिकता सबसे अहम, गलत निगाह को जरूर पहचानें
नाट्य मंचन के बाद अदाकारा जूही बब्बर ने नाटक के संदेश पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि मानसिकता सबसे अहम होती है। महिलाओं के प्रति सोच परिवार के संस्कार से ही आती है। हमें गलत निगाह की पहचान भी करनी चाहिए। महिलाओं के प्रति गलत सोच रखने वाले किसी भी उम्र समाज और वर्ग से हो सकते हैं।
अभिनय से मुद्दों को किया जीवंत
जूही बब्बर ने तीन तलाक, कम उम्र के आकर्षण, माता-पिता की सलाह न मानकर गलत निर्णय व मानसिक तनाव जैसे मुद्दों को अपने अभिनय से जीवंत किया। दर्शकों में बैठी हर महिला ने कहीं न कहीं किसी रूप में खुद की झलक उसमें पाई। कलाकारों ने अपने अभिनय से कभी दर्शकों की आंखों को नम किया तो कभी उनके होठों पर खिलखिलाहट बिखेरी।
इन्होंने किया दीप प्रज्ज्वलन
मुख्य अतिथि आईजी डॉ. राकेश सिंह, विशिष्ट अतिथि पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एके चौहान, उद्यमी गिरधर गोपाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अमर उजाला के सलाहकार संपादक विनोद अग्निहोत्री ने सभी को नाटक की रूपरेखा बताई और समापन के दौरान आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन बरेली कॉलेज की प्रो. वंदना शर्मा ने किया।
उद्यमी आदित्य मूर्ति, डॉ. शशिबाला राठी, डॉ. कविता अरोड़ा, डॉ. बृजेश्वर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात सिंह, उद्यमी तनुज भसीन, अनिल अग्रवाल, अमिता अग्रवाल, डॉ.विमल भारद्वाज, डॉ. बिंदिया सक्सेना, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डॉ. अनूप आर्य, उद्यमी अजय शुक्ला, जेपीएस गुजराल, एडवोकेट शिरीष मेहरोत्रा, पारुल मलिक, व्यापारी राजेश जसोरिया, दुर्गेश खटवानी, सुदेश अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, रामकृष्ण शुक्ला, एएन सिंह, डॉ. राजेश शर्मा, अमित अवस्थी, डॉ. एमके बासु, मयंक शुक्ला, अनुपमा सिंह, डॉ. बीनम सक्सेना, संजीव मेहरोत्रा, जितेंद्र मिश्रा, रचना सक्सेना, शमा गुप्ता, ममता गोयल, डॉ. निशा शर्मा, शिखा सिंह, अम्बुज कुकरेती, दानिश खान, शैलेंद्र सक्सेना, कुमार जितेंद्र, विनायक श्रीवास्तव, शोभित सक्सेना, देवेंद्र जोशी, देवेंद्र रावत, राजेंद्र घिल्डियाल, संजय सक्सेना, पंकज कुकरेती, विजय कमांडो व शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
नाट्य मंचन के बाद दर्शकों की सराहना से अभिभूत जूही बब्बर ने अभिनय पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि मेरी मां मेरी गुरु हैं। मैंने अभिनय की बारीकियां उनसे ही सीखी हैं। मगर, पिता को देखते हुए मैं बड़ी हुई हूं। उन्होंने बताया कि मां नादिरा बब्बर और पिता राज बब्बर से ही उन्हें अभिनय की प्रेरणा मिली है।