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जनता पर नरम मातहतों पर और कड़क हुए डीएम
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 04 Sep 2016 01:09 AM IST
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नए डीएम पंकज यादव ने कलेक्ट्रेट और सरकारी व्यवस्था में सुधार के लिए शनिवार को कुछ नए फैसले किए। आरटीआई के मामले लंबित होने पर उन्होंने जनसूचना के अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारी एडीएम एफआर से अपने पास ले ली है। कलेक्ट्रेट में कामकाम के सिस्टम को सुधारने के लिए उन्होंने डीएम की तरफ से खुद ही टिप्पणी लिख देने वाले लिपिकों की कलम पर अंकुश लगा दिया है। अब डीएम की ओर से कोई भी आदेश लिपिकों की लिखी टिप्पणी से से जारी नहीं हो सकेगा।
आरटीआई का जवाब देना ही होगा
डीएम ने समीक्षा में पाया कि बहुत सारे आरटीआई के मामलों मेें जवाब नहीं दिया गया है। कई विभागों के मामलों में अपीलें भी काफी समय से लंबित हैं। उनका निस्तारण भी नहीं किया गया है इसलिए उन्होंने अपीलों के निस्तारण का काम खुद देखने के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व से अपीलीय जनसूचना अधिकारी का चार्ज ले लिया।
अंग्रेजी नहीं हिंदी में नोटिंग करेंगे
कलेक्ट्रेट के सारे लिपिकों के लिए डीएम ने आदेश जारी कर दिया है कि वह किसी भी पत्र या फाइल पर कोई भी नोटिंग अंग्रेजी में ही करेंगे। मसलन, एडीएम ई नहीं लिखेंगे। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लिखेंगे। डीएम ने यह आदेश इसलिए किया क्योंकि अधिकांश पत्रों में अंग्रेजी में अधिकारी का नाम लिखकर हिंदी में टिप्पणी लिखी जाती थी। डीएम ने आदेश में कहा है कि अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों में नोटिंग नहीं चलेगी। बेहतर हो पूरी तरह से हिंदी का इस्तेमाल किया जाए।
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खुद लिखेंगे आदेशात्मक टिप्पणी
कलेक्ट्रेट में डाक के जरिए डीएम के नाम से आने वाले पत्रों और शिकायती पत्रों पर संबंधित अधिकारी के लिए आदेशात्मक टिप्पणी करके कार्रवाई के लिए अब तक पटल लिपिक डीएम के हस्ताक्षर कराकर आगे बढ़ा देते हैं। नीचे डीएम की मुहर लगा दी जाती है। आमतौर पर पत्रों में संबंधित अधिकारी के लिए उचित कार्रवाई करें अथवा प्रकरण को गंभीरता से लेकर निस्तारित करें, लिखा जाता है लेकिन डीएम ने अब अपनी ओर से लिपिक के इस तरह की आदेशात्मक टिप्पणी लिखने पर रोक लगा दी है। कहा कि जो टिप्पणी या आदेश लिखना है, अब वह खुद ही लिखेंगे। उनकी ओर से कोई लिपिक आदेशात्मक टिप्पणी न लिखे।
रोज निपटाए जाएंगे लंबित काम
डीएम की मंशा है कि सरकारी विभागों में कागजी लिखापढ़ी के काम रोज के रोज निपटाए जाएं। इसके लिए वह सुबह 10 बजे से शाम को तक तक अफसरों और कर्मचारियों के कार्यालय में बैठने के पक्ष में हैं, जब तक कि काम निपट न जाएं। वह खुद भी देर शाम तक दफ्तर में बैठ रहे हैं। लंच के बाद भी बैठकर फरियादियों से रूबरू होते रहेंगे।
एकतरफा शांति भंग की कार्रवाई न हो
डीएम ने सभी अपर नगर अधिकारी को बुलाकर निर्देश दिए कि सीआरपीसी की धारा 107/16 में कोई भी कार्रवाई दोनों पक्षों पर की जाए। एक तरफा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। बोले- एक थाने से एक पक्ष पर ही शांति भंग की कार्रवाई की गई है। दूसरे पक्ष की ओर से नहीं। ऐसा कैसे हो सकता है। अपवाद को छोड़कर शांति भंग की स्थिति दोनों पक्षों की ओर से होती है इसलिए कार्रवाई भी दोनों पक्षों पर की जाए। यह भी ध्यान रखा जाए कि एक पक्ष से कम लोगों पर और दूसरे पक्ष से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई उचित नहीं है। महिलाओं के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई सामान्य परिस्थितियों में न की जाए।
थानों से वाहनों की नीलामी के आदेश
डीएम ने थानों में लावारिस खड़े रहने वाले निष्प्रयोजित वाहनों की नीलामी करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कहा है कि इनके मूल्य का आकलन परिवहन विभाग से कराकर सार्वजनिक सूचना के जरिए इनकी नीलामी कराई जाए। थानोें में बेवजह वाहनों का अड्डा न बनाया जाए।
डीएम ने लगाए, नहीं उठे तहसीलों के लैंडलाइन
बरेली। मोबाइल के बहुतायत प्रचलन के बाद लैंडलाइन का जमाना क्या गया, सरकारी महकमों के अफसरों और कर्मचारियों के यह फोन बेमतलब जैसे हो गए हैं। वह रिसीव भी नहीं किए जा रहे हैं, शनिवार को सुबह डीएम पंकज यादव ने जिले की सभी तहसीलों के कार्यालय में लगे लैंडलाइन फोन लगाए तो आंवला को छोड़कर कहीं का फोन नहीं उठा। नाराज डीएम ने बाकी सभी तहसीलों के एसडीएम को पत्र लिखकर लैंडलाइन फोन न उठने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। हिदायत दी है कि आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही सभी तहसीलों में फैक्स मशीन लगवाने के निर्देश भी दिए हैं।
सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में 15 दिन में शुरू करो ओपीडी
मानसिक अस्पताल परिसर में 300 बेड का सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल बनकर पूरी तरह तैयार है। कुछ काम बजट न आने के बजह से रुके पड़े हैं। शनिवार को नए डीएम पंकज यादव ने कार्यदायी संस्था, बिजली विभाग और सीएमओ के साथ बैठक कर ओपीडी को 15 दिन में शुरू करने को कहा है। परिसर के अंदर एक ओपीडी भवन, एक इंडोर और एक इमरजेंसी ब्लाक बनाया गया है। वर्ष 2011 में कार्य शुरू होना था, लेकिन वर्ष 2013 में शुरू हो पाया। उस समय उसकी लागत 43 करोड़ रुपये थी लेकिन बजट लटकाने की सरकारी परंपरा की वजह से अब यह बढ़कर अब 73 करोड़ रुपये हो चुकी है। अफसर कह रहे हैं कि करीब 30 करोड़ रुपये की और दरकार है। राजकीय निर्माण निगम इसकी कार्यदायी संस्था है। निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष कुमार ने बताया कि अभी बिल्डिंग डेवलपमेंट, मॉड्यूलर ओटी, सब स्टेशन और रोड बनाने के साथ बिजली की फिटिंग और कैंपस सुंदरीकरण होना है। एस्टीमेट फाइल मुख्यमंत्री के यहां है। यह कैबिनेट से पास होगी। नए अस्पताल को अभी बिजली का अस्थायी कनेक्शन देने की बात चल रही है।
ओपीडी के लिए फर्नीचर व अन्य सामान आ चुका है। दरवाजे भी फिट हैं। डॉक्टरों की आवश्यकता है। बिल्डिंग हैंडओवर होते ही ओपीडी शुरू होगी। शासन को लगातार पत्र लिखा जा रहा है।
- सीएमओ डॉ. विजय यादव
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आरटीआई का जवाब देना ही होगा
डीएम ने समीक्षा में पाया कि बहुत सारे आरटीआई के मामलों मेें जवाब नहीं दिया गया है। कई विभागों के मामलों में अपीलें भी काफी समय से लंबित हैं। उनका निस्तारण भी नहीं किया गया है इसलिए उन्होंने अपीलों के निस्तारण का काम खुद देखने के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व से अपीलीय जनसूचना अधिकारी का चार्ज ले लिया।
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अंग्रेजी नहीं हिंदी में नोटिंग करेंगे
कलेक्ट्रेट के सारे लिपिकों के लिए डीएम ने आदेश जारी कर दिया है कि वह किसी भी पत्र या फाइल पर कोई भी नोटिंग अंग्रेजी में ही करेंगे। मसलन, एडीएम ई नहीं लिखेंगे। अपर जिलाधिकारी प्रशासन लिखेंगे। डीएम ने यह आदेश इसलिए किया क्योंकि अधिकांश पत्रों में अंग्रेजी में अधिकारी का नाम लिखकर हिंदी में टिप्पणी लिखी जाती थी। डीएम ने आदेश में कहा है कि अब हिंदी और अंग्रेजी दोनों में नोटिंग नहीं चलेगी। बेहतर हो पूरी तरह से हिंदी का इस्तेमाल किया जाए।
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खुद लिखेंगे आदेशात्मक टिप्पणी
कलेक्ट्रेट में डाक के जरिए डीएम के नाम से आने वाले पत्रों और शिकायती पत्रों पर संबंधित अधिकारी के लिए आदेशात्मक टिप्पणी करके कार्रवाई के लिए अब तक पटल लिपिक डीएम के हस्ताक्षर कराकर आगे बढ़ा देते हैं। नीचे डीएम की मुहर लगा दी जाती है। आमतौर पर पत्रों में संबंधित अधिकारी के लिए उचित कार्रवाई करें अथवा प्रकरण को गंभीरता से लेकर निस्तारित करें, लिखा जाता है लेकिन डीएम ने अब अपनी ओर से लिपिक के इस तरह की आदेशात्मक टिप्पणी लिखने पर रोक लगा दी है। कहा कि जो टिप्पणी या आदेश लिखना है, अब वह खुद ही लिखेंगे। उनकी ओर से कोई लिपिक आदेशात्मक टिप्पणी न लिखे।
रोज निपटाए जाएंगे लंबित काम
डीएम की मंशा है कि सरकारी विभागों में कागजी लिखापढ़ी के काम रोज के रोज निपटाए जाएं। इसके लिए वह सुबह 10 बजे से शाम को तक तक अफसरों और कर्मचारियों के कार्यालय में बैठने के पक्ष में हैं, जब तक कि काम निपट न जाएं। वह खुद भी देर शाम तक दफ्तर में बैठ रहे हैं। लंच के बाद भी बैठकर फरियादियों से रूबरू होते रहेंगे।
एकतरफा शांति भंग की कार्रवाई न हो
डीएम ने सभी अपर नगर अधिकारी को बुलाकर निर्देश दिए कि सीआरपीसी की धारा 107/16 में कोई भी कार्रवाई दोनों पक्षों पर की जाए। एक तरफा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। बोले- एक थाने से एक पक्ष पर ही शांति भंग की कार्रवाई की गई है। दूसरे पक्ष की ओर से नहीं। ऐसा कैसे हो सकता है। अपवाद को छोड़कर शांति भंग की स्थिति दोनों पक्षों की ओर से होती है इसलिए कार्रवाई भी दोनों पक्षों पर की जाए। यह भी ध्यान रखा जाए कि एक पक्ष से कम लोगों पर और दूसरे पक्ष से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई उचित नहीं है। महिलाओं के खिलाफ शांति भंग की आशंका में कार्रवाई सामान्य परिस्थितियों में न की जाए।
थानों से वाहनों की नीलामी के आदेश
डीएम ने थानों में लावारिस खड़े रहने वाले निष्प्रयोजित वाहनों की नीलामी करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कहा है कि इनके मूल्य का आकलन परिवहन विभाग से कराकर सार्वजनिक सूचना के जरिए इनकी नीलामी कराई जाए। थानोें में बेवजह वाहनों का अड्डा न बनाया जाए।
डीएम ने लगाए, नहीं उठे तहसीलों के लैंडलाइन
बरेली। मोबाइल के बहुतायत प्रचलन के बाद लैंडलाइन का जमाना क्या गया, सरकारी महकमों के अफसरों और कर्मचारियों के यह फोन बेमतलब जैसे हो गए हैं। वह रिसीव भी नहीं किए जा रहे हैं, शनिवार को सुबह डीएम पंकज यादव ने जिले की सभी तहसीलों के कार्यालय में लगे लैंडलाइन फोन लगाए तो आंवला को छोड़कर कहीं का फोन नहीं उठा। नाराज डीएम ने बाकी सभी तहसीलों के एसडीएम को पत्र लिखकर लैंडलाइन फोन न उठने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। हिदायत दी है कि आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही सभी तहसीलों में फैक्स मशीन लगवाने के निर्देश भी दिए हैं।
सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल में 15 दिन में शुरू करो ओपीडी
मानसिक अस्पताल परिसर में 300 बेड का सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल बनकर पूरी तरह तैयार है। कुछ काम बजट न आने के बजह से रुके पड़े हैं। शनिवार को नए डीएम पंकज यादव ने कार्यदायी संस्था, बिजली विभाग और सीएमओ के साथ बैठक कर ओपीडी को 15 दिन में शुरू करने को कहा है। परिसर के अंदर एक ओपीडी भवन, एक इंडोर और एक इमरजेंसी ब्लाक बनाया गया है। वर्ष 2011 में कार्य शुरू होना था, लेकिन वर्ष 2013 में शुरू हो पाया। उस समय उसकी लागत 43 करोड़ रुपये थी लेकिन बजट लटकाने की सरकारी परंपरा की वजह से अब यह बढ़कर अब 73 करोड़ रुपये हो चुकी है। अफसर कह रहे हैं कि करीब 30 करोड़ रुपये की और दरकार है। राजकीय निर्माण निगम इसकी कार्यदायी संस्था है। निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आशीष कुमार ने बताया कि अभी बिल्डिंग डेवलपमेंट, मॉड्यूलर ओटी, सब स्टेशन और रोड बनाने के साथ बिजली की फिटिंग और कैंपस सुंदरीकरण होना है। एस्टीमेट फाइल मुख्यमंत्री के यहां है। यह कैबिनेट से पास होगी। नए अस्पताल को अभी बिजली का अस्थायी कनेक्शन देने की बात चल रही है।
ओपीडी के लिए फर्नीचर व अन्य सामान आ चुका है। दरवाजे भी फिट हैं। डॉक्टरों की आवश्यकता है। बिल्डिंग हैंडओवर होते ही ओपीडी शुरू होगी। शासन को लगातार पत्र लिखा जा रहा है।
- सीएमओ डॉ. विजय यादव