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तीन तलाक का दंश झेलने वाले चेहरों पर आई मुस्कान

Fri, 29 Dec 2017 02:11 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Fri, 29 Dec 2017 02:11 AM IST
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Smile on the faces facing the three divorces
‌िवविध्‍ाेयक पास हाोने पर ख्‍ाुश्‍ाी मनाइऱ्ई
 तीन तलाक पर लोकसभा में बिल पास होने के बाद मुस्लिमों के एक वर्ग में खुशी है तो एक बड़ा वर्ग विरोध में भी आ खड़ा है। खास तौर से उलमा ने इसकी पुरजोर मुखालफत की है। चाहे बरेलवी सिलसिले के उलमा हों या देवबंदी विचारधारा के, सभी इसे शरीयत में दखल बताकर इसे नाकाबिले बर्दाश्त कह रहे हैं। दूसरी तरफ  तीन तलाक का दंश झेलने और उनके हक-हकूक की लड़ाई लड़ने वाली मुस्लिम महिलाएं इस बिल को नई उम्मीद के तौर पर देख रही हैं। उनमें इसे लेकर उत्साह और खुशी का माहौल है। हालांकि आम महिलाओं में इसे लेकर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं है। कुछ पढ़ी लिखी और दीन की जानकारी रखने वाली महिलाएं तीन तलाक के पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से देख रहीं हैं। आइए जानते हैं.. बिल को लेकर किसका, क्या है नजरिया- 
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तीन तलाक पीड़ित महिलाओं की लड़ाई लड़ रहे संगठन मेरा हक फाउंडेशन ने इस बिल पर खुशी का इजहार किया है। मेरा हक से जुड़ी महिलाओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर मुबारकबाद पेश की। फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने बिल पास होने को महिलाओं की जीत बताया और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान के यहां भी जश्न का माहौल है। तीन तलाक पर बिल पास होने के बाद संगठन की तमाम महिलाएं उनके निवास पर मुबारकबाद देने पहुंची। निदा खान खुद तीन तलाक पीड़ित हैं और महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने बिल पास होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे महिलाओं के संघर्ष की कामयाबी बताया। युवा बरेली सेवा क्लब के सदस्यों ने भी तीन तलाक बिल पास होने पर खुशी जताई और एक दूसरे को मिठाई खिलाई। क्लब के अध्यक्ष गुलफाम अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाकर महिलाओं के हितों को सुरक्षित किया है। इससे महिलाओं को राहत मिलेगी। 
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इसके विपरीत तंजीम उलमा इस्लाम ने तीन तलाक पर बिल पास होने की मुखालफत की है। उन्होंने दरगाह आला हजरत के बाहर बिल पास होने का विरोध करते हुए नारेबाजी भी की। राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इसे शरीयत में हस्तक्षेप बताया है। कहा, इससे महिलाओं का हित नहीं परिवार में परेशानियां और बढ़ जाएंगी। इसलिए इसे रोका जाना चाहिए। 
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जनसेवा टीम के लोगों ने भी तीन तलाक पर बिल पास होने का विरोध किया है। इसके खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी भी की। अध्यक्ष पम्मी खां वारसी ने कहा, इस बिल से पीड़ित महिलाओं का हित नहीं होगा, जब तक कि उनके मुआवजे या रोजगार का रास्ता नहीं बनता। चूंकि यह शरई मामला भी है इसलिए इस पर पुनर्विचार करते हुए तमाम उलमा और दानिश्वरों की राय भी शामिल की जाए।
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