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खोजा स्मार्ट खेती के लिए स्मार्ट तरीका-फ्लैग

Mon, 07 Aug 2017 01:18 AM IST
बरेली
बरेली Updated Mon, 07 Aug 2017 01:18 AM IST
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बरेली।
खेत पर जाए बगैर ही अगर पता चल जाए कि जमीन को कब पानी की जरूरत है, कब खाद लगानी है, कब कीटनाशक लगाना है, बिना मृदा परीक्षण के ही पता चल जाए कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी हो गई तो सुनकर थोड़ा आश्चर्य जरूर होगा पर निकट भविष्य में यह सब संभव होगा। हमारे क्षेत्र में भी किसान स्मार्ट खेती यानी तकनीक पर आधारित खेती कर सकेंगे। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी (सीएसआईटी) के प्रोफेसर्स ने इसके लिए न्यूरल नेटवर्क बेस्ड आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जो सेंसर की मदद से सारा डाटा क्लासीफाइड करके उनका ऑटोमेटिक  विश्लेषण करेगा। इससे पता किया जा सकेगा कि भूमि को कब क्या चाहिए। इससे जहां पोषक तत्वों का खेत में ओवरडोज नहीं हो पाएगा और कम लागत व लेबर पर किसान अच्छी पैदावार मिल सकेगी।

ट्रायल पर सफल हुआ मॉडल
सीएसआईटी के प्रोफसर्स ने ‘वाटर क्वालिटी माडलिंग ऑफ दि रिवर गंगा यूजिंग आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क विद रिफ्रेंस टू वैरियस ट्रेनिंग फंक्शन’ टॉपिक पर शोध किया है जिसमें इस तकनीक को परखा गया है। सीएसआईटी के हेड डॉ. रविंद्र सिंह, डॉ. अनिल भारद्वाज, नैनीताल के डॉ. आशुतोष भट्ट, हरिद्वार के डॉ. राकेश भूटियानी, डॉ. कृष्ण कुमार की टीम ने गंगा नदी पर इसी तकनीक के आधार पर शोध शुरू किया है। देव प्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, ज्वालापुर और रुड़की में पानी के सैंपल लिए। ज्वालापुर और रुड़की में पानी की क्वालिटी खराब हो रही है। अब अगले स्तर पर इसी तकनीक पर भविष्यवाणी की जा सकेगी कि अगले पांच या दस साल में यहां का पानी कितना प्रदूषित हो जाएगा। इसके लिए जो सॉफ्टवेयर का ट्रायल किया गया था वो सफल रहा। डाटा विश्लेषण का रिजल्ट 93 फीसदी सटीक बैठा है। अब खेती के लिए इसी तकनीक के सेंसर का प्रयोग किया जाएगा। टेक्नीकल एजूकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम के तहत विवि में इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाएगा।
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यह होगी तकनीक
एक एकड़ भूमि में पांच से छह सेंसर लगाए जाएंगे। यह सेंसर वाई-फाई इंटरनेट से कनेक्ट होंगे। इस सेंसर से हम प्रत्येक 30 मिनट, या एक घंटा या जरूरत के हिसाब से डाटा ले सकते हैं। सारा डाटा इंटरनेट के माध्यम से साफ्टवेयर पर जाएगा। पहले डाटा क्लासीफाइड होगा फिर वातावरण के डाटा के अनुसार विश्लेषण करेगा। अगर जमीन में उस वक्त नाइट्रोजन की कमी है तो पता किया जा सकेगा। वैज्ञानिक यहां तक कह रहे हैं कि जमीन को भविष्य में कब किस चीज की जरूरत पड़ेगी यह भी अनुमान लगाया जा सकेगा। 
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वर्जन
न्यूरल नेटवर्क बेस्ड आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर तैयार किया है। सेंसर के माध्यम से भूमि का सारा डाटा का विश्लेषण कर यह जान सकते हैं कि भूमि को कब किस चीज की जरूरत है। हमारा मॉडल सफल हुआ है और अब खेतीहर जमीन पर इसका प्रयोग करेंगे। इसके बाद प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजेंगे।

-डॉ. रविंद्र सिंह, हेड सीएसआईटी
 
कंप्यूटर के माध्यम से स्मार्ट खेती दुनिया में कई देशों में हो रही है। उन्नत खेती की बेहतरीन तकनीक है। जमीन को कब सिंचाई, किस पोषक तत्व की जरूरत है अगर समय से पता चल जाए तो फसल को नुकसान से बचा सकते हैं। इस तकनीक से लागत और कम लेबर से अच्छा मुनाफा किसान कमा सकते हैं। पर सरकार को अपने स्तर पर इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित करना होगा। 
-डॉ. बीपी सिंह, इंचार्ज केवीके आईवीआरआई 
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