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स्मार्ट सिटी: आईट्रिपलसी के 188 करोड़ के प्रोजेक्ट में बड़े घोटाले की तैयारी
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स्मार्ट सिटी
- फोटो : डेमो फोटो
बरेली। अमर उजाला पहले ही आगाह करता रहा है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों की नजर शहर के बजाय उसके 22 सौ करोड़ के बजट पर है, अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। दरअसल स्मार्ट सिटी के अफसरों ने 188 करोड़ के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी आई ट्रिपल सी के प्रोजेक्ट की डीपीआर को ही पूरी तरह बदल डाला। यह खेल तब खुला जब डीपीआर को अनुमोदन के लिए दोबारा अलीगढ़ यूनिवर्सिटी भेजा गया। यूनिवर्सिटी ने गड़बड़ पकड़ने के बाद न सिर्फ इसका अनुमोदन करने से इनकार कर दिया बल्कि यह भी साफ कर दिया कि इस बदलाव के बाद वह किसी भी कानूनी दावे के लिए जिम्मेदार नहीं होगी।
बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी 188 करोड़ के आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट की डीपीआर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वेटिंग इंस्टीट्यूट से तैयार कराई गई थी। एएमयू ने इस प्रोजेक्ट का टेक्निकल और फाइनेंसियल मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 25 दिसंबर को भेजी थी। 31 जनवरी को बरेली में इस डीपीआर को संशोधित कर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के साथ दोबारा एएमयू भेजा गया। एएमयू की वेटिंग टीम ने इसकी जांच की तो पाया कि डीपीआर में तमाम टर्म और कंडीशन बदल दी गई हैं। इसके बाद एएमयू की ओर से इस डीपीआर का अनुमोदन करने से साफ इनकार कर दिया।
एएमयू के वेटिंग इंस्टीट्यूट की ओर से बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट में बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से किया गया बदलाव उनकी डीपीआर से बिल्कुल अलग है और उसमें तकनीकी पहलुओं के साथ जो भी बदलाव किए गए हैं, उनके लिए बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड खुद जिम्मेदार होगी। वेटिंग टीम ने यह भी साफ किया है कि डीपीआर बदले जाने के बाद वह इस प्रोजेक्ट की कोई कानूनी जवाबदेही भी अपने ऊपर नहीं लेगी। इस पत्र की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर वेटिंग इंस्टीट्यूट के प्राचार्य के साथ इंस्टीट्यूट से जुड़े यूनिवर्सिटी के सभी विभागों के प्रभारियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
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188 करोड़ का प्रोजेक्ट.. किसे फायदा पहुंचाने की तैयारी
आई ट्रिपल सी की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को बदल दिए जाने के मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का पत्र बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े अफसरों की मंशा पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल हो सकता है। दरअसल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का पत्र आने से पहले ही कुछ कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बदलने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। अफसर इसे दबाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से आए पत्र ने सारी कलई खोलकर रख दी।
इसलिए घोटालेबाज मिशन मैनेजर किया था नियुक्त
बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों की मंशा पर तब भी सवाल उठा था जब यमुना एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में सवा सौ करोड़ का घोटाला करने वाले रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी सतीश कुमार को स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर बना दिए जाने का मामला खुला था। सतीश कुमार के खिलाफ नोएडा में पुलिस मामला दर्ज कर चुकी थी और सीबीआई तक पीछे पड़ी हुई थी लेकिन वह यहां अफसरों का खास मेहमान बना हुआ था। स्मार्ट सिटी के ज्यादातर प्रोजेक्ट उसी के हवाले कर दिए गए थे। दिसंबर में वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने नोएडा पहुंचा तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया। इसके बाद से ही बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों का खेल बिगड़ना शुरू हो गया।
एएमयू की चिट्ठी आने के बाद दिन भर मंथन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से 188 करोड़ के प्रोजेक्ट आई ट्रिपल सी में किए गए बदलाव को खारिज करते हुए अपना हाथ खींच लेने का संदेश देते हुए लिखी गई चिट्ठी सोमवार को पहुंचते ही बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों की नींद उड़ गई। इसके बाद मंगलवार को स्मार्ट सिटी के अफसरों की सुबह शुरू हुई बैठक शाम तक चली। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में एएमयू की चिट्ठी पर ही ज्यादातर वक्त मंथन किया गया।
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बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी 188 करोड़ के आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट की डीपीआर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वेटिंग इंस्टीट्यूट से तैयार कराई गई थी। एएमयू ने इस प्रोजेक्ट का टेक्निकल और फाइनेंसियल मूल्यांकन करने के बाद अपनी रिपोर्ट बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड को 25 दिसंबर को भेजी थी। 31 जनवरी को बरेली में इस डीपीआर को संशोधित कर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के साथ दोबारा एएमयू भेजा गया। एएमयू की वेटिंग टीम ने इसकी जांच की तो पाया कि डीपीआर में तमाम टर्म और कंडीशन बदल दी गई हैं। इसके बाद एएमयू की ओर से इस डीपीआर का अनुमोदन करने से साफ इनकार कर दिया।
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एएमयू के वेटिंग इंस्टीट्यूट की ओर से बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट में बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से किया गया बदलाव उनकी डीपीआर से बिल्कुल अलग है और उसमें तकनीकी पहलुओं के साथ जो भी बदलाव किए गए हैं, उनके लिए बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड खुद जिम्मेदार होगी। वेटिंग टीम ने यह भी साफ किया है कि डीपीआर बदले जाने के बाद वह इस प्रोजेक्ट की कोई कानूनी जवाबदेही भी अपने ऊपर नहीं लेगी। इस पत्र की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस पर वेटिंग इंस्टीट्यूट के प्राचार्य के साथ इंस्टीट्यूट से जुड़े यूनिवर्सिटी के सभी विभागों के प्रभारियों ने हस्ताक्षर किए हैं।
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188 करोड़ का प्रोजेक्ट.. किसे फायदा पहुंचाने की तैयारी
आई ट्रिपल सी की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट को बदल दिए जाने के मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का पत्र बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े अफसरों की मंशा पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक इसके पीछे कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल हो सकता है। दरअसल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का पत्र आने से पहले ही कुछ कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बदलने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। अफसर इसे दबाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से आए पत्र ने सारी कलई खोलकर रख दी।
इसलिए घोटालेबाज मिशन मैनेजर किया था नियुक्त
बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों की मंशा पर तब भी सवाल उठा था जब यमुना एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में सवा सौ करोड़ का घोटाला करने वाले रिटायर्ड पीसीएस अधिकारी सतीश कुमार को स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर बना दिए जाने का मामला खुला था। सतीश कुमार के खिलाफ नोएडा में पुलिस मामला दर्ज कर चुकी थी और सीबीआई तक पीछे पड़ी हुई थी लेकिन वह यहां अफसरों का खास मेहमान बना हुआ था। स्मार्ट सिटी के ज्यादातर प्रोजेक्ट उसी के हवाले कर दिए गए थे। दिसंबर में वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने नोएडा पहुंचा तभी पुलिस ने उसे दबोच लिया। इसके बाद से ही बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों का खेल बिगड़ना शुरू हो गया।
एएमयू की चिट्ठी आने के बाद दिन भर मंथन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से 188 करोड़ के प्रोजेक्ट आई ट्रिपल सी में किए गए बदलाव को खारिज करते हुए अपना हाथ खींच लेने का संदेश देते हुए लिखी गई चिट्ठी सोमवार को पहुंचते ही बरेली स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अफसरों की नींद उड़ गई। इसके बाद मंगलवार को स्मार्ट सिटी के अफसरों की सुबह शुरू हुई बैठक शाम तक चली। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में एएमयू की चिट्ठी पर ही ज्यादातर वक्त मंथन किया गया।