{"_id":"5e2205068ebc3e4add5fddf2","slug":"smart-city-bareilly-news-bly392321092","type":"story","status":"publish","title_hn":"चौपुला फ्लाईओवर- महीनों से लटकी दिक्कत का चंद मिनट में निकला समाधान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चौपुला फ्लाईओवर- महीनों से लटकी दिक्कत का चंद मिनट में निकला समाधान
विज्ञापन
समीक्षा बैठक
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नहीं लेनी होगी पुलिस लाइन की एनओसी, स्टील के लंबे स्पॉन से चलेगा काम
एनओसी न मिलने से कई महीने से लटका है फ्लाईओवर का निर्माण
बरेली। सेतु निगम और प्रशासन के अफसर चौपुला फ्लाईओवर की एनओसी को लेकर फंसे जिस पेच को महीनों से नहीं निकाल पा रहे थे, उसका समाधान प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने चंद मिनट में कर दिया। प्रमुख सचिव ने सेतु निगम के अफसरों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश देते हुए नए और पुराने पुल के बीच कनेक्ट रोड बनाने में स्टील का लंबा स्पॉन डालने को सुझाव दिया। इंजीनियरों ने इस पर सहमति भी जता दी है।
भोजीपुरा से वापस आते वक्त प्रमुख सचिव ने चौपुला के निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निरीक्षण किया। विकास भवन में समीक्षा के दौरान सेतु निगम के अफसरों ने निर्माण लटका होने में यह दिक्कत बताई कि नए और पुराने पुलों को जोड़ने के लिए दो पिलर पुलिस लाइन की बाउंड्री के अंदर बनाए जाने हैं। एक मंदिर भी इसमें आड़े आ रहा है। पुलिस विभाग से इसकी एनओसी न मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। प्रमुख सचिव ने सेतु निगम के डीपीएम बीके सेन से पूछा कि फ्लाईओवर बनाने में पुराने ढर्रे पर ही क्यों काम हो रहे हैं? एनओसी के चक्कर में फंसने के बजाय स्टील के बड़े स्पॉन की मदद से नए और पुराने पुल को जोड़ने वाली सड़क बन जाए तो सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा। दोनों पुलों के बीच की दूरी भी इतनी नहीं है कि इसमें कोई दिक्कत आए।
सेटेलाइट फ्लाईओवर- 5.32 करोड़ के रेट रिवाइज पर लगाई रोक
प्रमुख सचिव ने मौजूदा एस्टीमेट से भी कम लागत पर काम पूरा करने का कहा
बरेली। प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने सेटेलाइट फ्लाईओवर के निर्माण में सेतु निगम के रेट रिवाइज का खेल पकड़ लिया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए गए सवा पांच करोड़ के संशोधित एस्टीमेट पर रोक लगा दी है, बल्कि स्वीकृत लागत से भी कम रेट पर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि सेतु निगम ने फ्लाईओवर के ऊपर हाईटेंशन लाइन को और ऊंचा करने सहित कुछ अन्य कामों के लिए फ्लाईओवर की लागत में काफी बढ़ोत्तरी कर दी है। सहगल ने गुरुवार को सेटेलाइट पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर को देखकर सेतु निगम के अधिकारियों की इस पर क्लास लगाई थी कि यह निर्माण की गति काफी धीमी है। साथ ही पुल के स्लैब दोनों तरफ से बराबर नहीं डाली जा रही है। इसके बाद प्रमुख सचिव शुक्रवार को विकास भवन मेें महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की समीक्षा में इसे लेकर खासे नाराज हुए, जब डीपीएम बीके सेन ने यह बताया कि सेटेलाइट पर फ्लाईओवर के लिए हाईटेंशन लाइन को ऊंचा करना है। इसके लिए पॉवर कॉरपोरेशन को 5.32 करोड़ का भुगतान करना है। रेट रिवाइज का एस्टीमेट शासन को काफी पहले भेजा जा चुका है। प्रमुख सचिव ने कहा कि रेट रिवाइज का खेल नहीं चलेगा। सेतु निगम पहले सही से नक्शा नहीं बनाता है। बाद में मनमाने तरीके से लागत बढ़ाकर सरकारी रकम को चूना लगाया जाता है। उन्होंने रेट रिवाइज पर रोक लगाते हुए मौजूदा एस्टीमेट से भी कम लागत पर यह काम पूरा कराने के निर्देश सेतु निगम को दिए। प्रमुख सचिव ने इस बाबत सेतु निगम के डीपीएम वीके सेन को अलग से सर्किट हाउस बुलाकर बातचीत कर काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
एनओसी न मिलने से कई महीने से लटका है फ्लाईओवर का निर्माण
बरेली। सेतु निगम और प्रशासन के अफसर चौपुला फ्लाईओवर की एनओसी को लेकर फंसे जिस पेच को महीनों से नहीं निकाल पा रहे थे, उसका समाधान प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने चंद मिनट में कर दिया। प्रमुख सचिव ने सेतु निगम के अफसरों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के निर्देश देते हुए नए और पुराने पुल के बीच कनेक्ट रोड बनाने में स्टील का लंबा स्पॉन डालने को सुझाव दिया। इंजीनियरों ने इस पर सहमति भी जता दी है।
भोजीपुरा से वापस आते वक्त प्रमुख सचिव ने चौपुला के निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निरीक्षण किया। विकास भवन में समीक्षा के दौरान सेतु निगम के अफसरों ने निर्माण लटका होने में यह दिक्कत बताई कि नए और पुराने पुलों को जोड़ने के लिए दो पिलर पुलिस लाइन की बाउंड्री के अंदर बनाए जाने हैं। एक मंदिर भी इसमें आड़े आ रहा है। पुलिस विभाग से इसकी एनओसी न मिलने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। प्रमुख सचिव ने सेतु निगम के डीपीएम बीके सेन से पूछा कि फ्लाईओवर बनाने में पुराने ढर्रे पर ही क्यों काम हो रहे हैं? एनओसी के चक्कर में फंसने के बजाय स्टील के बड़े स्पॉन की मदद से नए और पुराने पुल को जोड़ने वाली सड़क बन जाए तो सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा। दोनों पुलों के बीच की दूरी भी इतनी नहीं है कि इसमें कोई दिक्कत आए।
विज्ञापन
सेटेलाइट फ्लाईओवर- 5.32 करोड़ के रेट रिवाइज पर लगाई रोक
प्रमुख सचिव ने मौजूदा एस्टीमेट से भी कम लागत पर काम पूरा करने का कहा
बरेली। प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने सेटेलाइट फ्लाईओवर के निर्माण में सेतु निगम के रेट रिवाइज का खेल पकड़ लिया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए गए सवा पांच करोड़ के संशोधित एस्टीमेट पर रोक लगा दी है, बल्कि स्वीकृत लागत से भी कम रेट पर काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि सेतु निगम ने फ्लाईओवर के ऊपर हाईटेंशन लाइन को और ऊंचा करने सहित कुछ अन्य कामों के लिए फ्लाईओवर की लागत में काफी बढ़ोत्तरी कर दी है। सहगल ने गुरुवार को सेटेलाइट पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर को देखकर सेतु निगम के अधिकारियों की इस पर क्लास लगाई थी कि यह निर्माण की गति काफी धीमी है। साथ ही पुल के स्लैब दोनों तरफ से बराबर नहीं डाली जा रही है। इसके बाद प्रमुख सचिव शुक्रवार को विकास भवन मेें महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की समीक्षा में इसे लेकर खासे नाराज हुए, जब डीपीएम बीके सेन ने यह बताया कि सेटेलाइट पर फ्लाईओवर के लिए हाईटेंशन लाइन को ऊंचा करना है। इसके लिए पॉवर कॉरपोरेशन को 5.32 करोड़ का भुगतान करना है। रेट रिवाइज का एस्टीमेट शासन को काफी पहले भेजा जा चुका है। प्रमुख सचिव ने कहा कि रेट रिवाइज का खेल नहीं चलेगा। सेतु निगम पहले सही से नक्शा नहीं बनाता है। बाद में मनमाने तरीके से लागत बढ़ाकर सरकारी रकम को चूना लगाया जाता है। उन्होंने रेट रिवाइज पर रोक लगाते हुए मौजूदा एस्टीमेट से भी कम लागत पर यह काम पूरा कराने के निर्देश सेतु निगम को दिए। प्रमुख सचिव ने इस बाबत सेतु निगम के डीपीएम वीके सेन को अलग से सर्किट हाउस बुलाकर बातचीत कर काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन