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अस्सी फीसदी कम हो गए स्लॉट... ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना मुश्किल
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बरेली। परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना बेहद मुश्किल हो गया है। परिवहन निदेशालय ने स्लॉट में 80 फीसदी से भी ज्यादा कटौती कर दी है जिसकी वजह से आवेदकों परमानेंट लाइसेंस के लिए डेट ही नहीं मिल पा रही है। बार-बार लर्निंग लाइसेंस एक्सपायर होने की वजह से जेबें भी हल्की हो रही हैं। परिवहन निदेशायलय की जरूर इससे इनकम बढ़ गई है।
परिवहन निदेशालय लगातार स्लॉट कम करता जा रहा है जिसकी वजह से परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। परमानेंट लाइसेंस बनवाने से पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाना होता है जिसकी अवधि छह महीने होती है। आमतौर पर लर्निंग लाइसेंस लेने के बाद लोग तीसरे या चौथे महीने में परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं लेकिन अब स्लॉट कम कर दिए जाने की वजह से उनकी बुकिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है।
छह महीने के अंदर स्लॉट न मिलने से बड़े पैमाने पर लर्निंग लाइसेंस निरस्त हो रहे हैं। इस कारण आवेदकों को दोबारा लर्निंग लाइसेंस बनवाने पड़ रहे हैं। इसका असर उनकी जेबों पर भी पड़ रहा है। हाल ही में इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कई शिकायतें की गई हैं।
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150 थे स्पेशल स्लॉट घटाकर कर दिए 21
परिवहन विभाग अबाउट टू एक्पायर यानी निरस्त होने में एक से दो महीने पहले लर्निंग लाइसेंस को परमानेंट कराने वाले आवेदकों के लिए 150 स्पेशल स्लॉट रखता था। इन्हें अब घटाकर 21 कर दिया गया है। स्पेशल स्लॉट इसलिए था क्योंकि छह महीने के लर्निंग लाइसेंस के एक्सपायर होने से एक या दो महीने पहले परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को डेट दे दी जाए। स्पेशल स्लॉट में डेट मिल जाने से लर्निंग लाइसेंस एक्पायर होने से पहले ही परमानेंट लाइसेंस बन जाता था।
व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ज्यादा परेशान
ट्रक और बस जैसे भारी और टैक्सी जैसे व्यावसायिक वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले इस व्यवस्था से ज्यादा परेशान हैं। ऐसे तमाम आवेदकों को आरटीओ के लाइसेंस विभाग के अफसरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लेकिन चूंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, लिहाजा उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है। उनका रोजी-रोटी का मामला संकट में पड़ गया है।
अफसरों के पास और फंसाने वाले जवाब
लर्निंग लाइसेंस की छह महीने की अवधि इसलिए होती है ताकि आवेदक इस बीच अच्छी तरह ड्राइविंग सीख ले, लेकिन आरटीओ में चक्कर काटने वाले आवेदकों को अफसरों से उल्टी सलाह मिल रही है। वे उन्हें लर्निंग लाइसेंस बनवाने के महीने भर बाद ही परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करने को कह रहे हैं। आवेदकों के सामने दिक्कत यह है कि ड्राइविंग सीखने से पहले ही अगर उनका टेस्ट हो गया और उसमें वे फेल हो गया तो उनकी जेब पर और ज्यादा असर पड़ेगा।
परिवहन निदेशालय की ओर से ही स्लॉट कम किए गए हैं। आवेदकों को इससे परेशानी तो हो रही है। मुख्यालय को भी इस संदर्भ में लिखकर भेजा गया है। इसका जल्द ही हल निकालने की कोशिश की जा रही है। -मानवेंद्र सिंह, आरआई
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परिवहन निदेशालय लगातार स्लॉट कम करता जा रहा है जिसकी वजह से परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। परमानेंट लाइसेंस बनवाने से पहले लर्निंग लाइसेंस बनवाना होता है जिसकी अवधि छह महीने होती है। आमतौर पर लर्निंग लाइसेंस लेने के बाद लोग तीसरे या चौथे महीने में परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं लेकिन अब स्लॉट कम कर दिए जाने की वजह से उनकी बुकिंग करना बेहद मुश्किल हो गया है।
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छह महीने के अंदर स्लॉट न मिलने से बड़े पैमाने पर लर्निंग लाइसेंस निरस्त हो रहे हैं। इस कारण आवेदकों को दोबारा लर्निंग लाइसेंस बनवाने पड़ रहे हैं। इसका असर उनकी जेबों पर भी पड़ रहा है। हाल ही में इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी कई शिकायतें की गई हैं।
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150 थे स्पेशल स्लॉट घटाकर कर दिए 21
परिवहन विभाग अबाउट टू एक्पायर यानी निरस्त होने में एक से दो महीने पहले लर्निंग लाइसेंस को परमानेंट कराने वाले आवेदकों के लिए 150 स्पेशल स्लॉट रखता था। इन्हें अब घटाकर 21 कर दिया गया है। स्पेशल स्लॉट इसलिए था क्योंकि छह महीने के लर्निंग लाइसेंस के एक्सपायर होने से एक या दो महीने पहले परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को डेट दे दी जाए। स्पेशल स्लॉट में डेट मिल जाने से लर्निंग लाइसेंस एक्पायर होने से पहले ही परमानेंट लाइसेंस बन जाता था।
व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ज्यादा परेशान
ट्रक और बस जैसे भारी और टैक्सी जैसे व्यावसायिक वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले इस व्यवस्था से ज्यादा परेशान हैं। ऐसे तमाम आवेदकों को आरटीओ के लाइसेंस विभाग के अफसरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। लेकिन चूंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, लिहाजा उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है। उनका रोजी-रोटी का मामला संकट में पड़ गया है।
अफसरों के पास और फंसाने वाले जवाब
लर्निंग लाइसेंस की छह महीने की अवधि इसलिए होती है ताकि आवेदक इस बीच अच्छी तरह ड्राइविंग सीख ले, लेकिन आरटीओ में चक्कर काटने वाले आवेदकों को अफसरों से उल्टी सलाह मिल रही है। वे उन्हें लर्निंग लाइसेंस बनवाने के महीने भर बाद ही परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदन करने को कह रहे हैं। आवेदकों के सामने दिक्कत यह है कि ड्राइविंग सीखने से पहले ही अगर उनका टेस्ट हो गया और उसमें वे फेल हो गया तो उनकी जेब पर और ज्यादा असर पड़ेगा।
परिवहन निदेशालय की ओर से ही स्लॉट कम किए गए हैं। आवेदकों को इससे परेशानी तो हो रही है। मुख्यालय को भी इस संदर्भ में लिखकर भेजा गया है। इसका जल्द ही हल निकालने की कोशिश की जा रही है। -मानवेंद्र सिंह, आरआई