कामयाबी की दास्तान : सिमरनजीत ने खेतों से शुरू किया ओलंपिक तक का सफर
- टोक्यो ओलंपिक में दो गोल दागकर भारत को 41 साल बाद हॉकी में दिलाया कांस्य पदक
- बहेड़ी में ननिहाल में रहकर जुते हुए खेतों में करते थे प्रैक्टिस
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दो गोल दागकर भारत को 41 साल बाद हॉकी में कांस्य पदक दिलाने वाले सिमरनजीत सिंह का हॉकी का सफर नाना के घर बहेड़ी में रहते हुए खेतों से शुरू हुआ था। हॉकी के प्रति उनका जुनून इतना ज्यादा था कि वह जुते हुए खेतों में घंटों प्रैक्टिस किया करते थे। बृहस्पतिवार को जर्मनी से कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में भारत की जीत पर उनके ननिहाल वालों का खुशी का ठिकाना न रहा। मोहल्ले में मिठाई बांटकर लोगों को बधाई दी। इसके बाद ननिहाल के सभी लोग सिमरनजीत के गांव मझारा फार्म के लिए चले गए।
सिमरा और रिछौला फार्म में हॉकी के स्टार खिलाड़ी सिमरनजीत सिंह का ननिहाल है। सिमरनजीत नाना सरदार मुख्तयार सिंह के दुलारे हैं। 1999 में उनके नाना उन्हें लेकर यहां आए थे और उनका दाखिला बहेड़ी के ही नेशनल पब्लिक स्कूल में करा दिया। कक्षा चार तक की पढ़ाई उन्होंने बहेड़ी में ही की। इसके बाद उनका दाखिला पीलीभीत के स्कूल में करा दिया गया, लेकिन वह रहते नाना के पास ही थे। सिमरनजीत को बचपन से ही हॉकी से लगाव था।
हॉकी के प्रति सिमरनजीत का जुनून इस कदर था कि वह अपने नाना मुख्तयार सिंह और दर्शन सिंह के जुते हुए खेतों में हॉकी की प्रैक्टिस करते थे। पिता इकबाल सिंह और ननिहाल वाले चाहते थे कि सिमरनजीत पढ़ाई में मन लगाए, लेकिन उनका मन तो हॉकी में रमा हुआ था। पढ़ाई में उनका मन कम ही लगता था। जब भी उन्हें मौका मिलता वह हॉकी स्टिक उठाकर खेलने निकल जाते, इसके लिए कई बार उन्हें डांट तक खानी पड़ी। 2006 में जब सिमरनजीत कक्षा छह में पढ़ते थे तब पंजाब के बटाला में रहने वाले उनके ताऊ रक्षपाल सिंह बहेड़ी आए।
उन्होंने खेत में सिमरजीत को हॉकी खेलते देखा तो वह उनका खेल और हॉकी के प्रति जुनून देख अपने साथ पंजाब ले गए। हालांकि नाना-नानी किसी भी कीमत पर सिमरजीत को अपने से दूर करने को तैयार नहीं थे। ताऊ रक्षपाल सिंह के काफी समझाने पर वे माने। इसके बाद ताऊ ने उन्हें पंजाब एकेडमी में भर्ती करा दिया। पंजाब एकेडमी में ही उन्होंने अपने खेल को धार दी। 2014 में हुए जौहर कप में उन्हें पहली बार पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का मौका मिला। मलयेशिया में हुए मैच में सिमरजीत ने पाकिस्तान के खिलाफ पहला गोद दागकर सभी का दिल जीत लिया। भारत ने शानदार खेल दिखाते हुए इस कप पर कब्जा जमाया था।
सुबह से ही टीवी पा आंखें जमाए रहे घरवाले
सिमरनजीत के ननिहाल वाले हॉकी के मैच के लिए सुबह से आंखें टीवी पर जमाए बैठे थे। सभी निगाहें सिमरजीत पर टिकीं थी। कांस्य पदक के लिए जर्मनी से हुए मैच में सिमरनजीत ने दो गोल दागकर भारत को 5-4 से जीत दिलाई। 41 साल बाद भारत के हॉकी में पदक जीतने पर उनके घरवाले खुशी से झूम उठे। जीत के बाद सबसे पहले सिमरनीत के पिता ने पीलीभीत के मझारा फार्म से फोन कर ननिहाल वालों को बधाई दी। खुशी में ननिहाल वाले उसी वक्त सिमरनजीत के घर के लिए रवाना हो गए। इधर परिवार के अर्श, मामा कुलजीत, लखविंदर, पलविंदर, कुलदीप सिंह, बहन अनाहत कौर भी जश्न में डूबे हुए हैं।
स्टेडियम में खिलाड़ियों ने लहराया तिरंगा, बोले चक दे इंडिया
लंबे समय से पदक के लिए हॉकी खिलाड़ी और सिमरनजीत के प्रशंसक दुआएं कर रहे थे। आखिरकार थर्ड प्लेस में टीम इंडिया ने कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। इंडिया की जीत के बाद खिलाड़ियों में उत्साह दिखाई दिया। उन्होंने स्टेडियम में तिरंगा लहराते हुए जश्न मनाया। उनका कहना था कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि टीम इंडिया पदक जरूर जीतेगी।
इंडिया और जर्मनी के बीच खेल गए थर्ड प्लेस मैच में इंडिया जीत हासिल करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। इंडिया की जीत के बाद हॉकी प्रेमियों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा और गांधी स्टेडियम पहुंचकर अपने साथियों के साथ जीत का जश्न मनाते हुए तिरंगा लहराया। गांधी स्टेडियम के जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार और हॉकी कोच आबिद अली ने खिलाड़ियों में उत्साह भरते हुए बेहतर प्रदर्शन करने को कहा।
जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार ने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है। इसलिए टीम इंडिया ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता है। यह देश के लिए गर्व की बात है। इसके बाद सभी हॉकी खिलाड़ियों ने एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जीत का जश्न मनाया।
टीम इंडिया ने कांस्य पदक जीता है।। यह गर्व की बात है। 41 साल के बाद इंडिया को यह पदक मिला है। दिल से खुशी है। इंडिया की टीम और आगे जाए। - आदित्य कुमार, राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी
सेमीफाइनल में हराने के बाद भी इंडिया ने हार नहीं मानी। क्योंकि गेम्स में हार और जीत दोनों ही होती है। खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन के चलते पदक जीता है।
- सौरभ सक्सेना, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कोहिनूर क्लब हॉकी
ओलंपिक में टीम इंडिया ने बेहतर मैच खेला। सिमरनजीत जिस मैच में खेले वह मैच इंडिया जीती। इससे लक कहें या फिर बेहतर खिलाड़ी। फिलहाल सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया था।
- खालिद मियां, सीनियर हॉकी खिलाड़ी
ओलंपिक में विश्व भर के खिलाड़ी अपना प्रदर्शन दिखाते हैं। वहां पदक जीतना बड़ी कामयाबी होती है। इंडिया ने भारत का नाम रोशन किया है। उन्हें उम्मीद है आने वाले दिनों में भी इससे बेहतर प्रदर्शन कर अन्य पदकों पर कब्जा करेगी।
- डॉ. राकेश गुप्ता, संरक्षक कोहिनूर हॉकी क्लब
टीम इंडिया ने ओलंपिक में शुरुआत से अच्छा प्रदर्शन किया था। लगातार मैच में बढ़त हो रही थी, मगर कोशिश से इंडिया ने कांस्य पदक जीता है। सिमरनजीत ने पंजाब में हॉकी की शिक्षा ग्रहण की थी। एक बार पीलीभीत के स्टेडियम में सिमरनजीत आए थे। जहां खिलाड़ियों को उन्होंने टिप्स भी दिए थे। - राजकुमार, जिला क्रीड़ा अधिकारी
जब-जब उतरा मैदान में सिमरनजीत, तब-तब दिलाई इंडिया को जीत
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है। चार दशक के बाद टीम इंडिया को ओलंपिक का पदक मिला है। बृहस्पतिवार को टोक्यो ओलंपिक के प्ले ऑफ मुकाबले में टीम इंडिया ने जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। भारतीय पुरुष टीम की कड़ी मेहनत इस ऐतिहासिक जीत में सफलता का राज बनी। जिसमें पीलीभीत के लाल (खिलाड़ी) सिमरजीत सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके द्वारा किए गए दो गोल और पेनल्टी कॉर्नर ने जीत दिलाई है।
खास बात यह है कि ओलंपिक में जब-जब सिमरनजीत मैदान में उतरा तो इंडिया को जीत मिली है। हालांकि कुछ मैच में सिमरन के न खेलने के कारण इंडिया को हार का सामना करना पड़ा। सिमरनजीत के इस प्रदर्शन के चलते उनके परिवार वालों का ही नहीं बल्कि जिले के लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
मझोला कस्बे से आठ किलोमीटर दूर मझारा फार्म के रहने वाले इकबाल सिंह के बेटे सिमरनजीत सिंह ने पंजाब में अपने ताऊ रक्षपाल सिंह के घर रहकर हॉकी की पूरी शिक्षा और दीक्षा ग्रहण की। उनके ताऊ एक हॉकी खिलाड़ी थे। सिमरनजीत के पिता इकबाल ने बताया कि पांच साल की उम्र में सिमरन में हॉकी के प्रति रुझान देखकर वह उसे अपने साथ ले गए थे। जहां उन्होंने पंजाब के गुरुदासपुर बंडाला में चीमा एकडेमी में उसका एडमिशन कर दिया।
जहां कोच रंजीत सिंह के नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान सबसे पहले वह 2015 में हीरो हॉकी इंडिया लीग की तरफ से खेल थे। जिसमें वह रनरअप रहे थे। 2016 में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में सिमरन के गोल से इंडिया ने वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था। बेहतर प्रदर्शन देखकर सिमरन को सीनियर टीम में शामिल कर लिया था। बंगलूरू में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वह ओलंपिक के लिए चुना गया था।
कुछ इस तरह रहा था टोक्यो का ओलंपिक हॉकी
टोक्यो ओलंपिक में जाने के बाद वहां कुल छह मैच हुए थे। इसमें पहला मैच इंडिया और न्यूजीलैंड जिसमें सिमरन को अपनी प्रतिभाग दिखाने का मौका नहीं मिला। हालांकि इसमें इंडिया को जीत हासिल हुई थी। दूसरा मैच इंडिया और आस्ट्रेलिया के बीच खेल गया था। जिसमें 7-1 से हार गई थी। इसमें सिमरन नहीं खेल थे। तीसरी मैच इंडिया और स्पेन के बीच खेल गया।
इसमें सिमरनजीत ने खेलते हुए 14वें मिनट में पहला गोल दागा था और एक पेनल्टी कॉर्नर बना था। इसमें इंडिया को जीत मिली थी। चौथा मैच अर्जेंटीना से हुआ था। इसमें मैच खेले थे। इसमें भी इंडिया मैच जीती थी। पांचवां मैच इंडिया और जापान के बीच खेल गया। इसमें सिमरन खेल थे और क्वार्टर फाइलन में टीम को पहुंचाया था।
छठा मैच सेमीफाइनल बेल्जियम के साथ खेला गया। जिसमें सिमरन को नहीं खिलाया गया था। इसमें टीम को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद थर्ड प्लेस का मैच इंडिया और जर्मनी के बीच खेल गया। इसमें जर्मनी ने दो गोल इंडिया पर दागते हुए दबाव बना लिया था। इसके बाद सिमरन जीत ने वापसी करते हुए दो गोल और एक पेनल्टी कॉर्नर बना था।