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बचपन का जुनून...मुझे हॉकी खिलाड़ी ही बनना था

Sun, 29 Aug 2021 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 29 Aug 2021 12:45 AM IST
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simranjit singh
सिमरनजीत सिंह - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। वर्ष 2016 में हॉकी के जूनियर वर्ल्ड कप में सिमरनजीत सिंह के खेल ने बता दिया था कि उनका सफर लंबा होगा। टोक्यो ओलंपिक में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। मिड फील्डर सिमरनजीत मैदान में कभी दबाव में नहीं आते और अपनी तेजी बरकरार रखते हैं। उनके खेल की बहुत सारी खूबियां है। इससे इतर उनके व्यक्तित्व की भी कुछ खासियत है। वह सहज हैं, इरादा मजबूत रखतें हैं। उन पर स्टारडम को कोई रंग नहीं। खेल दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने खेल और उनके जीवन से जुड़े अन्य पहलुओं पर बात की। उनका कहना है कि खेल में अलग चुनौतियां होती हैं। उसके लिए हौसले के साथ धैर्य भी रखना होता। अनुशासन के साथ प्रैक्टिस करनी होती है। बिना कड़ी मेहनत के सिवा कोई ऐसा मंत्र नहीं है, जिससे सफलता हासिल हो जाए। उन्होंने देश में खेल संसाधनों की कमी पर चिंता जाहिर की। प्रस्तुत है महेंद्र प्रताप सिंह से उनकी बातचीत।
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यह दौर तो क्रिकेट की दीवानगी का है। आपने हॉकी की स्टिक कैसे थाम ली?
- ऐसा नहीं है, हर खेल की अपनी महत्ता है। उसके फॉलोअर हैं। बचपन से ही मेरा हॉकी के प्रति लगाव था। 10 साल की उम्र में हॉकी स्टिक पकड़ी तो देश के लिए कुछ करने का जुनून सवार था। अब अच्छा महसूस कर रहा हूं।
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अपने खेल सफर के बारे में बताएं। यहां से पंजाब तक?
- बचपन में हॉकी के प्रति लगाव को देखकर ताऊ रक्षपाल सिंह अपने साथ पंजाब ले गए थे। वहां पहुंचने के बाद कोच रंजीत सिंह चीमा का साथ मिला, जहां उनके नेतृत्व में प्रशिक्षण प्राप्त किया। कोच अवतार सिंह, गुरुदेव सिंह ने मैदान पर उनके खेल को निखारा। 2006 में चीमा एकेडमी में प्रवेश मिला। 2014 में नेशनल टीम में चयन हुआ। 2016 में लखनऊ में आयोजित पुरुष हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल रहा।
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किन गुरुओं से क्या क्या सीखा ?
- पहले गुुरु पंजाब के बटाला रंजीत सिंह, दूसरे पंजाब के ही हॉकी कोच अवतार सिंह, तीसरे गुरुदेव सिंह रहे थे। जिनसे हॉकी का पूरा प्रशिक्षण प्राप्त कर इंडिया टीम का खिलाड़ी बना। टीम इंडिया में शामिल होने के बाद बंगलूरू में कोच गैरम डे ने कई एडवांस तरीके बताए, जो ओलंपिक में काफी काम आए।
हॉकी के किस खिलाड़ी ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उसकी क्या खूबी भाती है ?
- हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्ले को आदर्श मानता हूं। वे खेल के दौरान जिस तरह से लीड करते थे, आज भी हुनर का कायल हूं।
हॉकी के अलावा कोई खिलाड़ी, जिसे पसंद करते हों ?
अर्जेंटीना के फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल आंद्रेस मेस्सी को काफी अच्छा मानता हूं। उनका मूवमेंट काफी तगड़ा है। उनकी गिनती सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ियों में भी है।
मैदान में अपना मजबूत पक्ष क्या मानते हैं ?
- खुद पर भरोसा रखना ही मजबूत पक्ष हैं। मेरा मानना है कि किसी खेल में अगर आप को जीत के लिए खुद पर भरोसा नहीं है तो सफलता मिलनी मुश्किल है।
आज खेल प्रतिभाएं कहां मात खा रही हैं, क्या सुविधाएं पर्याप्त हैं ?
- देश में खिलाड़ियों के लिए संसाधनों की काफी कमी है। अन्य देशों में कोच से लेकर अन्य संसाधन बहुत एडवांस हैं, जिससे उन्हें आसानी से खेल की बारीकियों की जानकारी हो जाती है। इससे उनसे कड़ा मुकाबला होता है।

खेल के लिए सरकार को और क्या करना चाहिए ?
- देश और प्रदेश की सरकार को सबसे पहले खिलाड़ियों को अच्छे संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए। जिससे वे अच्छी प्रैक्टिस कर सकें।
ओलंपिक का कोई मजेदार वाकया ?
- टोक्यो ओलंपिक में जीत मिलने के बाद सभी साथी खिलाड़ियों के जश्न मनाने की खुशियां न भूलने वाली हैं। देश के लिए पदक मिलने पर सभी खुशी से झूम रहे थे। हालांकि कोविड गाइड लाइन के चलते खुशियां मनाना काफी सीमित हद तक रहा।
खिलाड़ी न होते तो क्या होते ?
- जैसे मैंने पहले बताया कि मेहनत अगर सही दिशा में है तो सफलता जरूर मिलेगी। मुझे खिलाड़ी ही बनना था। फिर भी मैं खिलाड़ी न बनता तो खेती करता।
अन्य शौक?
- मुझे पहाड़ों पर घूमना बेहद पसंद है। इसके साथ ही अलग-अलग देशों में घूमना, वहां के बारे में जानना अच्छा लगता है।
इधर कौन सी फिल्म अच्छी लगी ?
मुझे के केवल आर्मी से जुड़ी फिल्में ही अच्छी लगती हैं। हाल ही में अमेरिकन थ्रिलर मूवी देखी जो काफी अच्छी लगी।
शादी का इरादा कब तक, कोई जीवन में आया क्या ?
हंसते हुए, अभी कोई इरादा नहीं है और कोई है भी नही
नई प्रतिभाओं के लिए क्या संदेश।
जिस भी क्षेत्र में हों कड़ी मेहनत करें, अनुशासित रहें और धर्य रखें। सफलता सिर्फ इसी से मिलेगी।
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