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सराफा बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटा, ग्राहक नदारद 

Mon, 03 Jul 2017 12:59 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Mon, 03 Jul 2017 12:59 AM IST
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Silence on the second day in the bullion market, the customer declined
सराफा बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटा, ग्राहक नदारद  - फोटो : सराफा बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटा, ग्राहक नदारद 
सराफा बाजार में दूसरे दिन भी सन्नाटे जैसी स्थिति रही। ग्राहक भी नगण्य थे। कारोबारियों का कहना था कि अगले चार माह तक सहालग होनी नहीं है। इसके साथ ही नई कर प्रणाली समझ में नहीं आ रही है। संबंधित विभाग न तो तकनीकी जानकारी दे रहा है और न ही मदद कर रहा है। ऐसी स्थिति में कारोबार कैसे होगा। हालांकि ब्रांडेड शोरूमों में कामकाज सामान्य हुआ और नए सिस्टम से बिल भी जारी हुए।
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इनका कहना है
जब भी कोई नया सिस्टम आता है तो समस्या बनी रहती है। धीरे-धीरे लोगाें को समझ में आ जाएगा। जो लोग पहले से ही टैक्स पेड काम कर रहे थे उन्हें कोई खास परेशानी नहीं हुई है। 
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- पुनीत अग्रवाल, कारोबारी, चौपला मार्ग
सरकार ने आधी अधूरी तैयारी से नई कर प्रणाली लागू तो कर दी है, लेकिन बाजार इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं है। व्यापारियाें को समझने में देर लगेगी। हालांकि जीएसटी आने से लोगों में भय बना हुआ है। ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं। 
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- प्रदीप अग्रवाल, कारोबारी, शिवाजी मार्ग 
जीएसटी लागू तो होना ही था लेकिन कुछ जल्दबाजी हो गई। व्यापारी तकनीकी तौर पर कमजोर है उसे मौका मिलना चाहिए। इससे पहले भी वैट आदि टैक्स आए थे तब भी हड़बड़ी मची रही। इसे लेकर कुछ भ्रांतियां लोगाें ने फै ला दी। 
- संजय अग्रवाल, कारोबारी, सिविल लाइंस 
कपड़ा बाजार 
कपड़ा बाजार में कारोबार प्रभावित, पंजीकरण कराने का फैसला 
बरेली। कपड़ा बाजार में दूसरे दिन भी अफरातफरी फैली रही। कारोबारी नए सिस्टम पर बिल जारी नहीं कर पा रहे थे। रविवार शाम कपड़ा व्यापारी संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें तय हुआ कि जीएसटी को समझना चाहिए और जिन कारोबारियाें ने पंजीकरण नहीं कराए हैं वे तुरंत इसमें भाग लें। होल सेल कपड़ा एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुपम कपूर कहा कि जीएसटी आज नहीं कल तो लागू होना ही था इसलिए हमें कारोबार ठप न कर इसे समझना चाहिए। इस पर सहमति बनी कि जिन व्यापारियों ने अभी तक पंजीकरण, माइग्रेशन आदि प्रक्रिया नहीं अपनाई है वे संबंधित विभागों से संपर्क करें। कपूर ने कहा कि इससे संबंधित मामलों को हल कराने के सरकार से मांग करते रहेंगे। इस फैसले को संघर्ष समिति ने स्वीकार्य किया गया है। विशाल अरोरा, पंकज आनंद, राजीव अरोरा, अमरजीत सिंह, नरेश जडियाल आदि ने विचार रखे। इससे पहले अध्यक्ष कपूर ने नगर विकास मंत्री से मुलाकात कर जीएसटी में सरली करण कराने का आग्रह किया।
इनका कहना है 
सरकार प्रचार कर रही है जीएसटी लागू होने से महंगाई कम होगी और गरीब को फायदा होगा, लेकिन जो टैक्स सिस्टम आया है उससे कहीं नहीं लगता कि कोई भी उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा। किसी भी परिवार में शादी समारोह होता है तो खरीदारी बाजार से ही होती है। शादी से संबंधित सभी आइटमों पर टैक्स लगा है जो उसे देना है।
- सरदार कुलदीप सिंह, कारोबारी सिविल लाइंस 
जीएसटी एक अच्छा कदम है अगर पूरी तैयारी से इसे लागू किया जाता तो हर वर्ग इससे लाभांवित होता। कई जटिल प्रक्रियाएं हैं जिससे व्यापारी परेशान है। कोई भी नया सिस्टम आता है तो उसे समझने में अपनाने में दिक्कत होती है। कपड़ा कारोबारी सामान्य रूप से काम करें और पंजीकरण कराएं।
- अनुपम कपूर, थोक कारोबारी  
जीएसटी लागू तो हो गया, लेकिन कई चीजें स्पष्ट नहीं है। विभाग सही तरीके से साफ नहीं कर पा रहा है। डंडा चलाने से काम नहीं होता है। व्यापारियाें को समझाना होगा कि वे अतिरिक्त संसाधन के कैसे इसे अपनाए। 
- आदित्य अग्रवाल, रेडीमेड कारोबारी 
बेकरी बाजार 
बढ़ जाएंगे बेकरी के दाम, अभी बिक्री ठंडी 
बरेली। जीएसटी लागू होने से बेकरी का स्वाद कुछ बेस्वाद हो गया है। क्योंकि बेकरी के उत्पादाें पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया गया है, इससे पहले यह टैक्स 12 से 15 फीसदी वसूला जा रहा था। टैक्स स्लैब बढ़ने से ग्राहक प्रभावित होगा और बाजार में भी बिक्री घट सकती है। एक जुलाई के बाद शहर के ज्यादातर बेकरी संचालकाें के पास कंप्यूटर सिस्टम ही नहीं है। इनकी बिलिंग हो नहीं सकती। फर्न बेकरी, कुतुबखाना की बेकरी, बीआई आदि बाजारों में अधिकतर के पास सिस्टम ही नहीं है। जीएसटी लागू होने से नमकीन और बिस्किट के दाम बढ़ेंगे। 

इनका कहना है
पिछले दो दिनों से काम बंद चल रहा है। कोई भी बेकरी आइटम नहीं बनाया जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद उपभोक्ताओं को नया बिल दिया जाना है, जिसके लिए साफ्टवेयर अपडेट करना जरूरी है। 
- महेंद्र टिकयानी, लवली बेकरी कटरा चांद खां  
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