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तेज धूप और धूल के गुबार बना रहे बीमार, बढ़ी मरीजों की संख्या
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों का इलाज करते डॉ एम एल अग्रवाल। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। मौसम में हो रहे परिवर्तन के चलते बीमारियां घर-घर दस्तक देने लगी हैं। लू और धूल की वजह से हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीज काफी संख्या में राजकीय मेडिकल कॉलेज में आ रहे हैं। वहीं, बच्चे निमोनिया, दस्त एवं सांस रोग से पीड़ित हो रहे हैं। प्रतिदिन 150 से 200 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक धूप में निकलना खतरे से खाली नहीं है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अप्रैल में लू के साथ धूल भरी आंधी चलने से बीमारियां बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सांस के जरिये फेफड़ों में धूल जाने से सिलिकोसिस नामक बीमारी हो जाती है। इसमें खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत होती है। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) एवं अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए भी धूल का जाना बेहद खतरनाक है।
लगातार धूल जाने की वजह से स्थाई रूप से भी फेफड़ों की बीमारी हो सकती है। इसका कोई इलाज नहीं है। वहीं, लगातार धूप में रहने के चलते शरीर में तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता में कमी आ जाती है। शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इससे शरीर में पानी की कमी होने के चलते व्यक्ति बेहोश हो जाता है। ऐसी स्थिति में मौत तक हो सकती है। इसके अलावा तापमान में वृद्धि एवं तेज धूप बच्चों के लिए बेहद हानिकारक है। एलर्जी, जुकाम, निमोनिया एवं पतले दस्त जैसी बीमारियों से बच्चे ग्रसित हो जाते हैं। इससे शरीर बहुत कमजोर हो जाता है।
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बचाव के लिए यह करें
- घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ लेकर चलें।
- सिर पर भीगा अंगोछा बांध लें।
- धूल से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करें।
- धूप से बचाव के लिए छाता का इस्तेमाल करें।
- फसलों की कटाई सूरज निकलने से पहले और सूरज डूबने के बाद करें।
- यदि धूप में निकलना ही पड़े तो कुछ देर के लिए छांव वाले स्थान पर खड़े हो जाएं।
प्रतिदिन बन रहे लगभग 300 पर्चे
तापमान में वृद्धि होने के साथ-साथ मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 300 नए मरीज इलाज को आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक लगभग 300 पर्चे प्रतिदिन बनते हैं और 150 लोगों की जांचें की जाती हैं।
ज्यादा देर धूप में न रहें
लू स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। धूल से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होती हैं। वहीं लू की चपेट में आने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे में तेज धूप होने पर घर से निकलने पर परहेज करना चाहिए। धूप की तीव्रता खत्म होने पर ही या सुबह जल्दी घर से निकलें। अधिक समय तक धूप में न रहें। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 150 मरीज सांस एवं तेज धूप लगने के कारण बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं। पानी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। - डॉ. एमएल अग्रवाल, फिजिशियन, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर।
बच्चों का विशेष ध्यान रखें
तापमान में वृद्धि होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चे सांस, दस्त एवं निमोनिया जैसी बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। गर्मी में बच्चों का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। तेज धूप होने पर बच्चों को बाहर लेकर नहीं निकलना चाहिए। इन दिनों लगभग ढाई सौ बच्चे प्रतिदिन इलाज को आ रहे हैं। इसमें लापरवाही बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है। बच्चों को आरओ या फिर पानी को उबालकर छान लेने के बाद देना चाहिए। -डॉ. अखिलेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक धूप में निकलना खतरे से खाली नहीं है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अप्रैल में लू के साथ धूल भरी आंधी चलने से बीमारियां बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सांस के जरिये फेफड़ों में धूल जाने से सिलिकोसिस नामक बीमारी हो जाती है। इसमें खांसी के साथ सांस लेने में दिक्कत होती है। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) एवं अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए भी धूल का जाना बेहद खतरनाक है।
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लगातार धूल जाने की वजह से स्थाई रूप से भी फेफड़ों की बीमारी हो सकती है। इसका कोई इलाज नहीं है। वहीं, लगातार धूप में रहने के चलते शरीर में तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता में कमी आ जाती है। शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इससे शरीर में पानी की कमी होने के चलते व्यक्ति बेहोश हो जाता है। ऐसी स्थिति में मौत तक हो सकती है। इसके अलावा तापमान में वृद्धि एवं तेज धूप बच्चों के लिए बेहद हानिकारक है। एलर्जी, जुकाम, निमोनिया एवं पतले दस्त जैसी बीमारियों से बच्चे ग्रसित हो जाते हैं। इससे शरीर बहुत कमजोर हो जाता है।
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बचाव के लिए यह करें
- घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ लेकर चलें।
- सिर पर भीगा अंगोछा बांध लें।
- धूल से बचने के लिए मास्क का प्रयोग करें।
- धूप से बचाव के लिए छाता का इस्तेमाल करें।
- फसलों की कटाई सूरज निकलने से पहले और सूरज डूबने के बाद करें।
- यदि धूप में निकलना ही पड़े तो कुछ देर के लिए छांव वाले स्थान पर खड़े हो जाएं।
प्रतिदिन बन रहे लगभग 300 पर्चे
तापमान में वृद्धि होने के साथ-साथ मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन लगभग 300 नए मरीज इलाज को आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक लगभग 300 पर्चे प्रतिदिन बनते हैं और 150 लोगों की जांचें की जाती हैं।
ज्यादा देर धूप में न रहें
लू स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। धूल से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होती हैं। वहीं लू की चपेट में आने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे में तेज धूप होने पर घर से निकलने पर परहेज करना चाहिए। धूप की तीव्रता खत्म होने पर ही या सुबह जल्दी घर से निकलें। अधिक समय तक धूप में न रहें। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 150 मरीज सांस एवं तेज धूप लगने के कारण बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं। पानी का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। - डॉ. एमएल अग्रवाल, फिजिशियन, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर।
बच्चों का विशेष ध्यान रखें
तापमान में वृद्धि होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। बच्चे सांस, दस्त एवं निमोनिया जैसी बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं। गर्मी में बच्चों का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। तेज धूप होने पर बच्चों को बाहर लेकर नहीं निकलना चाहिए। इन दिनों लगभग ढाई सौ बच्चे प्रतिदिन इलाज को आ रहे हैं। इसमें लापरवाही बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है। बच्चों को आरओ या फिर पानी को उबालकर छान लेने के बाद देना चाहिए। -डॉ. अखिलेश कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर।

राजकीय मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए बैठे मरीज। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR