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‘कईनी बरतिया तोहार ऐ छठी मैया...’
बरेली
Updated Sat, 28 Oct 2017 01:51 AM IST
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चार दिनी छठ पूजा महोत्सव शुक्रवार को उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। पूर्वांचल के लोग परिवार के साथ ब्रह्ममुहूर्त से पहले ही डाला और कोसी लेकर घाटों पर पहुंच गए। जैसे ही सूर्य देव रश्मियों के रथ पर सवार होकर दर्शन देनेे के लिए प्रकट हुए व्रती महिलाओं ने जल में खड़े होकर उनकी आराधना की और अर्घ्य देकर सुख, समृद्धि तथा शांति की कामना की। महिलाओं ने ‘जल्दी-जल्दी उग हे सूरज देव...,’ ‘कईनी बरतिया तोहार ऐ छठी मैया...’ और ‘कौन दिन उगी छई हेे दीनानाथ...’ आदि गीत गाते हुए भगवान सूर्य के उदय होने की प्रतीक्षा की।
शंकर पार्वती मंदिर, कैंट स्थित धोपा मंदिर, यूनिवर्सिटी स्थित श्री शिव शक्ति पीठ मंदिर, रामगंगा और देवरनिया नदी तट पर श्रद्धालु रात करीब तीन बजे से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। डाला और कोसी लेकर घाट पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से मेलेे जैसा माहौल हो गया। आलोकनगर के सुनील कुमार अपने परिवार के साथ तड़के ही शंकर पार्वती मंदिर पहुंच गए थे। पत्नी सूप लेकर पानी में खड़ी हो गई थीं। उन्होंने सुबह छह बजे सूर्य देव को अर्घ्य दिया। पूजा करते हुए मनौती मांगी। बताया, अब घर पहुंचकर प्रसाद बांटेंगी।
रामगंगा तट पर पांच बजे से ही मेला लग गया था। लोग परिवार के साथ चाय नाश्ते का इंतजाम करके पहुंचे थे। अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद उन्होंने मिल-बांटकर नाश्ता किया। घाट पर मौजूद पंडित मनोज और मुरारी लाल ने गन्ने लगाकर दीप जलाए। कुछ परिवारों ने पंडितों से पूजा संपन्न कराई, जबकि ज्यादातर ने खुद ही परंपरागत ढंग से पूजा की। ऐसा ही नजारा धोपेश्वर नाथ कैंट, देवरनिया नदी, विश्वविद्यालय स्थित मंदिर में रहा। लोगों ने भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की।
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शंकर पार्वती मंदिर, कैंट स्थित धोपा मंदिर, यूनिवर्सिटी स्थित श्री शिव शक्ति पीठ मंदिर, रामगंगा और देवरनिया नदी तट पर श्रद्धालु रात करीब तीन बजे से ही पहुंचना शुरू हो गए थे। डाला और कोसी लेकर घाट पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से मेलेे जैसा माहौल हो गया। आलोकनगर के सुनील कुमार अपने परिवार के साथ तड़के ही शंकर पार्वती मंदिर पहुंच गए थे। पत्नी सूप लेकर पानी में खड़ी हो गई थीं। उन्होंने सुबह छह बजे सूर्य देव को अर्घ्य दिया। पूजा करते हुए मनौती मांगी। बताया, अब घर पहुंचकर प्रसाद बांटेंगी।
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रामगंगा तट पर पांच बजे से ही मेला लग गया था। लोग परिवार के साथ चाय नाश्ते का इंतजाम करके पहुंचे थे। अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद उन्होंने मिल-बांटकर नाश्ता किया। घाट पर मौजूद पंडित मनोज और मुरारी लाल ने गन्ने लगाकर दीप जलाए। कुछ परिवारों ने पंडितों से पूजा संपन्न कराई, जबकि ज्यादातर ने खुद ही परंपरागत ढंग से पूजा की। ऐसा ही नजारा धोपेश्वर नाथ कैंट, देवरनिया नदी, विश्वविद्यालय स्थित मंदिर में रहा। लोगों ने भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की।
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