UP News: बरेली में पीडब्ल्यूडी का वरिष्ठ लिपिक बर्खास्त, फर्जीवाड़ा कर हासिल की थी नौकरी
बरेली में मृतक आश्रित कोटे पर युवक ने फर्जीवाड़ा लिपिक पद पर नौकरी हासिल कर ली। शिकायत के बाद जांच की गई तो पूरा मामला खुल गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर लिपिक को बर्खास्त कर दिया गया है।
विस्तार
बरेली में फर्जीवाड़ा करके लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रांतीय खंड में नौकरी हासिल करने वाले वरिष्ठ लिपिक अंबर सक्सेना को बर्खास्त कर दिया गया है। वह करीब साढ़े पांच महीने से निलंबित था।
लोक निर्माण विभाग में पिता आनंदी लाल सेवारत थे। सेवाकाल में ही उनकी मृत्यु के बाद मृतक आश्रित कोटे से अंबर ने 22 दिसंबर 2012 को लिपिक पद पर नौकरी हासिल की। प्रोन्नत होकर वह वरिष्ठ लिपिक बना।
मां की नौकरी का तथ्य छिपाया
रिकॉर्ड के मुताबिक अंबर सक्सेना ने नौकरी हासिल की, उस वक्त उनकी मां भी बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक थीं। अंबर सक्सेना ने आवेदन करते वक्त इस तथ्य छिपाया था। शिकायत के बाद शासन ने जांच के आदेश दिए। लोक निर्माण विभाग शाहजहांपुर के अधिशासी अभियंता रथिन सक्सेना ने जांच की।
जांच में नियुक्ति को अवैध पाया गया। जांच अधिकारी ने लिखा है कि अंबर सक्सेना ने धोखाधड़ी और षड्यंत्र के तहत गलत शपथ पत्रों को आधार बनाकर नौकरी प्राप्त की। अधिशासी अभियंता ने 31 अक्तूबर 2024 को जांच रिपोर्ट दी थी। इसी आधार पर अधीक्षण अभियंता प्रकाशचंद्र ने अंबर सक्सेना की सेवाएं समाप्त कर दीं।
इस नियमावली पर की गई कार्रवाई
सेवाकाल में मरने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने के लिए भर्ती नियमावली 1974 में पांचवां संशोधन 1999 में हुआ, जो 20 जनवरी 1999 से लागू है। इस संशोधन में स्पष्ट लिखा है कि अगर सेवारत कर्मी में पति-पत्नी में किसी एक की मृत्यु होती है और दूसरा सदस्य किसी सरकारी सेवा में है तो किसी आश्रित को नौकरी नहीं मिलेगी। इस मामले में इस तथ्य को छुपा कर झूठा शपथ पत्र दिया गया।