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Bareilly News: 43.58 करोड़ से अपग्रेड होगी सेमीखेड़ा चीनी मिल
Wed, 10 Jan 2024 01:42 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 10 Jan 2024 01:42 AM IST
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देवरनियां। सेमीखेड़ा चीनी मिल को 43.58 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया जाएगा। जिले की एक मात्र किसान सहकारी चीनी मिल के प्रबंधन की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार करके नेशनल शुगर फाउंडेशन नई दिल्ली के लिए भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
सेमीखेड़ा चीनी मिल की स्थापना 1982 में हुई थी। 1984 से गन्ना पेराई का काम शुरू हुआ। शुरुआत में चीनी मिल की क्षमता 1200 टीडीएस थी। 1994-95 में इसे बढ़ाकर 2750 टीडीएस कर दी गई। इसके बाद से चीनी मिल में मशीनरी अपग्रेड नहीं हुई है। पुराना सिस्टम होने की वजह से बार-बार पेराई ठप हो जाती है। इस वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन हंगामा होता है।
इस साल 28 नवंबर से चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हुआ है। अब तक कई बार पेराई का कार्य ठप हो चुका है। चीनी मिल प्रबंधन को किसानों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा। इसको देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस काम पर कुल 43.58 करोड़ की धनराशि खर्च होनी है। प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए चीनी मिल के जीएम शादाब असलम खान बीते दिनों सांसद संतोष गंगवार से भी मिले थे। उन्होंने सांसद को एक पत्र सौंपा। सांसद ने प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए पैरवी करने का भरोसा दिया। जीएम ने गन्ना मंत्री और गन्ना विकास विभाग के प्रमुख सचिव से भी इस संबंध में मुलाकात की है।
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किसानों को मिलेगा फायदा
चीनी मिल के अधिकारियों ने बताया कि बजट मंजूर होने के बाद चीनी मिल में कई काम हो सकेंगे। इससे चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ने के साथ चीनी परता में भी वृद्धि होगी। इससे जहां चीनी मिल अधिक गन्ना की पेराई कर सकेगी वहीं, परता अधिक आने से गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय से किया जा सकेगा।
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चीनी मिल को अपग्रेड कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंजूरी के लिए भेजा गया है। बजट मंजूर होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। - शादाब असलम, जीएम
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सेमीखेड़ा चीनी मिल की स्थापना 1982 में हुई थी। 1984 से गन्ना पेराई का काम शुरू हुआ। शुरुआत में चीनी मिल की क्षमता 1200 टीडीएस थी। 1994-95 में इसे बढ़ाकर 2750 टीडीएस कर दी गई। इसके बाद से चीनी मिल में मशीनरी अपग्रेड नहीं हुई है। पुराना सिस्टम होने की वजह से बार-बार पेराई ठप हो जाती है। इस वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आए दिन हंगामा होता है।
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इस साल 28 नवंबर से चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू हुआ है। अब तक कई बार पेराई का कार्य ठप हो चुका है। चीनी मिल प्रबंधन को किसानों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ा। इसको देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस काम पर कुल 43.58 करोड़ की धनराशि खर्च होनी है। प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए चीनी मिल के जीएम शादाब असलम खान बीते दिनों सांसद संतोष गंगवार से भी मिले थे। उन्होंने सांसद को एक पत्र सौंपा। सांसद ने प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए पैरवी करने का भरोसा दिया। जीएम ने गन्ना मंत्री और गन्ना विकास विभाग के प्रमुख सचिव से भी इस संबंध में मुलाकात की है।
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किसानों को मिलेगा फायदा
चीनी मिल के अधिकारियों ने बताया कि बजट मंजूर होने के बाद चीनी मिल में कई काम हो सकेंगे। इससे चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ने के साथ चीनी परता में भी वृद्धि होगी। इससे जहां चीनी मिल अधिक गन्ना की पेराई कर सकेगी वहीं, परता अधिक आने से गन्ना मूल्य का भुगतान भी समय से किया जा सकेगा।
चीनी मिल को अपग्रेड कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसे मंजूरी के लिए भेजा गया है। बजट मंजूर होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। - शादाब असलम, जीएम