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8100 प्रवासी श्रमिकों का डाटा बैंक बनाकर तलाश शुरू
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अपने घरों को लौट रहे श्रमिक। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बाहर से लौटे हजारों श्रमिकों में हुनर तलाशेंगे एक्सपर्ट
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उद्योग विभाग के साथ 18 विभागों के अफसरों के साथ डीएम ने बनाई रोजगार सृजन कमेटी
बरेली। लॉकडाउन से प्रभावित अन्य प्रांतों और जिलों से आए 8100 प्रवासियों को उनके योग्यता के अनुसार विभिन्न प्रतिष्ठान और कारखानों में समायोजित करने की कवायद शुरू हो गई है। एक्सपर्ट उनमें हुनर तलाशने में लगे हैं। डीएम ने रोजगार सृजन कमेटी गठित कर 17 विभागों को इसमें सदस्य बनाया गया है। साथ ही उद्यमियों और उनके संगठनों से भी सहयोग लिया जा रहा है।
अन्य स्थानों से काम छोड़कर जिले भर में आए श्रमिकों को काम दिलाने की मुहिम शुरू हो गई है। इसके तहत संबंधित लोगों से फोन संपर्क कर उनके अनुभव और कौशल को परखा जा रहा है। प्रशासन ने इसका डाटा बैंक तैयार कराना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों में अभी सिर्फ 8100 प्रवासी श्रमिक ही जिले में आए हैं। जबकि माना जा रहा है कि तीन-चार हजार चुपचाप अपने घरों में रहे हैं। इसलिए उनकी तलाश भी की जाएगी। अभी तक जिले में आए 8100 श्रमिकों में से करीब सवा तीन सौ कुशल श्रमिक मिले हैं। लगातार फोन पर संपर्क कर उनसे बायोडाटा एकत्र करने का काम उद्योग विभाग कर रहा है। इसके बावजूद श्रमिकों का डाटा बैंक तैयार नहीं हो पाया है। क्योंकि अभी तक बमुश्किल करीब छह हजार लोगों से संपर्क हो पाया है। श्रमिक कभी फोन उठाते तो कभी नंबर बंद मिलता है। अब विभाग एक व्हाट्सएप नंबर जारी करेगा। जिस पर संबंधित लोग अपना बायोडाटा प्रेषित कर सकेंगे। क्योंकि बड़ी तादाद में लोग बिना की पंजीकरण और रिकार्ड के भी मौजूद हैं। इन्हें तलाशना भी आसान काम नहीं है। इसके अलावा बिना पंजीकरण के लोगों की मौजूदगी और उनके नाम पते भी जुटाने का काम हो रहा है। इसके लिए विभाग एक व्हाट्सएप नंबर जारी कर संबंधित प्रवासी श्रमिकों से बायोडाटा मांगेगा।
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हुनर के मुताबिक मिलेगा काम
डीएम ने प्रवासी मजदूरों को काम दिलाने के लिए रोजगार सृजन समिति गठित कर दी है। डीएम नीतीश कुमार ने अपनी अध्यक्षता में बनाई समिति में नगर आयुक्त, सीडीओ, एडीएम प्रशासन और वित्त, उपायुक्त श्रम रोजगार, परियोजना अधिकारी, उप कृषि निदेशक, उप श्रमायुक्त, जिला ग्रामोद्योग, पंचायत राज अधिकारी, जीटीआई, आईटीआई प्रधानाचार्य, कृषि अधिकारी, उद्यान अधिकारी, प्रबंधक लीड बैंक, सहायक सेवायोजन, उपायुक्त उद्योग नामित किए हैं। समिति में शामिल अफसर और उनके कार्यालय प्रवासी श्रमिकों में हुनर तलाशेंगे। उनके कौशल और आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
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उद्यमियों से पूछा- बताएं कितने श्रमिक चाहिए
डीएम नीतीश कुमार ने प्रवासियों को रोजगार दिलाने के लिए उद्यमियों से भी सहयोग लेने को कहा है। इसके तहत उद्योग विभाग ने उद्यमियों से पूछना शुरू कर दिया है कि उन्हें कितने और कैसे श्रमिक चाहिए। उद्यमियों के संगठनों से भी आईआईए, चैंबर ऑफ कामर्स और लघु उद्योग भारती से सहयोग लिया जा रहा है। इन संगठनों से कहा गया है कि वे विभिन्न कारखानों और प्रतिष्ठानों में खाली स्थान और जरूरत संबंधी डाटा तैयार करें। जिससे अन्य जिला और प्रांतों से आए लोगों को समायोजित कराया जा सके। विभाग ने चिह्नित हुए सवा तीन सौ कुशल प्रवासियों की सूची भी उद्यमियों और संगठनों को सौंप दी है। विभाग ने इस मुद्दे पर संबंधित उद्यमियों से बैठक कर विभिन्न जानकारियां जुटाई हैं।
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उद्योग विभाग के साथ 18 विभागों के अफसरों के साथ डीएम ने बनाई रोजगार सृजन कमेटी बरेली। लॉकडाउन से प्रभावित अन्य प्रांतों और जिलों से आए 8100 प्रवासियों को उनके योग्यता के अनुसार विभिन्न प्रतिष्ठान और कारखानों में समायोजित करने की कवायद शुरू हो गई है। एक्सपर्ट उनमें हुनर तलाशने में लगे हैं। डीएम ने रोजगार सृजन कमेटी गठित कर 17 विभागों को इसमें सदस्य बनाया गया है। साथ ही उद्यमियों और उनके संगठनों से भी सहयोग लिया जा रहा है।
अन्य स्थानों से काम छोड़कर जिले भर में आए श्रमिकों को काम दिलाने की मुहिम शुरू हो गई है। इसके तहत संबंधित लोगों से फोन संपर्क कर उनके अनुभव और कौशल को परखा जा रहा है। प्रशासन ने इसका डाटा बैंक तैयार कराना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों में अभी सिर्फ 8100 प्रवासी श्रमिक ही जिले में आए हैं। जबकि माना जा रहा है कि तीन-चार हजार चुपचाप अपने घरों में रहे हैं। इसलिए उनकी तलाश भी की जाएगी। अभी तक जिले में आए 8100 श्रमिकों में से करीब सवा तीन सौ कुशल श्रमिक मिले हैं। लगातार फोन पर संपर्क कर उनसे बायोडाटा एकत्र करने का काम उद्योग विभाग कर रहा है। इसके बावजूद श्रमिकों का डाटा बैंक तैयार नहीं हो पाया है। क्योंकि अभी तक बमुश्किल करीब छह हजार लोगों से संपर्क हो पाया है। श्रमिक कभी फोन उठाते तो कभी नंबर बंद मिलता है। अब विभाग एक व्हाट्सएप नंबर जारी करेगा। जिस पर संबंधित लोग अपना बायोडाटा प्रेषित कर सकेंगे। क्योंकि बड़ी तादाद में लोग बिना की पंजीकरण और रिकार्ड के भी मौजूद हैं। इन्हें तलाशना भी आसान काम नहीं है। इसके अलावा बिना पंजीकरण के लोगों की मौजूदगी और उनके नाम पते भी जुटाने का काम हो रहा है। इसके लिए विभाग एक व्हाट्सएप नंबर जारी कर संबंधित प्रवासी श्रमिकों से बायोडाटा मांगेगा।
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हुनर के मुताबिक मिलेगा काम
डीएम ने प्रवासी मजदूरों को काम दिलाने के लिए रोजगार सृजन समिति गठित कर दी है। डीएम नीतीश कुमार ने अपनी अध्यक्षता में बनाई समिति में नगर आयुक्त, सीडीओ, एडीएम प्रशासन और वित्त, उपायुक्त श्रम रोजगार, परियोजना अधिकारी, उप कृषि निदेशक, उप श्रमायुक्त, जिला ग्रामोद्योग, पंचायत राज अधिकारी, जीटीआई, आईटीआई प्रधानाचार्य, कृषि अधिकारी, उद्यान अधिकारी, प्रबंधक लीड बैंक, सहायक सेवायोजन, उपायुक्त उद्योग नामित किए हैं। समिति में शामिल अफसर और उनके कार्यालय प्रवासी श्रमिकों में हुनर तलाशेंगे। उनके कौशल और आवश्यकतानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
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