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सऊदी की कैद से आजाद होकर वतन लौट आए मसीत
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 27 Dec 2016 01:52 AM IST
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Saudi homeland free from the captivity returned Msit
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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हज यात्रा पर जाते समय नशीली गोलियों के साथ पकड़े गए हाजी मसीत खां को डेढ़ साल बाद सऊदी अरब की कैद से आजादी मिल गई। गवर्नर का आदेश मिलते ही बुजुर्ग मसीत खां वहां से वतन के लिए रवाना हो गए। मंगलवार को देर रात तक मसीत के घर पहुंचने की उम्मीद है। परिवार में मसीत के सऊदी के घर लौटने की खुशी देखते ही बन रही है। परिवारीजनों ने उनके स्वागत का इंतजाम किया है।
थाना बिथरी चैनपुर इलाके के पदारतपुर गांव के मसीत खाँ 2015 की हज यात्रा के लिए गए थे। उनके रिश्तेदार अली असगर ने उनको अपने सऊदी अरब में रहने वाले भाई अब्दुल सईद को देने लिए नींद की गोलियां दे दी थीं जो मसीत को मालूम भी नहीं था। 22 अगस्त 2015 को मदीना एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान मसीत के पास से नशे की गोलियां पकड़ गईं। इसकी वजह से उनको 4 महीने जेल में रहना पड़ा। बुजुर्ग पत्नी किसी तरह हज के अरकान पूरे करके लौट आई थीं। बरामद गोलियों का लैब टेस्ट कराया जो नींद की गोलियां थीं। गोलियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से उन पर मुकदमा चलाया गया। शराफत खान जो सऊदी अरब के मदीना शहर की कंपनी अलराज़ी में काम करते हैं। ठिरिया निज़ामत खान(बरेली) में उनका घर है। पता लगने पर शराफत खान ने 7 जनवरी को नारकोटिक्स जेल जाकर मसीत खान से मुलाक ात की। वहीं का वकील करने के बाद उन्होंने मसीत की पैरवी कराई। 10 जनवरी को अपनी आईडी पर जमानत कराकर अपने साथ कमरे पर ले आए। 8 महीने तक शराफत ने मसीत की खिदमत की और केस की पैरवी की। पांच जजों के पैनल में इस केस की सुनवाई हुई 2 जजों ने मसीत खाँ की उम्र को देखते हुए उनको माफी दी। 3 जजों ने 1500 रियाल 25, 500 रुपये जुर्माना डाल दिया। साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मदीने के गवर्नर ही इनको भारत जाने की इजाजत दे सकते हैं। गवर्नर ने मसीत की अर्जी पर उन्हें घर वापस आने की इजाजत दे दी। शराफत खान ने बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी को बताया कि 27 दिसंबर को शाम 6 मदीना एयरपोर्ट से मसीत खां और शराफत खान रवाना हो गए हैं। वो 28 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे और शाम तक बरेली आ जायेंगे।
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थाना बिथरी चैनपुर इलाके के पदारतपुर गांव के मसीत खाँ 2015 की हज यात्रा के लिए गए थे। उनके रिश्तेदार अली असगर ने उनको अपने सऊदी अरब में रहने वाले भाई अब्दुल सईद को देने लिए नींद की गोलियां दे दी थीं जो मसीत को मालूम भी नहीं था। 22 अगस्त 2015 को मदीना एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान मसीत के पास से नशे की गोलियां पकड़ गईं। इसकी वजह से उनको 4 महीने जेल में रहना पड़ा। बुजुर्ग पत्नी किसी तरह हज के अरकान पूरे करके लौट आई थीं। बरामद गोलियों का लैब टेस्ट कराया जो नींद की गोलियां थीं। गोलियों की संख्या ज्यादा होने की वजह से उन पर मुकदमा चलाया गया। शराफत खान जो सऊदी अरब के मदीना शहर की कंपनी अलराज़ी में काम करते हैं। ठिरिया निज़ामत खान(बरेली) में उनका घर है। पता लगने पर शराफत खान ने 7 जनवरी को नारकोटिक्स जेल जाकर मसीत खान से मुलाक ात की। वहीं का वकील करने के बाद उन्होंने मसीत की पैरवी कराई। 10 जनवरी को अपनी आईडी पर जमानत कराकर अपने साथ कमरे पर ले आए। 8 महीने तक शराफत ने मसीत की खिदमत की और केस की पैरवी की। पांच जजों के पैनल में इस केस की सुनवाई हुई 2 जजों ने मसीत खाँ की उम्र को देखते हुए उनको माफी दी। 3 जजों ने 1500 रियाल 25, 500 रुपये जुर्माना डाल दिया। साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मदीने के गवर्नर ही इनको भारत जाने की इजाजत दे सकते हैं। गवर्नर ने मसीत की अर्जी पर उन्हें घर वापस आने की इजाजत दे दी। शराफत खान ने बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी को बताया कि 27 दिसंबर को शाम 6 मदीना एयरपोर्ट से मसीत खां और शराफत खान रवाना हो गए हैं। वो 28 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे और शाम तक बरेली आ जायेंगे।
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