राज्यपाल बनाए जाने पर बोले संतोष गंगवार: पद की नहीं थी इच्छा, जो जिम्मेदारी मिली है, उसे बखूबी निभाऊंगा
झारखंड के नवनियुक्त राज्यपाल संतोष गंगवार ने बरेली में भाजपा कार्यालय पर अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को मतभेद भुलाकर पार्टी को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो जिम्मेदारी मिली है, इसे बखूबी निभाऊंगा।
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झारखंड का राज्यपाल बनाए जाने के बाद बरेली के पूर्व सांसद संतोष गंगवार का रविवार को सिविल लाइंस स्थित भाजपा कार्यालय पर फूलमालाएं पहनाकर स्वागत हुआ तो वह भावुक हो गए। कहा कि उन्हें पद की कोई इच्छा नहीं थी। पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे बखूबी निभाऊंगा।
राजनीतिक संस्मरण साझा करते हुए संतोष गंगवार ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पार्टियां ऐसे ही काम करती हैं। आपाताकल के बाद जब पार्टी का गठन हुआ, तब संगठन में महामंत्री के तौर पर काम करने का मौका मिला। रोज सौ-सौ पोस्टकार्ड लिखता था।
तब पार्टी का स्वरूप दूसरा था, अब दूसरा है। पहले भी जो जिम्मेदारी मिली, उसे बखूबी निभाया। हमारे देश में कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां के बारे में लगातार अखबारों में प्रकाशित होता रहता है। ऐसे ही एक राज्य में कार्य करने का मौका मिला है। इस जिम्मेदारी को मैं बखूबी निभाऊंगा।
संतोष ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी से टिकट की मांग नहीं की। बीते चुनाव में पार्टी से चुनाव लड़ने की मांग की थी, पर पद में कोई रुचि नहीं थी। अब पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी, वह दूसरे तरह की है। अब जो काम करूंगा, उसमें अंतर है। सबको साथ लेकर चल पाने का काम आसान नहीं।
वरिष्ठ डांट दें तो भी उनका सम्मान करें
संतोष गंगवार ने कहा कि लंबे समय तक पार्टी के साथ काम करने के दौरान कुछ साथियों से नाराजगी भी रही, पर सबके प्यार की बदौलत ही इस मुकाम तक पहुंचा हूं। मैंने रामलाल का तौर तरीका देखा है। वरिष्ठ कार्यकर्ता सुमन केसरी के साथ भी रहा।
वह ऐसे डांटते थे, जिसकी कल्पना मुश्किल है। पर इसका सम्मान करना चाहिए। इसलिए राजनीतिक बातें यहीं छोड़कर जाएं। अगर याद रखेंगे तो अपना भी नुकसान करेंगे और पार्टी का भी। कुछ बातें अगर किसी साथी को अच्छी न लगी हों तो क्षमा चाहता हूं।
पार्टी की तीसरी बार जीत की दुनिया भर में चर्चा
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस तीसरी बार जीती थी। अब भाजपा जीती है, जिसकी चर्चा देश-दुनिया में हो रही है। पार्टी की सक्रियता और काम करने का जो तरीका है, उससे तालमेल बिठाएं। राजनीति का स्वरूप भी यही है कि जो जिम्मेदारी मिले, उसे निभाते रहें। नाराजगी-प्रसन्नता दोनों अलग बातें हैं।