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अफसरों पर आंच आई तो फील्ड स्टाफ की गर्दन फंसाई 

Mon, 02 Apr 2018 09:10 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Mon, 02 Apr 2018 09:10 PM IST
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Samuhik vivah sammelan: only 56 marriages takes place instead of 476
marriage

सामूहिक विवाह योजना में हीलाहवाली करने के मामले में खुद को फंसता देख अफसरों ने मातहतों की गर्दन फंसानी शुरू कर दी है। इसकी शुरूआत करते हुए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने अपने फील्ड स्टाफ राजस्व निरीक्षकों और सहायक राजस्व निरीक्षकों को मार्च माह का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है। इसी तरह इसके लिए जिम्मेदार अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी अधीनस्थों को फंसने की तैयारी शुरू कर दी है। 

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गरीब बेटियों की शादी कराने के लिए सीएम की सामूहिक विवाह योजना अफसरों की लापरवाही से फेल हो चुकी है। समाज कल्याण विभाग को जनवरी में शासन से मिले 1.66 करोड़ से 476 शादियां करानी थीं, लेकिन केवल 56 विवाह ही हो सके हैं। इसके अलावा हाल में दूसरी किस्त का आया 3.88 करोड़ का बजट समाज कल्याण विभाग शासन को भेज चुका है। सामूहिक विवाह कराने का जिम्मा समाज कल्याण अधिकारी के साथ ही स्थानीय निकायों में नगर आयुक्त, ब्लॉकों में बीडीओ और जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी पर था। मगर, इन अधिकारियों की लापरवाही से मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाली यह योजना पूरी तरह से फेल हो चुकी है। डीएम से लेकर सीडीओ स्तर से कई बार मीटिंग हुईं और कड़े निर्देश भी जारी किए गए, लेकिन निर्धन बेटियों की शादी कराने को लेकर अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। बीडीओ, अपर मुख्य अधिकारी, नगर आयुक्त और ईओ के खातों में सामूहिक विवाह का करीब 1.47 करोड़ रुपये डंप पड़ा हुआ है। सूत्र बताते हैं कि इस लापरवाही को लेकर शासन की निगाह काफी पहले ही टेढ़ी हो चुकी है। 31 मार्च बीतने के बाद अब इस हीलाहवाली को लेकर शासन से कार्रवाई होने की होने की संभावना है। इस मामले में खुद का बचाव करते हुए बड़े अधिकारियों ने छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में अपर मुख्य अधिकारी ने अपने सभी राजस्व और सहायक राजस्व निरीक्षकों को मार्च माह का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया गया है। इसके अलावा दूसरे जिम्मेदार विभाग भी इस मामले में कार्रवाई से बचने का तानाबाना बुन रहे हैं। 
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सामूहिक विवाह योजना को नाकाम करने के लिए जो भी विभाग जिम्मेदार हैं, उनके सभी अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उनके पास अभी तक केवल जिला पंचायत के फील्ड स्टाफ का वेतन रुकने की जानकारी मिली है। - अशोक दीक्षित, जिला समाज कल्याण अधिकारी 

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