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डिप्टी एसीएमओ से छिनी सैंपलिंग की जिम्मेदारी, जवाब तलब
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लापरवाही से पड़े कोरोना के सैंपल।
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हजारों कोरोना संदिग्ध सैंपल को जांच के लिए न भेजे जाने का मामला
नए सैंपलिंग नोडल अफसर नियुक्त कर सीएमओ ने दिए जांच कराने के निर्देश
बरेली। हजारों कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेने के बाद भी उन्हें जांच के लिए न भेजे जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह से सैंपलिंग की जिम्मेदारी छीन ली गई है। उनका जवाब तलब भी किया गया है। चेतावनी दी गई है कि अगर जवाब संतोषजनक न मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें खराब होने से बचे सैंपल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर की रोकथाम के निर्देश के बावजूद स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना हुआ है। जिले में सीएचसी और पीएचसी समेत एमएमयू, स्टेटिक टीम द्वारा एक से 17 नवंबर तक लिए गए 15 हजार से ज्यादा कोरोना संदिग्धों के आरटीपीसीआर सैंपल जांच के लिए लैब ही नहीं भेजे गए। बृहस्पतिवार को मामला सामने आया तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पहुंचे। उन्होंने वहां रखे सैंपल में से खराब होने से बचे सैंपल अलग करने को कहा।
उन्होंने सुरक्षित सैंपल की जांच कराने के लिए उनके कंसाइनमेंट बनाकर तत्काल लैब भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने कार्यालय पहुंचकर डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह को सैंपलिंग के नोडल अधिकारी के पद से हटा दिया। उनके स्थान पर एसीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को सैंपलिंग का नोडल अफसर नियुक्त कर सैंपल की जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा। डॉ. सीपी सिंह से इस मामले में जवाब भी मांगा गया है।
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यह था मामला
जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी समेत तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर, मेडिकल मोबाइल यूनिट, स्टेटिक टीम की ओर से लगातार आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच की जा रही है। एंटीजन जांच रिपोर्ट पांच मिनट में सामने आ जाती है, लेकिन आरटीपीसीआर की जांच के लिए सैंपल जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब भेजे जाते हैं, लेकिन एक से 17 नवंबर तक लिए गए करीब 15 हजार आरटीपीसीआर सैंपल को जांच के लिए लैब नहीं भेजा गया। इनमें से तमाम सैंपल खराब हो चुके हैं। इनकी जांच में अब सटीक नतीजा मिलना मुश्किल बताया जा रहा है। प्रकरण का खुलासा होने पर कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।
संक्रमित के संपर्क में रहे लोगों के सैंपल की भी नहीं कराई जांच
बरेली। कोरोना की रोकथाम के लिए मुस्तैदी से काम करने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज आरटीपीसीआर सैंपलों की भी जांच अब तक नहीं कराई गई है। वे भी तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर के स्टोर रूम में रखे हैं। उचित तापमान पर न रखे होने से सैंपल के खराब होने की आशंका है।
सर्विलांस सेल से प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 नवंबर को लाल फाटक तिरुपति विहार के रहने वाले सैन्यकर्मी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव मिली थी। उसने ट्रूनेट जांच कराई थी। इसके बाद सैन्यकर्मी के संपर्क में आने वाले परिजन समेत करीब 18 संदिग्ध संक्रमितों की सैंपलिंग कराई गई थी। सभी के आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल 15 नवंबर को लिए गए थे। इन्हें कोविड फ्लू कॉर्नर पर कंसाइनमेंट बनाकर जांच को लैब भेजने के लिए रखा गया था।
संपर्क में आने वाले लोगों के सैंपल को अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज करते हुए उस पर पॉजिटिव कॉन्टैक्ट लिखा जाता है, ताकि किन्हीं भी परिस्थितियों में प्राथमिकता पर सैंपल की जांच कराई जा सके और रिपोर्ट के आधार पर तेजी से आगे की कार्रवाई की जा सके। मगर, यहां के स्टोर रूम में भरे तमाम सैंपल के बीच ही इन्हें भी रख दिया गया। लिहाजा, सैंपल की जांच ही नहीं हो सकी।
परिजन सर्विलांस से पूछ रहे जांच रिपोर्ट
संक्रमित के संपर्क में रहने वालों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सैंपल देने के बाद परिजन लगातार सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम, उनकी टीम समेत हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर रिपोर्ट की जानकारी ले रहे हैं। बताया जाता है कि उन्हें बड़ी तादाद मेें सैंपल होने की वजह से जांच रिपोर्ट मिलने में देरी की बात कहकर शांत कराया जा रहा है, जबकि सैंपल जांच के लिए अब तक लैब ही नहीं पहुंचे हैं।
संक्रमित हुए तो और लोग भी आएंगे चपेट में
कोरोना संक्रमित के संपर्क में रहे महानगर के युवक के चार परिजन में से मां और पत्नी की एंटीजन जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिल चुकी है। ऐसे में पश्चिम बंगाल से वापस आने वाले संक्रमित युवक के संपर्क में पत्नी और बेटी रहे। इनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की आशंका है।
संक्रमित के परिजनों को उनकी जांच रिपोर्ट आने तक सेल्फ आइसोलेशन में रहने का सुझाव दिया गया था। प्रकरण संज्ञान में आने पर सभी सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं। - डॉ. बलबीर सिंह, सीएमओ
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नए सैंपलिंग नोडल अफसर नियुक्त कर सीएमओ ने दिए जांच कराने के निर्देश
बरेली। हजारों कोरोना संदिग्धों के सैंपल लेने के बाद भी उन्हें जांच के लिए न भेजे जाने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह से सैंपलिंग की जिम्मेदारी छीन ली गई है। उनका जवाब तलब भी किया गया है। चेतावनी दी गई है कि अगर जवाब संतोषजनक न मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को सैंपलिंग की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें खराब होने से बचे सैंपल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर की रोकथाम के निर्देश के बावजूद स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना हुआ है। जिले में सीएचसी और पीएचसी समेत एमएमयू, स्टेटिक टीम द्वारा एक से 17 नवंबर तक लिए गए 15 हजार से ज्यादा कोरोना संदिग्धों के आरटीपीसीआर सैंपल जांच के लिए लैब ही नहीं भेजे गए। बृहस्पतिवार को मामला सामने आया तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पहुंचे। उन्होंने वहां रखे सैंपल में से खराब होने से बचे सैंपल अलग करने को कहा।
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उन्होंने सुरक्षित सैंपल की जांच कराने के लिए उनके कंसाइनमेंट बनाकर तत्काल लैब भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने कार्यालय पहुंचकर डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह को सैंपलिंग के नोडल अधिकारी के पद से हटा दिया। उनके स्थान पर एसीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा को सैंपलिंग का नोडल अफसर नियुक्त कर सैंपल की जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा। डॉ. सीपी सिंह से इस मामले में जवाब भी मांगा गया है।
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यह था मामला
जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी समेत तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर, मेडिकल मोबाइल यूनिट, स्टेटिक टीम की ओर से लगातार आरटीपीसीआर और एंटीजन जांच की जा रही है। एंटीजन जांच रिपोर्ट पांच मिनट में सामने आ जाती है, लेकिन आरटीपीसीआर की जांच के लिए सैंपल जिला अस्पताल की बीएसएल-2 लैब भेजे जाते हैं, लेकिन एक से 17 नवंबर तक लिए गए करीब 15 हजार आरटीपीसीआर सैंपल को जांच के लिए लैब नहीं भेजा गया। इनमें से तमाम सैंपल खराब हो चुके हैं। इनकी जांच में अब सटीक नतीजा मिलना मुश्किल बताया जा रहा है। प्रकरण का खुलासा होने पर कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।
संक्रमित के संपर्क में रहे लोगों के सैंपल की भी नहीं कराई जांच
बरेली। कोरोना की रोकथाम के लिए मुस्तैदी से काम करने का दावा करने वाले स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा सामने आया है। कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज आरटीपीसीआर सैंपलों की भी जांच अब तक नहीं कराई गई है। वे भी तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर के स्टोर रूम में रखे हैं। उचित तापमान पर न रखे होने से सैंपल के खराब होने की आशंका है।
सर्विलांस सेल से प्राप्त जानकारी के अनुसार 13 नवंबर को लाल फाटक तिरुपति विहार के रहने वाले सैन्यकर्मी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव मिली थी। उसने ट्रूनेट जांच कराई थी। इसके बाद सैन्यकर्मी के संपर्क में आने वाले परिजन समेत करीब 18 संदिग्ध संक्रमितों की सैंपलिंग कराई गई थी। सभी के आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल 15 नवंबर को लिए गए थे। इन्हें कोविड फ्लू कॉर्नर पर कंसाइनमेंट बनाकर जांच को लैब भेजने के लिए रखा गया था।
संपर्क में आने वाले लोगों के सैंपल को अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज करते हुए उस पर पॉजिटिव कॉन्टैक्ट लिखा जाता है, ताकि किन्हीं भी परिस्थितियों में प्राथमिकता पर सैंपल की जांच कराई जा सके और रिपोर्ट के आधार पर तेजी से आगे की कार्रवाई की जा सके। मगर, यहां के स्टोर रूम में भरे तमाम सैंपल के बीच ही इन्हें भी रख दिया गया। लिहाजा, सैंपल की जांच ही नहीं हो सकी।
परिजन सर्विलांस से पूछ रहे जांच रिपोर्ट
संक्रमित के संपर्क में रहने वालों की मानसिक स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। सैंपल देने के बाद परिजन लगातार सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम, उनकी टीम समेत हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर रिपोर्ट की जानकारी ले रहे हैं। बताया जाता है कि उन्हें बड़ी तादाद मेें सैंपल होने की वजह से जांच रिपोर्ट मिलने में देरी की बात कहकर शांत कराया जा रहा है, जबकि सैंपल जांच के लिए अब तक लैब ही नहीं पहुंचे हैं।
संक्रमित हुए तो और लोग भी आएंगे चपेट में
कोरोना संक्रमित के संपर्क में रहे महानगर के युवक के चार परिजन में से मां और पत्नी की एंटीजन जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिल चुकी है। ऐसे में पश्चिम बंगाल से वापस आने वाले संक्रमित युवक के संपर्क में पत्नी और बेटी रहे। इनकी भी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की आशंका है।
संक्रमित के परिजनों को उनकी जांच रिपोर्ट आने तक सेल्फ आइसोलेशन में रहने का सुझाव दिया गया था। प्रकरण संज्ञान में आने पर सभी सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं। - डॉ. बलबीर सिंह, सीएमओ