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साबिर और सलीम के साउंड कांवड़ियों में भरते हैं जोश
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 17 Jul 2016 12:51 AM IST
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कांवडि़यों की मस्ती
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भले ही कुछ लोग धर्म और संप्रदाय के नाम पर भेद पैदा करने की कोशिश करते रहते रहें, मगर सच तो यही है कि तमाम मौकों पर बिना धर्म जाति देखे सभी एक दूसरे के पूरक बन कर ही इस समाज को बनाते हैं। ईद मीलादुन्नबी का जुलूस हो या कांवड़ियों के जत्थे, इसमें दूसरे संप्रदाय के सहयोग के बिना रंग नहीं भर पाता। बरेली में पिछले दिनों बार बार माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। व्हाट्सएप पर टिप्पणी पोस्ट करने पर तीन बार बवाल हुआ। अब फिर सावन में कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है..प्रशासन फिक्रमंद है। एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं...लेकिन इस शहर ने तो पहले से ही एक दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों में हाथ बंटाने वाले हैं।
कांवड़ियों का जत्थे जब कांवड़ लेकर निकलते हैं तो लाउड स्पीकर (साउंड) पर शिव के भजन और गूंजते जयकारे कांवरियों में जोश भरते हैं। वह साउंड सिस्टम साबिर हुसैन और सलीम मियां के होते हैं। यही नहीं सलीम खां और जल्ले भाई का साउंड सिस्टम भी कांवड़ियों के जत्थे के साथ दस सालों से जा रहे हैं। इसके अलावा यासीन अंसारी के साउंड के साथ-साथ गाड़ी भी कांवड़ियों के जत्थों को लेकर जाती है।
इसमें साबिर हुसैन की कोहाड़ापीर पर साउंड सिस्टम की शाप है। उनका कहना है कि उन्होंने तो कभी सोचा ही नहीं कि उनका साउंड कहां जा रहा है। हमारे यहां जो भी अपनी जरूरत के लिए साउंड लेने आता है वह उसे हिंदू मुस्लिम के नजरिए से नहीं देखते। उन्होंने यह भी बताया कि उनका तो वृंदावन के हर गोविंद शर्मा और राम प्रसाद शर्मा से 15 साल का कांट्रेक्ट है। उनके साथ मुंबई, उड़ीसा, चंडीगढ़, दिल्ली आदि तमाम जगहों पर रामलीला में साउंड लेकर जाते रहते हैं।
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टाउन हाल पर साउंड सिस्टम की शाप चलाने वाले सलीम मियां का कहना है कि वह अपने यहां आने वाले हर शख्स को बस ग्राहक की नजर से देखते हैं जो सिर्फ इंसान के तौर पर उनके सामने होता है। हम तो नाम पता भी इस लिए पूछते हैं कि साउंड पहुंचाने के लिए जरूरी होता है। यहां तो सालों गुजर गए हर धर्म के लोग अपने कार्यक्रमों के लिए साउंड लेने आते हैं। बात यह भी है कि आने वाले ग्राहक भी कोई भेद मान कर नहीं आते।
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कांवड़ियों का जत्थे जब कांवड़ लेकर निकलते हैं तो लाउड स्पीकर (साउंड) पर शिव के भजन और गूंजते जयकारे कांवरियों में जोश भरते हैं। वह साउंड सिस्टम साबिर हुसैन और सलीम मियां के होते हैं। यही नहीं सलीम खां और जल्ले भाई का साउंड सिस्टम भी कांवड़ियों के जत्थे के साथ दस सालों से जा रहे हैं। इसके अलावा यासीन अंसारी के साउंड के साथ-साथ गाड़ी भी कांवड़ियों के जत्थों को लेकर जाती है।
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इसमें साबिर हुसैन की कोहाड़ापीर पर साउंड सिस्टम की शाप है। उनका कहना है कि उन्होंने तो कभी सोचा ही नहीं कि उनका साउंड कहां जा रहा है। हमारे यहां जो भी अपनी जरूरत के लिए साउंड लेने आता है वह उसे हिंदू मुस्लिम के नजरिए से नहीं देखते। उन्होंने यह भी बताया कि उनका तो वृंदावन के हर गोविंद शर्मा और राम प्रसाद शर्मा से 15 साल का कांट्रेक्ट है। उनके साथ मुंबई, उड़ीसा, चंडीगढ़, दिल्ली आदि तमाम जगहों पर रामलीला में साउंड लेकर जाते रहते हैं।
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टाउन हाल पर साउंड सिस्टम की शाप चलाने वाले सलीम मियां का कहना है कि वह अपने यहां आने वाले हर शख्स को बस ग्राहक की नजर से देखते हैं जो सिर्फ इंसान के तौर पर उनके सामने होता है। हम तो नाम पता भी इस लिए पूछते हैं कि साउंड पहुंचाने के लिए जरूरी होता है। यहां तो सालों गुजर गए हर धर्म के लोग अपने कार्यक्रमों के लिए साउंड लेने आते हैं। बात यह भी है कि आने वाले ग्राहक भी कोई भेद मान कर नहीं आते।