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Rs 2000 Notes: लोकसभा चुनाव से पहले जमाखोरों पर चोट, विशेषज्ञों ने सराहा; जानिए व्यापारियों ने क्या कहा

Sat, 20 May 2023 06:20 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाल ब्यूरो, बरेली
अमर उजाल ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 20 May 2023 06:20 AM IST
सार

बरेली के व्यापारियों का कहना है कि यह अच्छा फैसला रहा, क्योंकि दो हजार के नोट पहले से ही बाजार से लापता हो गए थे। कुछ व्यापारियों का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले सरकार को नहीं करने चाहिए।

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Rs 2,000 notes withdrawn Traders reacted to two thousand notes
दो हजार का नोट

विस्तार

प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की थी। अब एक बार फिर लोकसभा चुनाव से पहले दो हजार का नोट बंद कर जमाखोरों पर चोट की है। विशेषज्ञ जहां इस फैसले की सराहना कर रहे हैं, वहीं व्यापारियों व राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है।

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बरेली के व्यापारियों का कहना है कि यह अच्छा फैसला रहा, क्योंकि दो हजार के नोट पहले से ही बाजार से लापता हो गए थे। कुछ व्यापारियों का यह भी कहना है कि इस तरह के फैसले सरकार को नहीं करने चाहिए। विपक्षी पार्टियां भी इस फैसले को गलत ठहरा रही हैं। फिलहाल, इससे पारदर्शिता के साथ ही ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलने के आसार हैं।
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सीए शांतनु सक्सेना कहते हैं कि सरकार ने जब पहले नोटबंदी की थी तो उन नोटों को अवैध करेंसी करार दे दिया था। जनता सिर्फ बैंकों में ही नोट जमा कर पा रही थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ है, जबकि सरकार भी इस बात को मान रही है कि ये नोट अब चलन में नहीं हैं। 
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सरकार को चाहिए था कि दो हजार के नोट को भी अवैध करेंसी घोषित कर देती और निर्धारित समय सीमा में बैंकों में जमा करने का आदेश दे देती। ऐसा न करने से अब यह पैसा लोग बाजार में खपाना शुरू करेंगे। अगले एक महीने में बाजार में बड़ी तादात में ये नोट पहुंच जाएंगे। यह भी कहा कि बड़े नोट चलन से बाहर होंगे तो ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सरकार को मदद मिल सकेगी।

भाजपाइयों ने सराहा, विपक्षियों ने बताया गलत

भाजपा जिलाध्यक्ष पवन शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन लेनदेन को बढ़ावा मिलने से दो हजार का नोट पहले ही लगभग चलन से बाहर हो गया था। करीब एक साल से तो मुझे ही नहीं दिखाई दिया। इसे बंद कर देना ही ठीक है। बड़े नोट चलन से बाहर होंगे तो भ्रष्टाचार घटेगा। 

कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष अजय शुक्ला ने कहा कि इसमें न तो आरबीआई के गवर्नर का कोई रोल है और न ही वित्त मंत्री कहीं दिखाई दे रहे हैं। यह सरकार की अदूरदर्शिता दिखाता है। बार-बार नोटबंदी से देश की जनता से परेशान होती है। यह सरकार का गलत फैसला है। 

सपा जिलाध्यक्ष शिवचरन कश्यप ने कहा कि सरकार ने पहले भी ऐसा फैसला लेकर गरीबों को लाइन में लगाया था। फिर एक ऐसा ही फैसला ले लिया। पहले भी गरीबों को लाइन में लगना पड़ा था। अगर इसे बंद करना ही था तो जारी क्यों किया।

बसपा जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह ने कहा कि दो हजार नोट बंद करने का आरबीआई का फैसला ठीक है। पिछले काफी समय से यह नोट बाजार में दिखाई नहीं दे रहे थे। इससे पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में भी आसानी होगी।

व्यापार पर नहीं पड़ेगा कोई असर

इसका व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, कारण मार्केट और बैंक से बहुत पहले से ही व्यापारियों को दो हजार का नोट नहीं मिल रहा है। - राकेश सेठी, होजरी व्यापारी

लंबे समय से दुकानदारी में दो हजार के नोट का कोई रोल नहीं बचा है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बल्कि अब ब्लैक मनी बाहर आएगी। - राजेश छाबड़ा, अध्यक्ष, शास्त्री मार्केट एसोसिएशन

यह फैसला ठीक रहा। 2017 से मुझे दो हजार का नोट नहीं मिला। सरकार से मेरी मांग है कि 500 का नोट भी बंद कर दे। इससे भ्रष्टाचार कम होगा। - महेंद्र खटवानी, युवा अध्यक्ष, केमिस्ट एसोसिएशन

अब इससे लोगों को बड़ा फायदा होगा। जल्द ही दबा हुआ नोट बाजार में व्यापारियों के पास पहुंचेगा। यह बाजार को उठाने का काम करेगा। - नरेंद्र गुप्ता, कपड़ा व्यापारी

यह फैसला व्यापारियों को परेशान करने वाला है। ग्राहक नोट लेकर बाजार में आएंगे और दबाव बनाएंगे कि नोट लो। इससे सरकार की छवि खराब होगी। - सुदेश अग्रवाल, व्यापारी नेता

सरकार ने एक बार फिर लोगों को चौंकाया है। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा, अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। नकली मुद्रा चलन से बाहर हो जाएगी। - अनुज अग्रवाल, मीडिया प्रभारी, उप्र उद्योग व्यापार

मंदी की आशंका से मिलेगी निजात : प्रो. प्रदीप सिंघल

बरेली कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर प्रदीप सिंघल का कहना है कि दो हजार रुपये का नोट प्रचलन से बाहर किए जाने से देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव होगा। दो हजार के नोट जमाखोरी का जरिया बन रहे थे। इससे बाजार में तरलता का अभाव था। दुनिया भर के देशों में मंदी का साया मंडरा रहा है। बैंक दिवालिया हो रहे हैं। देश पर यह विपदा न आए, इसके लिए सरकार का यह फैसला देशहित में है। नौकरियां बरकरार रहेंगी और देश विकास पथ पर अग्रसर होगा।

परेशान न हों, कालेधन पर है हमला : प्रो. एमके सिंह

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर एमके सिंह के मुताबिक दो हजार रुपये का नोट शुरुआत से ही चलन में नहीं था। मध्यम वर्ग के पास भी वर्तमान में दो हजार के गिने-चुने नोट होंगे। अभी चार माह है बदलने के लिए, इसलिए आम जनता को इस निर्णय से कोई परेशानी नहीं होगी। इससे कई फायदे होंगे। कालाधन बाहर निकलेगा जो देश के विकास में लगाया जाएगा। बैंकों में मंदी के आसार कम होंगे। वर्तमान समय में यह निर्णय भविष्य के सकारात्मक प्रयास है।

यह नोटबंदी नहीं है, लोग न घबराएं: सीए मोहित टंडन

दि चार्टर्ड अकाउंटेंटस ऑफ इंडिया बरेली शाखा के चेयरमैन सीए मोहित टंडन का कहना है कि दो हजार रुपये के नोट चार माह बाद प्रचलन से बाहर होंगे। इसलिए यह नोटबंदी नहीं है। पूर्व में हुई नोटबंदी में अगले दिन से ही पांच सौ और हजार के नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। इसमें ऐसा नहीं है। अगर किसी के पास दो हजार के नोट हैं तो वह बैंक में जमा कर दे या उसे बदल भी सकता है। थोड़ी परेशानी जरूर होगी पर देश का कालाधन बाहर निकालने में लोगों का सहयोग जरूरी है।

धैर्य रखें, धीरे-धीरे बदल जाएंगे नोट : सीए अतुल अग्रवाल

सीए अतुल अग्रवाल का कहना है कि दो हजार रुपये नोट का जो मूल्य आज है, वह 30 सितंबर तक रहेगा। इसका सबसे बड़ा प्रभाव जमाखोरों पर पड़ना तय है। इनके अलावा किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जमा करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं है पर दो हजार के दस नोट ही एक बार में किसी भी बैंक में बदले जा सकेंगे। मगर ध्यान रखें इस दौरान केवाईसी होगी। जो लोग दो हजार नोट बड़ी मात्रा में जमा करेंगे या बदलेंगे, उनपर सरकार नजर रखेगी।

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