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कालागढ़ डैम से छोड़ा गया पांच हजार क्यूसेक पानी
बरेली
Updated Tue, 14 Jul 2015 01:49 AM IST
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बरेली। उत्तराखंड के कालागढ़ डैम से सोमवार दोपहर दो बजे रामगंगा में पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यह पिछले दिनों से दो हजार क्यूसेक अधिक है और मंगलवार सुबह 11 बजे तक यहां पहुंच जाएगा। वहीं, एक दिन पहले छोड़े गए पानी से रामगंगा का जलस्तर शाम को 13 सेंटीमीटर बढ़ गया। यह 160.64 सेंटीमीटर दर्ज किया गया। हालांकि, बारिश थमने से सोमवार को कुछ राहत रही और एक दिन पहले तक रामगंगा से सटे गांवों में भरा पानी स्थिर रहा। अलबत्ता, बाढ़ की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। बारिश फिर होने के आसार भी बने हुए हैं और कालागढ़ से और अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के संकेत से जिला प्रशासन का अलर्ट जारी है।
बाढ़ नियंत्रण प्रभारी रामबाबू वर्मा ने बताया कि शाम को रामगंगा का जलस्तर रविवार की अपेक्षा 13 सेंटीमीटर ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने बताया कि कालागढ़ डैम से दोपहर दो बजे पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ने की जानकारी दी गई। आगे पानी और बढ़ने का अनुमान है। वहीं, रामगंगा से सटे अंगूरी टांडा, चौबारी, महेशपुर ठाकुरान, ऊंचा गांव, बुखारा, झीलगौटिया तथा लालफाटक पर स्थित कांधरपुर आदि गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। आलमपुर जाफराबाद ब्लाक क्षेत्र के कोहनी, चाढ़पुर, सरदारनगर आदि गांवों में भी जलभराव से ग्रामीण बाढ़ की आशंका मान रहे हैं। हालांकि प्रशासन कई दिन पहले ही अलर्ट जारी कर बाढ़ नियंत्रण के लिए बंदोबस्त शुरू करा चुका है। गांवों में अब भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके हैं। बता दें कि जिले के चार हजार गांवों को बाढ़ से खतरा है।
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बाढ़ नियंत्रण प्रभारी रामबाबू वर्मा ने बताया कि शाम को रामगंगा का जलस्तर रविवार की अपेक्षा 13 सेंटीमीटर ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने बताया कि कालागढ़ डैम से दोपहर दो बजे पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ने की जानकारी दी गई। आगे पानी और बढ़ने का अनुमान है। वहीं, रामगंगा से सटे अंगूरी टांडा, चौबारी, महेशपुर ठाकुरान, ऊंचा गांव, बुखारा, झीलगौटिया तथा लालफाटक पर स्थित कांधरपुर आदि गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। आलमपुर जाफराबाद ब्लाक क्षेत्र के कोहनी, चाढ़पुर, सरदारनगर आदि गांवों में भी जलभराव से ग्रामीण बाढ़ की आशंका मान रहे हैं। हालांकि प्रशासन कई दिन पहले ही अलर्ट जारी कर बाढ़ नियंत्रण के लिए बंदोबस्त शुरू करा चुका है। गांवों में अब भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हो सके हैं। बता दें कि जिले के चार हजार गांवों को बाढ़ से खतरा है।
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