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Bareilly News: इंदौर से तुलना में अधिकार हैं अधूरे...काम कैसे हों पूरे

Thu, 22 Aug 2024 06:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 22 Aug 2024 06:31 AM IST
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Rights are incomplete compared to Indore...how can the work be completed?
लगातार दूसरी बार यूपी महापौर परिषद के अध्यक्ष चुने गए उमेश गौतम
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बरेली। उत्तर प्रदेश महापौर परिषद का लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुने जाने पर बुधवार को महापौर उमेश गौतम ने कहा है कि सरकार प्रदेश के नगर निगमों से इंदौर जैसा काम चाहती है, लेकिन अधिकार अधूरे हैं। 74वें संविधान संशोधन के अधिकार यूपी के महापौरों को नहीं मिल सके हैं। ऐसे में इंदौर की तर्ज पर काम करना आसान नहीं है।
परिषद अध्यक्ष उमेश गौतम ने इस संबंध में नगर विकास मंत्री एके शर्मा से मिलकर महापौरों की समस्याएं साझा की हैं। उन्होंने मांग उठाई है कि ट्रैफिक पुलिस, जिला अस्पताल, बिजली, पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग नगर निगम क्षेत्र में महापौर की देखरेख में काम करें। किसी भी विभाग को अगर नगर निगम क्षेत्र में कोई काम कराना हो तो वो महापौर की अनुमति के बिना नहीं कर सके। इसका प्रावधान 74वें संशोधन में भी है। इसी प्रावधान को अब लागू कराना है और इसमें जो अड़चनें हैं, उन्हें सरकार दूर कराए। उनके अनुसार नगर विकास मंत्री ने उनकी मांगों को सुनने के साथ ही एनकैप योजना में डीएम की जगह महापौर को अध्यक्ष बनाए जाने का आदेश जारी करने का भरोसा दिया है।
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अमर उजाला से बातचीत में उमेश गौतम ने कहा कि जब तक महापौरों के अधिकार अधूरे हैं, तब तक प्रदेश में इंदौर की तरह कोई भी महानगर स्वच्छता के साथ नंबर वन नहीं बन सकता। हम लोगों को सूरत, इंदौर और अहमदाबाद देखने के लिए तो भेजते हैं, पर अधिकार नहीं देते। फिर इंदौर, अहमदाबाद और सूरत की तर्ज पर काम कैसे हो। इसलिए वहां की तरह यूपी के महापौरों को भी अधिकार दिए जाएं। महापौर ने बताया कि लखनऊ के होटल ताज पैलेस में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। कुल 17 में 13 महापौर मौजूद रहे। वह महापौर परिषद की कार्यकारिणी बृहस्पतिवार को घोषित करेंगे।
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ये मुद्दे उठा रही परिषद

- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर क्लास टू अधिकारियों तक के ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार महापौरों को दिया जाए।
- नगर निगम के क्षेत्र में बिजली, लोक निर्माण, विकास प्राधिकरण विभाग महापौर की अनुमति के बगैर कोई काम न करें।

- प्रधानों को मानदेय मिलता है तो पार्षदों को क्यों नहीं, पार्षदों का भी मानदेय तय करे सरकार, शासनादेश जारी हो। अमर उजाला ब्यूरो
जिला पंचायत, नगर पंचायत अध्यक्षों को वित्तीय अधिकार मिले हुए हैं। विधायक और सांसद के लिए निधि भी है, लेकिन महापौर के लिए कोई निधि नहीं है। कोई ऐसा महापौर नहीं है, जिसका निर्वाचन क्षेत्र दो विधानसभा क्षेत्र के बराबर न हो। जिम्मेदारी सबसे बड़ी महापौर की है पर अधिकार कम हैं। इन्हीं मुद्दों पर मंथन हुआ है। अभी नगर विकास मंत्री से मिले हैं, आगे मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
- उमेश गौतम, महापौर परिषद के अध्यक्ष
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