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256 दुकानों में किराया सिर्फ 31 से... अब होगी जांच
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- फोटो : अमर उजाला।
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आवंटित जमीन की अनुमानित कीमत 70 करोड़, ज्यादातर पर हो गए कब्जे
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नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर हुआ था हंगामा
बरेली। करीब चालीस साल पहले नगर निगम ने फड़ वालों के लिए जो जमीन आवंटित की थी, उनमें से ज्यादातर पर कब्जे हो गए हैं। इन जमीनों पर पक्की दुकान, होटल और शोरूम बन गए। इतना ही नहीं 256 दुकानों में से कागजों में सिर्फ 31 ही बची हैं और इन्हीं से किराया आ रहा है। नगर निगम के हाथ से जमीन तो गई ही.. राजस्व का झटका लगा वो अलग से। मंगलवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर पार्षदों ने हंगामा किया तो अब अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जो इस मामले की जांच करेगी।
आवंटित की गई जमीन की अनुमानित राशि करीब 70 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह जमीन फड़ लगाने वालों को आवंटित की गई थी। धीरे धीरे यह जमीने नगर निगम के कागजों में कम होती चली गई। आज की तारीख में सिर्फ 31 से नगर निगम को किराया मिल रहा है। मंगलवार को बैठक के दौरान पार्षदों ने इसका खुलासा किया। अब इस समय कई जमीनों पर शोरूम, दुकानें व होटल बन गए हैं। उपसभापति छंगामल मौर्य व पार्षद मुकेश मेहरोत्रा, सलीम पटवारी ने बताया कि एक दुकान का किराया 150 से 200 रुपये महीने का था। संपत्ति बाबू के पदों पर जो लोग आए वह इनमें खेल करते चले गए। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है। वह इस मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी। दोषियों पर कार्रवाई होगी। शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर हुआ था हंगामा बरेली। करीब चालीस साल पहले नगर निगम ने फड़ वालों के लिए जो जमीन आवंटित की थी, उनमें से ज्यादातर पर कब्जे हो गए हैं। इन जमीनों पर पक्की दुकान, होटल और शोरूम बन गए। इतना ही नहीं 256 दुकानों में से कागजों में सिर्फ 31 ही बची हैं और इन्हीं से किराया आ रहा है। नगर निगम के हाथ से जमीन तो गई ही.. राजस्व का झटका लगा वो अलग से। मंगलवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर पार्षदों ने हंगामा किया तो अब अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जो इस मामले की जांच करेगी।
आवंटित की गई जमीन की अनुमानित राशि करीब 70 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह जमीन फड़ लगाने वालों को आवंटित की गई थी। धीरे धीरे यह जमीने नगर निगम के कागजों में कम होती चली गई। आज की तारीख में सिर्फ 31 से नगर निगम को किराया मिल रहा है। मंगलवार को बैठक के दौरान पार्षदों ने इसका खुलासा किया। अब इस समय कई जमीनों पर शोरूम, दुकानें व होटल बन गए हैं। उपसभापति छंगामल मौर्य व पार्षद मुकेश मेहरोत्रा, सलीम पटवारी ने बताया कि एक दुकान का किराया 150 से 200 रुपये महीने का था। संपत्ति बाबू के पदों पर जो लोग आए वह इनमें खेल करते चले गए। नगर आयुक्त अभिषेक आनंद ने बताया कि अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है। वह इस मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी। दोषियों पर कार्रवाई होगी। शासन को भी रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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