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उर्स के विरोध से विदेशों में बरेली की हुई बदनामी
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बरेली। मथुरापुर के इस्लामिक स्टडी सेंटर पर उर्स-ए-ताजुश्शरिया के दौरान यूं तो कई उलमा ने उर्स की अनुमति निरस्त होने पर सवाल उठाए। तमाम टिप्पणियां भी की और कहा कि आखिर बरेली में ऐसा क्या हो गया जो ताजुश्शरिया जैसी शख्सियत के उर्स के लिए रोक की नौबत आ गई।
इसमें खास तौर से रुदौली शरीफ से आए मुफ्ती अब्दुल मुस्तफा रुदौलवी ने कहा कि बरेली शरीफ के हिंदुओं की पूरी दुनिया में इज्जत है। यहां के प्रशासन की तारीफ होती है। आला हजरत के उर्स में हिंदू भाई जायरीन को अपने घरों में ठहराते हैं उनकी मेहमान नवाजी करते हैं। यहां के लोग अमन पसंद है और एकता में यकीन रखते हैं। ये चंद मुट्ठी भर लोगों के कहने पर प्रशासन ने इस्लामियां से उर्स की परमीशन रद्द कर दी। यह अफसोस की बात है। उन्होंने कहा कि ताजुश्शरिया का विसाल हुआ कोई बात हुई बल्कि हिंदू भाईयों ने जायरीन की मदद की। चेहल्लुम का उर्स हुआ कोई बात हुई, तो फिर सालाना उर्स में ऐसा क्या हो गया जो प्रशासन को अपना फैसला बदलना पड़ा।
अपनी तकरीक के क्रम में उन्होंने देश के हालात और मुस्लिम मसायल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों से कहा जाता है पाकिस्तान चले जाओ। अरे यह हमारा भी मुल्क है इस देश की आजादी जंग में हमने भी हिस्सा लिया है। साथ ही आजादी में योगदान देने वाले और जान कुरबान करने वाले तमाम मुजाहिदे आजादी के नाम का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तान को अपना घर मानते हैं तो क्या कोई अपने घर में आग लगा सकता है। हम आला हजरत और ताजुश्शरिया के मानने वाले अमन पसंद हैं। मुल्क से मोहब्बत करते हैं। इसके अलावा झारखंड के तबरेज अंसारी का जिक्र करते हुए मॉबलिंचिंग पर विस्तार से तकरीर की।
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इसमें खास तौर से रुदौली शरीफ से आए मुफ्ती अब्दुल मुस्तफा रुदौलवी ने कहा कि बरेली शरीफ के हिंदुओं की पूरी दुनिया में इज्जत है। यहां के प्रशासन की तारीफ होती है। आला हजरत के उर्स में हिंदू भाई जायरीन को अपने घरों में ठहराते हैं उनकी मेहमान नवाजी करते हैं। यहां के लोग अमन पसंद है और एकता में यकीन रखते हैं। ये चंद मुट्ठी भर लोगों के कहने पर प्रशासन ने इस्लामियां से उर्स की परमीशन रद्द कर दी। यह अफसोस की बात है। उन्होंने कहा कि ताजुश्शरिया का विसाल हुआ कोई बात हुई बल्कि हिंदू भाईयों ने जायरीन की मदद की। चेहल्लुम का उर्स हुआ कोई बात हुई, तो फिर सालाना उर्स में ऐसा क्या हो गया जो प्रशासन को अपना फैसला बदलना पड़ा।
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अपनी तकरीक के क्रम में उन्होंने देश के हालात और मुस्लिम मसायल पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों से कहा जाता है पाकिस्तान चले जाओ। अरे यह हमारा भी मुल्क है इस देश की आजादी जंग में हमने भी हिस्सा लिया है। साथ ही आजादी में योगदान देने वाले और जान कुरबान करने वाले तमाम मुजाहिदे आजादी के नाम का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि हम हिंदुस्तान को अपना घर मानते हैं तो क्या कोई अपने घर में आग लगा सकता है। हम आला हजरत और ताजुश्शरिया के मानने वाले अमन पसंद हैं। मुल्क से मोहब्बत करते हैं। इसके अलावा झारखंड के तबरेज अंसारी का जिक्र करते हुए मॉबलिंचिंग पर विस्तार से तकरीर की।
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