{"_id":"5d1e574d8ebc3e3c8653c84e","slug":"religious-bareilly-news-bly3673093157","type":"story","status":"publish","title_hn":"सत्य और शांति मार्ग अपनाने का सुझाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सत्य और शांति मार्ग अपनाने का सुझाव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ. पं. सुरेश शास्त्री ने सत्य और शांति मार्ग अपनाने का सुझाव दिया। कहा, भगवान कृष्ण, दुर्योधन के पास पांडवों के लिए पांच गांव देने का प्रस्ताव लेकर शांतिवार्ता को जाते हैं लेकिन दुर्योधन ने प्रस्ताव नहीं माना।
बताया कि भगवान भाव के भूखे हैं। हस्तिनापुर आने पर भगवान दुर्योधन का वैभव छोड़कर विदुर के घर रहने जाते हैं। फिर भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रभु भक्तों की पुकार के अधीन होते हैं और जब भी विश्वास के साथ कोई भक्त उन्हें पुकारता है तो वह तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े चले आते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से जिस स्थिति में भी हैं अपने कर्म पर ध्यान देने, परमात्मा को नमन कर किए गए कार्य प्रभु को अर्पित करने का संदेश दिया। आखिर में श्रीमद्भागवत की आरती और प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ। ब्यूरो
विज्ञापन
बताया कि भगवान भाव के भूखे हैं। हस्तिनापुर आने पर भगवान दुर्योधन का वैभव छोड़कर विदुर के घर रहने जाते हैं। फिर भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि प्रभु भक्तों की पुकार के अधीन होते हैं और जब भी विश्वास के साथ कोई भक्त उन्हें पुकारता है तो वह तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े चले आते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से जिस स्थिति में भी हैं अपने कर्म पर ध्यान देने, परमात्मा को नमन कर किए गए कार्य प्रभु को अर्पित करने का संदेश दिया। आखिर में श्रीमद्भागवत की आरती और प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ। ब्यूरो
विज्ञापन