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शिया सुन्नी वहाबी देवबंदी के ये झगड़े, खुदाया खत्म कर दीजिए
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बरेली। अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी की ओर से मोहल्ला गढ़ैया इमामबाड़ा वसी हैदर में नबी-ए-करीम की शान में महफिल सजाई गई। इसमें उलमा की तकरीर के अलावा तमाम शायरों ने कलाम पेश किए।
महफिल शिया जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शम्सुल हसन खां की सदारत में आयोजित की गई। इसे खिताब करते हुए मौलाना शब्बीर वारसी ने कहा कि रसूले पाक ने जो इस्लाम दुनिया में फैलाया वही इस्लाम हुसैन ने बचाया। इस्लाम अमन और चैन का नाम है। खानकाह नियाजिया से आए जाहिद मियां नियाजी का यह शेर- मैं ख्वाबों में मदीना चाहता हूं, उन्हीं ख्वाबों में जीना चाहता हूं, बेहद पसंद किया गया। बाकर जैदी ने पढ़ा- पैयंबर आने वाले हैदर आने वाले हैं। मैं कतरा हूं, मेरे घर समुंदर आने वाले हैं। शिया सुन्नी वहाबी देवबंदी के ये झगड़े, खुदाया खत्म कर दीजिए। इसी तरह कामिस नियाजी, खादिम शब्बीर नसीराबादी, फकरी मेरठी, चंदन फैजाबादी, अनवर सेंथली, शाहीन सेंथली, हाजी कामिल टिसुआई, रिजवान बरेलवी, हुनर फर्रुखाबादी आदि शायरों ने कलाम पेश किए। निजामत किरतास कर्बलाई ने की। इस दौरान अंजुमन के मीडिया प्रभारी शानू काजमी को शिया समाज के कार्यक्रम में लगातार सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
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महफिल शिया जामा मस्जिद के इमामे जुमा मौलाना शम्सुल हसन खां की सदारत में आयोजित की गई। इसे खिताब करते हुए मौलाना शब्बीर वारसी ने कहा कि रसूले पाक ने जो इस्लाम दुनिया में फैलाया वही इस्लाम हुसैन ने बचाया। इस्लाम अमन और चैन का नाम है। खानकाह नियाजिया से आए जाहिद मियां नियाजी का यह शेर- मैं ख्वाबों में मदीना चाहता हूं, उन्हीं ख्वाबों में जीना चाहता हूं, बेहद पसंद किया गया। बाकर जैदी ने पढ़ा- पैयंबर आने वाले हैदर आने वाले हैं। मैं कतरा हूं, मेरे घर समुंदर आने वाले हैं। शिया सुन्नी वहाबी देवबंदी के ये झगड़े, खुदाया खत्म कर दीजिए। इसी तरह कामिस नियाजी, खादिम शब्बीर नसीराबादी, फकरी मेरठी, चंदन फैजाबादी, अनवर सेंथली, शाहीन सेंथली, हाजी कामिल टिसुआई, रिजवान बरेलवी, हुनर फर्रुखाबादी आदि शायरों ने कलाम पेश किए। निजामत किरतास कर्बलाई ने की। इस दौरान अंजुमन के मीडिया प्रभारी शानू काजमी को शिया समाज के कार्यक्रम में लगातार सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
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