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पाकिस्तानी लेखक की किताब ‘रशीद इबने रशीद’ पर भड़के उलमा, पाबंदी लगाने की मांग की
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बरेली। तसलीमा नसरीन और सलमान रुश्दी के बाद अब पाकिस्तान के लेखक अबु यजीद बट्ट की किताब ‘रशीद इबने रशीद’ पर हिंदुस्तान के मुसलमान भड़क गए हैं। इसमें हजरत इमाम हुसैन के कातिल को नेक बंदा बताया गया है। उर्स-ए-नूरी में शिरकत करने आए उलमा और दानिश्वरों के बीच भारत सरकार से इस किताब पर पाबंदी लगाने की मांग करते हुए दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास पर प्रदर्शन की चेतावनी दी गई। इस किताब के बहाने उलमा ने भारत सरकार पर भी निशाना साधी और मुल्क में बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।
दरगाह आला हजरत के नूरी मेहमानखाने में बैठक की अध्यक्षता करते हुए रजा एकेडमी के चेयरमैन मौलाना अल्हाज सईद नूरी ने कहा कि पाकिस्तानी हुकूमत मजहबी लिटरेचर के जरिए मुसलमानों में इख्तेलाफ फैला रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में भी बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ एकराय होना जरूरी है। वो वक्त याद करना चाहिए जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नसबंदी कार्यक्रम के खिलाफ मुफ्ती आजम हिंद मैदान में उतरे और फतवा जारी करके देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया था। आज फिर उन जैसे मर्दे मुजाहिद की जरूरत है।
दारुल उलूम हाजी अली मुंबई के प्रबंधक कारी अब्दुर्रहमान जियायी ने शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी पर मुसलमानों को तकलीफ पहुंचाने का आरोप लगाया और हजरत आयशा पर बनाई गई फिल्म पर हुकूमत से उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान हाजी इकरार नूरी, मौलाना जुबैर अहमद, सूफी अब्दुस्समद, हाजी रफीक अहमद, हाफिज मुजाहिद, मौलाना ताहिर फरीदी, मुफ्ती हाशिम रजा, गौहर मियां आदि उलमा मौजूद रहे।
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यजीद को लिखा नेक, मुत्तकी और परहेजगार
तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बैठक में बताया कि ‘रशीद इबने रशीद’ किताब में हजरत इमाम हुसैन के कातिल यजीद का महिमामंडन किया गया है। यजीद के लिए ‘अमीरुल मोमिनीन’ और ‘रदीअल्लाहूताला अन्हू’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। ये शब्द नेक, मुत्तकी, परहेजगार लोगों के लिए कहे जाते हैं न कि यजीद जैसे नवासे रसूल का दुश्मन और एहले बैत के कातिल के लिए। किताब से इमाम हुसैन के चाहने वालों के दिलों को ठेस पहुंची है और उनमें बेहद गुस्सा है।
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दरगाह आला हजरत के नूरी मेहमानखाने में बैठक की अध्यक्षता करते हुए रजा एकेडमी के चेयरमैन मौलाना अल्हाज सईद नूरी ने कहा कि पाकिस्तानी हुकूमत मजहबी लिटरेचर के जरिए मुसलमानों में इख्तेलाफ फैला रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में भी बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ एकराय होना जरूरी है। वो वक्त याद करना चाहिए जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नसबंदी कार्यक्रम के खिलाफ मुफ्ती आजम हिंद मैदान में उतरे और फतवा जारी करके देशव्यापी आंदोलन खड़ा किया था। आज फिर उन जैसे मर्दे मुजाहिद की जरूरत है।
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दारुल उलूम हाजी अली मुंबई के प्रबंधक कारी अब्दुर्रहमान जियायी ने शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी पर मुसलमानों को तकलीफ पहुंचाने का आरोप लगाया और हजरत आयशा पर बनाई गई फिल्म पर हुकूमत से उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस दौरान हाजी इकरार नूरी, मौलाना जुबैर अहमद, सूफी अब्दुस्समद, हाजी रफीक अहमद, हाफिज मुजाहिद, मौलाना ताहिर फरीदी, मुफ्ती हाशिम रजा, गौहर मियां आदि उलमा मौजूद रहे।
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यजीद को लिखा नेक, मुत्तकी और परहेजगार
तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बैठक में बताया कि ‘रशीद इबने रशीद’ किताब में हजरत इमाम हुसैन के कातिल यजीद का महिमामंडन किया गया है। यजीद के लिए ‘अमीरुल मोमिनीन’ और ‘रदीअल्लाहूताला अन्हू’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं। ये शब्द नेक, मुत्तकी, परहेजगार लोगों के लिए कहे जाते हैं न कि यजीद जैसे नवासे रसूल का दुश्मन और एहले बैत के कातिल के लिए। किताब से इमाम हुसैन के चाहने वालों के दिलों को ठेस पहुंची है और उनमें बेहद गुस्सा है।