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शरीयत के दायरे में मनाएं मोहर्रम
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बरेली। ख्वाजा इमाम इस्लामिक ट्रस्ट की ओर से खुशबू इंक्लेब में गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुफ्ती नूर मुहम्मद हसनी की सरपरस्ती में हुए इस कार्यक्रम में मोहर्रम को शरीयत के दायरे में मनाने की अपील की गई।
इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कहा कि मोहर्रम अजमत व फजीलत का बरकतों वाला महीना है। इस माह में नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में कुर्बानी दे कर शहादत का दर्जा पाया और इस्लाम के परचम को बुलंद किया। इस महीने की 10 तारीख को इस्लाम को बचाते हुए कर्बला के मैदान में बालित यजीद से लड़े और अपनी जान कुर्बान कर दी। इस तरह इमाम हुसैन ने दुनिया को यह पैगाम दिया कि कभी भी बातिल का आगे सर नहीं झुकाना चाहिए। इस दौरान मौलाना सबीहुल हसन सकाफी, मौलाना अब्दुल कादिर खां बरकाती, मोहतशिम मलिक, अशरफ मलिक, मौलाना जीशान, मजहर जावेद आदि मौजूद रहे।
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इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी कादरी ने कहा कि मोहर्रम अजमत व फजीलत का बरकतों वाला महीना है। इस माह में नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में कुर्बानी दे कर शहादत का दर्जा पाया और इस्लाम के परचम को बुलंद किया। इस महीने की 10 तारीख को इस्लाम को बचाते हुए कर्बला के मैदान में बालित यजीद से लड़े और अपनी जान कुर्बान कर दी। इस तरह इमाम हुसैन ने दुनिया को यह पैगाम दिया कि कभी भी बातिल का आगे सर नहीं झुकाना चाहिए। इस दौरान मौलाना सबीहुल हसन सकाफी, मौलाना अब्दुल कादिर खां बरकाती, मोहतशिम मलिक, अशरफ मलिक, मौलाना जीशान, मजहर जावेद आदि मौजूद रहे।
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