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..लबे साहिल से प्यासा लौट आना किसको आता है
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बरेली। हजरत इमाम हुसैन की शान में मलूकपुर के इमामबाड़ा फतेहनिशान में तरही मनकबती मुशायरे आयोजित किया गया। यह महफिल खानकाह नियाजिया के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी की सरपरस्ती में संपन्न हुई।
इस मौके पर सदारत करते हुए कासिम मियां नियाजी ने अपने जजबात का इजहार कुछ इस अंदाज में किया कि- वफादारी की यूं आजमत बढ़ाना किसको आता है। लबे साहिल से प्यासा लौट आना किसको आता है। इस कलाम पर खूब वाहवाही मिली। मुशायरे के संयोजक जाहिद मियां नियाजी पढ़ा- जनाबे उम्मे सलमा ही बता सकती है उम्मत को, गमे शब्बीर में आंसू बहाना किसको आता है। निजामत करते हुए फहमी बरेलवी ने अपने कलाम में कहा - बहत्तर हक परस्तों को हराना किसको आता है। अली के सूरमाओं को डराना किसको आता है।
इसी तरह राजी नियाजी, ताहिर फराज रामपुरी, जामी मियां नियाजी, खालिद नदीम बदायूंनी, शाद फर्रुखाबादी, हुनर फर्रुखाबादी, अजीज आंवलवी, नशतर बरेलवी, हलीम सेंथली, करार अकबराबादी आदि ने कलाम पेश किए। आखिर में इमामबाड़े के मुतवल्ली मुहम्मद जाफर ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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इस मौके पर सदारत करते हुए कासिम मियां नियाजी ने अपने जजबात का इजहार कुछ इस अंदाज में किया कि- वफादारी की यूं आजमत बढ़ाना किसको आता है। लबे साहिल से प्यासा लौट आना किसको आता है। इस कलाम पर खूब वाहवाही मिली। मुशायरे के संयोजक जाहिद मियां नियाजी पढ़ा- जनाबे उम्मे सलमा ही बता सकती है उम्मत को, गमे शब्बीर में आंसू बहाना किसको आता है। निजामत करते हुए फहमी बरेलवी ने अपने कलाम में कहा - बहत्तर हक परस्तों को हराना किसको आता है। अली के सूरमाओं को डराना किसको आता है।
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इसी तरह राजी नियाजी, ताहिर फराज रामपुरी, जामी मियां नियाजी, खालिद नदीम बदायूंनी, शाद फर्रुखाबादी, हुनर फर्रुखाबादी, अजीज आंवलवी, नशतर बरेलवी, हलीम सेंथली, करार अकबराबादी आदि ने कलाम पेश किए। आखिर में इमामबाड़े के मुतवल्ली मुहम्मद जाफर ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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