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खाद्यान्न घोटाला: बरेली के शहरी इलाकों में सबसे ज्यादा हुआ राशन का बंदरबांट, जांच के बाद परतें खुलना शुरू

Thu, 29 May 2025 11:08 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 29 May 2025 11:08 AM IST
सार

बरेली में सदर तहसील के सीबीगंज, कोतवाली, बारादरी, प्रेमनगर में सबसे ज्यादा राशन घोटाले सामने आए। यहां एक कार्ड पर 65 से 90 अपात्रों को राशन बांटा गया था।

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ration scams in Bareilly urban areas
खाद्यान्न। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बरेली जिले में वर्ष 2015-2018 के बीच हुआ खाद्यान्न घोटाला की सीआईडी जांच के बाद परतें खुलना शुरू हो गई हैं। बरेली में सदर तहसील के सीबीगंज, कोतवाली, बारादरी, प्रेमनगर में सबसे ज्यादा घोटाले सामने आए। यहां एक कार्ड पर 65 से 90 अपात्रों को राशन बांटने का खेल हुआ। आधार कार्ड की फीडिंग के जरिए अधिकारियों की मिलीभगत से कंप्यूटर ऑपरेटर ने जमकर फर्जीवाड़ा किया और गरीबों के राशन का बंदरबांट किया गया।

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सात साल पहले बरेली समेत कई जिलों में खाद्यान्न घोटाला हुआ। गरीबों का राशन हड़पने के लिए पूर्ति विभाग के तत्कालीन अधिकारियों व कंप्यूटर ऑपरेटर, कोटेदारों ने प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन में आधार कार्ड फीड कराने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। एक आधार नंबर पर 65 से लेकर 90 लोगों को राशन वितरण दिखाया गया। बताते हैं कि 2015 के बाद पीओएस मशीन चलन में आई। मशीन में आधार कार्ड फीड कराने का काम जिले के कोटेदारों पर था।
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इसी दौरान गरीबों के राशन का बंदरबांट करने के लिए योजना बनाकर एक आधार पर कई लोगों को राशन कागजों में बांटा गया। अतिरिक्त राशन को ब्लैक में बेचकर अवैध रूप से कमाई की गई। मामला पकड़ में आने के बाद पहले जिला स्तर पर इसकी जांच की गई, लेकिन बाद में जिसके बाद करीब नौ कोटेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। कई साल मामले की जांच चली, लेकिन मुकदमों के प्रगति न होने देख 2024 में जांच सीआईडी को दे दी गई। जिसके बाद सीआईडी ने मामले में रिपोर्ट जारी की गई हैं। 

अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ था खाद्यान्न घोटाला
जिले में हुआ राशन घोटाला जिले के आला अधिकारियों की नाक के नीचे हुआ। सबसे ज्यादा मामले में सदर तहसील के सामने आए। पूर्ति विभाग के मुताबिक 18 मई 2013 से लेकर 17 मई 2017 पूर्ति अधिकारी के पद पर केएल तिवारी व 19 मई 2017 से लेकर 12 जुलाई 2021 तक सीमा त्रिपाठी तैनात रही थीं। इन्हीं दोनों के कार्यकाल में यह फर्जीवाड़ा हुआ। 

एजेंसी जांच के दौरान तत्कालीन अधिकारियों की जांच भी की जा रही है। माना जा रहा है कि विभाग के अधिकारियों व कंप्यूटर ऑपरेटरों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा घोटाला होना संभव नहीं है। जिले में पूर्ति विभाग के तैनात अधिकारी व कर्मचारी राशन घाेटाले को लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि जो हुआ वह उस समय यहां तैनात नहीं थे।

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