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राशन माफियाओं जेब में पहुंच गया करोड़ों का राशन
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AITMC
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अप्रैल और मई में मुफ्त में बंटने वाला चावल बाजार में पहुंच गया
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बरेली। राशन माफिया के लिए लॉकडाउन बेहरीन सीजन साबित हुआ है। पिछले दो माह में करीब 150 करोड़ रुपये कीमत का राशन कोटेदारों के जरिए खुले बाजार में पहुंच गया। राशन पकड़े जाने पर खाद्य विभाग अफसर बिना जांच पड़ताल के ही उसे गैर सरकारी बताने में कोई देर नहीं करते है, जबकि मंडी परिषद की कार्रवाई से साफ होता है कि पकड़ा गया राशन हेराफेरी का ही था।
खाद्य विभाग समेत पूरा सिस्टम राशन माफियाओं को बचाने में लगा है। क्योंकि अभी तक राशन पकड़ने के मामले में खाद्य विभाग ने अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की है। पिछले दिन अमर उजाला ने उजागर किया था कि गरीबों का मिलने वाले राशन पर माफियाओं की नजर है। अप्रैल माह से प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो फ्री चावल बंटने के लिए आते ही राशन माफिया की लाटरी ही खुल गई। राशन कार्डों पर भले ही चावल की इंट्री हो गई लेकिन सारा चावल किसी न किसी तरह खुले बाजार में पहुंच ही गया।
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खाद्य विभाग समेत पूरा सिस्टम राशन माफियाओं को बचाने में लगा है। क्योंकि अभी तक राशन पकड़ने के मामले में खाद्य विभाग ने अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की है। पिछले दिन अमर उजाला ने उजागर किया था कि गरीबों का मिलने वाले राशन पर माफियाओं की नजर है। अप्रैल माह से प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो फ्री चावल बंटने के लिए आते ही राशन माफिया की लाटरी ही खुल गई। राशन कार्डों पर भले ही चावल की इंट्री हो गई लेकिन सारा चावल किसी न किसी तरह खुले बाजार में पहुंच ही गया।
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जांच के नाम क्लीनचिट
आंवला, हजियापुर और बुखारा में पकड़ा गया सरकारी चावल की जांच के लिए लगाए पूर्ति निरीक्षकों ने लिखित तौर पर दे दिया कि राशन सरकारी नहीं है। अखबारों में सुखियां बनने पर आंवला और हजियापुर में बरामद चावल के मामले में एफआईआर कराई गई।
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