राशन माफियाओं जेब में पहुंच गया करोड़ों का राशन

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Fri, 05 Jun 2020 01:53 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AITMC

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अप्रैल और मई में मुफ्त में बंटने वाला चावल बाजार में पहुंच गया

बरेली। राशन माफिया के लिए लॉकडाउन बेहरीन सीजन साबित हुआ है। पिछले दो माह में करीब 150 करोड़ रुपये कीमत का राशन कोटेदारों के जरिए खुले बाजार में पहुंच गया। राशन पकड़े जाने पर खाद्य विभाग अफसर बिना जांच पड़ताल के ही उसे गैर सरकारी बताने में कोई देर नहीं करते है, जबकि मंडी परिषद की कार्रवाई से साफ होता है कि पकड़ा गया राशन हेराफेरी का ही था।
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खाद्य विभाग समेत पूरा सिस्टम राशन माफियाओं को बचाने में लगा है। क्योंकि अभी तक राशन पकड़ने के मामले में खाद्य विभाग ने अपनी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की है। पिछले दिन अमर उजाला ने उजागर किया था कि गरीबों का मिलने वाले राशन पर माफियाओं की नजर है। अप्रैल माह से प्रत्येक यूनिट पर पांच किलो फ्री चावल बंटने के लिए आते ही राशन माफिया की लाटरी ही खुल गई। राशन कार्डों पर भले ही चावल की इंट्री हो गई लेकिन सारा चावल किसी न किसी तरह खुले बाजार में पहुंच ही गया।

जांच के नाम क्लीनचिट

आंवला, हजियापुर और बुखारा में पकड़ा गया सरकारी चावल की जांच के लिए लगाए पूर्ति निरीक्षकों ने लिखित तौर पर दे दिया कि राशन सरकारी नहीं है। अखबारों में सुखियां बनने पर आंवला और हजियापुर में बरामद चावल के मामले में एफआईआर कराई गई।

दो माह में बंट चुका है 3.78 कुंतल चावल

पिछले दो माह में गरीबों को 3.78 कुंतल चावल फ्री दिया गया है। बताया जाता है कि राशनकार्ड धारक गेंहू लेने में तो रुचि दिखाते हैं लेकिन मोटा चावल लेना पसंद नहीं करते हैं। इसका फायदा कोटेदार और राशन कारोबारी उठाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोटेदार के सहयोग से चावल खुले बाजार में पहुंचता है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पिछले दो माह में लॉकडाउन अवधि में कोटेदार और सिस्टम की मिलीभगत से करीब 150 करोड़ रुपये कीमत का गेंहू और चावल कालाबाजारी में पहुंच चुका है।

आटा बनाने में होता है इस्तेमाल

राशन दुकानों से मिलने वाला चावल खुले बाजार से होता हुआ फ्लोर मिलों तक पहुंचता है। इसके साथ ही कचरी और पापड़ आदि उघोग-धंधों में इस्तेमाल किया जाता है। सरकारी चावल 15-18 रुपये किलो में राशन माफिया खरीद लेते हैं।

विशेष सचिव ओपी वर्मा जांच करेंगे

शासन ने सरकारी राशन घोटाला और कालाबाजारी आदि पर प्रभावी कार्रवाई कर अंकुश लगाने के लिए नोडल अफसर नामित किए हैं। बरेली में विशेष सचिव ओपी वर्मा नामित किए गए हैं।

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