UP News: 'अगर ऐसा न हुआ तो अगस्त नहीं बाटेंगे राशन', कोटेदारों के संगठन ने दी चेतावनी
उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद ने कोटे से लिए गए नमूने जांच में फेल होने पर दायर वाद का विरोध किया। सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मुकदमे वापस लेने की मांग की।
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एफसीआई गोदाम से मिलने वाला राशन ही वितरित किया जाता है। जांच के लिए खाद्यान्न का नमूना सील पैक बोरों से लेते हैं, पर जांच में घटिया अनाज की पुष्टि होने पर कोटेदारों पर मुकदमे हो रहे हैं। यह गलत है। अगर दायर मुकदमे वापस न लिए गए तो अगस्त में राशन वितरण नहीं किया जाएगा।
बरेली में चेतावनी भरा यह ज्ञापन उप्र सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के पदाधिकारियों व सदस्यों ने सोमवार को खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री, राज्य मंत्री समेत सहायक आयुक्त द्वितीय और जिला पूर्ति अधिकारी को सौंपा। सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर मुकदमे वापस लेने की मांग की। साथ ही, मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राजीव शुक्ला को सौंपा।
पदाधिकारियों ने बताया कि बीते वर्ष 16 दुकानों से खाद्यान्न के नमूने लिए गए थे। इनमें से 12 फेल रहे। जिन कोटेदारों के यहां से नमूने लिए गए थे, उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। नमूनों की जांच रिपोर्ट तीन-चार माह बाद आती है। ऐसे में सैंपल लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे, यह भी संदिग्ध है।
अगर सैंपल संदिग्ध हैं तो वितरण बंद कराएं
कोटेदारों का तर्क था कि नियमानुसार वितरित किया जा रहा राशन अगर घटिया प्रतीत हो रहा है और जांच के लिए नमूना भरा जा रहा है तो रिपोर्ट आने तक वितरण बंद कराना चाहिए। गोदाम से उठान के दौरान ही खाद्यान्न की जांच होनी चाहिए। कोटेदारों पर मुकदमा दर्ज कराना गलत है।
नहीं मिल रहा कमीशन, सर्वर की अड़चन
कोटेदारों ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में कहा है कि तीन माह पूर्व जबरन अधिकारियों ने नई मशीन दी। इसमें सर्वर की अड़चन आती है। तौल के लिए कर्मचारी बुलाए जाते हैं। अगर मशीन न चले तो भी दैनिक वेतन देना पड़ता है। वहीं, मई और जून का कमीशन भी नहीं मिला। समस्या के समाधान की मांग की है।
यहां संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अंशुल अग्रवाल, प्रीतमलाल, राजवीर सिंह, जयकुमार, ज्योति, गौरव, अशफाक सहित अन्य कोटेदार और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष विकास अग्रवाल, महानगर अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, अनुज गुप्ता मौजूद रहे।