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पंचनामा लेने आई थी, पति ही जिंदा निकला
बरेली
Updated Tue, 23 Feb 2016 02:13 AM IST
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बरेली। दूसरी महिला के साथ चोरीछिपे रह रहे पति ने पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए खुद ही अपनी मौत की स्क्रिप्ट लिख दी। जब अल्मोड़ा की महिला पति की मौत की सूचना पर उसका पंचनामा लेने आई तो पता चला कि वह तो जिंदा है। छानबीन के दौरान मालूम यह हुआ कि उसने पहली पत्नी से पीछा छुड़ाने के लिए अपनी मौत का पैगाम घर भेज दिया था।
कैसे दिया धोखा
पीएसी में कैंटीन चलाने वाले अल्मोड़ा निवासी हरीश कुमार ने पांच दिसंबर को अपनी पत्नी के नाम एक रजिस्ट्री पत्र फर्जी नाम से भेज दी। उसमें यह बताया गया था कि हरीश कुमार की मौत हो चुकी है। 22 दिसंबर को उसका चौपुला के पास एक्सीडेंट हो गया था। वहां पत्नी को किसी तरह से पत्र नहीं मिल पाया। इसके चलते पत्र अल्मोड़ा से वापस बरेली आ गया। इसी बीच रविंद्र कुमार के नाम से हरीश ने ही अल्मोड़ा में अपने पड़ोस की महिला को फोन पर अपनी मौत की सूचना दे दी।
कैसे खुली पोल
हरीश कुमार की पत्नी ने अपने इलाके के थाना दनिया गांव पहुंचकर मदद मांगी। वहां के एसओ ने शहर कोतवाली के एसएसआई गिरीश राज प्रसाद से बात करके कहा कि पत्नी को हरीश कुमार के पंचनामा की रिपोर्ट दे देना। एसएसआई ने पंचनामा देने के लिए रजिस्टर खंगाला तो 22 दिसंबर में हरीश नाम से किसी की मौत एक्सीडेंट से होने की बात ही सामने नहीं आई। एसएसआई ने शक होने पर पीएसी में पता लगाया तो यह जानकारी मिली कि हरीश एक महिला के साथ यहां कैंटीन चलाता था। यहां से भी उसे कुछ दिन पहले निकाल दिया गया है। उसकी मौत की बात गलत है। कैंटीन चलाने से पहले हरीश करीब आठ साल से शाहजहांपुर रोड स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में नौकरी करता था। पत्नी ने वहां जाकर उस नंबर को दिखाया जिससे हरीश का दोस्त बनकर काल आई थी। फोन करने वाले ने स्पीकर ऑन करके हरीश से बात की तो पत्नी हरीश की आवाज पहचान गई। इस धोखे से आहत महिला बेहोश हो गई। उसे किसी तरह होश में लाया गया। प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा ने बताया कि हरीश की तलाश कराई जा रही है।
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कैसे दिया धोखा
पीएसी में कैंटीन चलाने वाले अल्मोड़ा निवासी हरीश कुमार ने पांच दिसंबर को अपनी पत्नी के नाम एक रजिस्ट्री पत्र फर्जी नाम से भेज दी। उसमें यह बताया गया था कि हरीश कुमार की मौत हो चुकी है। 22 दिसंबर को उसका चौपुला के पास एक्सीडेंट हो गया था। वहां पत्नी को किसी तरह से पत्र नहीं मिल पाया। इसके चलते पत्र अल्मोड़ा से वापस बरेली आ गया। इसी बीच रविंद्र कुमार के नाम से हरीश ने ही अल्मोड़ा में अपने पड़ोस की महिला को फोन पर अपनी मौत की सूचना दे दी।
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कैसे खुली पोल
हरीश कुमार की पत्नी ने अपने इलाके के थाना दनिया गांव पहुंचकर मदद मांगी। वहां के एसओ ने शहर कोतवाली के एसएसआई गिरीश राज प्रसाद से बात करके कहा कि पत्नी को हरीश कुमार के पंचनामा की रिपोर्ट दे देना। एसएसआई ने पंचनामा देने के लिए रजिस्टर खंगाला तो 22 दिसंबर में हरीश नाम से किसी की मौत एक्सीडेंट से होने की बात ही सामने नहीं आई। एसएसआई ने शक होने पर पीएसी में पता लगाया तो यह जानकारी मिली कि हरीश एक महिला के साथ यहां कैंटीन चलाता था। यहां से भी उसे कुछ दिन पहले निकाल दिया गया है। उसकी मौत की बात गलत है। कैंटीन चलाने से पहले हरीश करीब आठ साल से शाहजहांपुर रोड स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में नौकरी करता था। पत्नी ने वहां जाकर उस नंबर को दिखाया जिससे हरीश का दोस्त बनकर काल आई थी। फोन करने वाले ने स्पीकर ऑन करके हरीश से बात की तो पत्नी हरीश की आवाज पहचान गई। इस धोखे से आहत महिला बेहोश हो गई। उसे किसी तरह होश में लाया गया। प्रभारी निरीक्षक सुधीर पाल धामा ने बताया कि हरीश की तलाश कराई जा रही है।
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