{"_id":"5de810568ebc3e54a439041d","slug":"political-bareilly-news-bly386700240","type":"story","status":"publish","title_hn":"लालफाटक ओवरब्रिज- सेतु निगम सारी अड़चनें खुद निपटाए अपनी जिम्मेदारी को फुटबॉल न बनाए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लालफाटक ओवरब्रिज- सेतु निगम सारी अड़चनें खुद निपटाए अपनी जिम्मेदारी को फुटबॉल न बनाए
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रेलवे इंजीनियर ने कहा- सेतु निगम के सर्विस लेन न बनाने से तीन महीने से नहीं शुरू कर पा रहे हैं काम, बर्बाद हो रहा है लेबर और मशीनों पर पैसा
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कैंट की जमीन के अधिग्रहण के लिए सीपीएम को खुद पैरवी करने को कहा
बरेली। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा पिछले दौरे पर आपसी तालमेल बैठाकर शहर की प्रमुख परियोजनाओं को जल्द पूरा कराने का निर्देश दे गए थे लेकिन डेढ़ महीने बाद दोबारा आए तो ज्यादातर काम वहीं अटके मिले जैसे पिछली बार थे। लालफाटक ओवरब्रिज के दौरे पर पता चला कि दोनों रेलवे क्रॉसिंग पर सेतु निगम के सर्विस रोड न बनाने से रेलवे तीन महीने बाद भी अपना काम शुरू नहीं कर पा रहा है। सेतु निगम अफसरों ने जब फिर दूसरे विभागों के सहयोग न करने का रोना रोया तो मंत्री ने उन्हें सख्त फटकार लगाई। कहा, नोडल एजेंसी होने के नाते उन्हीं की सबसे अहम जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को फुटबाल न बनाया जाए। प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिया कि ओवरब्रिज का काम हर हालत में मार्च तक पूरा हो जाना चाहिए।
डीएम नितीश कुमार के साथ ओवरब्रिज देखने पहुंचे प्रभारी मंत्री को रेलवे के एक्सईएन ने बताया कि उन्होंने क्रॉसिंग के ऊपर निर्माण करने के लिए एक सितंबर से ट्रैफिक बंद करने की परमीशन मांगी थी जो अब तक नहीं दी गई है। न ही क्रॉसिंग के समांतर सर्विस लेन बनाई गई। तीन महीने से उनकी निर्माण सामग्री पड़ी हुई है, लेबर और मशीनों पर भी पैसा बर्बाद हो रहा है लेकिन वह काम नहीं शुरू कर पा रहे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक देवेंद्र सिंह से नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना प्लानिंग ओवरब्रिज का काम शुरू कैसे हो गया। देवेंद्र सिंह ने कहा कि ओवरब्रिज के लिए कैंट एरिया में भी 6500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है जिसके अधिग्रहण के लिए काफी पहले प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। रक्षा मंत्रालय से अनुमति न मिल पाने से काम लटका हुआ है। प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम के अफसरों से दो टूक में कहा कि अपनी जिम्मेदारी खुद पूरी करें। बहानेबाजी नहीं चलेगी। ओवरब्रिज मार्च तक हर हाल में पूरा हो जाए।
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सेतु निगम अफसरों की क्लास, बिना प्लानिंग क्यों शुरू कर देते हैं काम
लालफाटक का दौरा करते वक्त प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम अफसरों की इस बात पर भी डांट लगाई कि जब एनओसी और अधिग्रहण जैसे तमाम मसले अटके हुए थे तो उन्होंने बगैर प्लानिंग के काम क्यों शुरू कर दिया। इस पर डीएम नितीश कुमार ने बताया कि लालफाटक की तरह चौपुला पुल का काम भी बगैर प्लानिंग शुरू कर दिया गया है। वहां न वन विभाग की एनओसी है न पुलिस लाइन की बाउंड्री के अंदर पिलर बनाने को पुलिस से अनुमति ली गई है। आधे-अधूरे काम से पब्लिक को परेशानी हो रही है। लालफाटक पर प्रभारी मंत्री के ट्रैफिक डायवर्जन बगैर काम शुरू कराने पर सवाल किया तो सेतु निगम अधिकारियों ने पहले यहां तैनात रहे अफसरों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। बताया, लालफाटक पर काम शुरू करते वक्त यह सोचा गया था कि बदायूं रूट का ट्रैफिक चौपुला से निकल जाएगा लेेकिन बाद मेें चौपुला पर भी काम शुरू हो गया।
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नहीं किया आईवीआरआई ओवरब्रिज का निरीक्षण
तय प्रोग्राम के तहत प्रभारी मंत्री को आईवीआरआई के निर्माणाधीन ओवरब्रिज के निर्माण को भी देखने जाना था। इसके लिए सुबह से ही सेतु निगम और रेलवे का स्टाफ मौजूद था। लंबे समय से टूटी पड़ी नैनीताल रोड की सर्विस लेन भी सुधारी जा रही थी, लेकिन प्रभारी मंत्री जी ओवरब्रिज का जायजा लेने ही नहीं पहुंचे।
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कैंट की जमीन के अधिग्रहण के लिए सीपीएम को खुद पैरवी करने को कहा बरेली। प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा पिछले दौरे पर आपसी तालमेल बैठाकर शहर की प्रमुख परियोजनाओं को जल्द पूरा कराने का निर्देश दे गए थे लेकिन डेढ़ महीने बाद दोबारा आए तो ज्यादातर काम वहीं अटके मिले जैसे पिछली बार थे। लालफाटक ओवरब्रिज के दौरे पर पता चला कि दोनों रेलवे क्रॉसिंग पर सेतु निगम के सर्विस रोड न बनाने से रेलवे तीन महीने बाद भी अपना काम शुरू नहीं कर पा रहा है। सेतु निगम अफसरों ने जब फिर दूसरे विभागों के सहयोग न करने का रोना रोया तो मंत्री ने उन्हें सख्त फटकार लगाई। कहा, नोडल एजेंसी होने के नाते उन्हीं की सबसे अहम जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को फुटबाल न बनाया जाए। प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिया कि ओवरब्रिज का काम हर हालत में मार्च तक पूरा हो जाना चाहिए।
डीएम नितीश कुमार के साथ ओवरब्रिज देखने पहुंचे प्रभारी मंत्री को रेलवे के एक्सईएन ने बताया कि उन्होंने क्रॉसिंग के ऊपर निर्माण करने के लिए एक सितंबर से ट्रैफिक बंद करने की परमीशन मांगी थी जो अब तक नहीं दी गई है। न ही क्रॉसिंग के समांतर सर्विस लेन बनाई गई। तीन महीने से उनकी निर्माण सामग्री पड़ी हुई है, लेबर और मशीनों पर भी पैसा बर्बाद हो रहा है लेकिन वह काम नहीं शुरू कर पा रहे हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम के मुख्य परियोजना प्रबंधक देवेंद्र सिंह से नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना प्लानिंग ओवरब्रिज का काम शुरू कैसे हो गया। देवेंद्र सिंह ने कहा कि ओवरब्रिज के लिए कैंट एरिया में भी 6500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है जिसके अधिग्रहण के लिए काफी पहले प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। रक्षा मंत्रालय से अनुमति न मिल पाने से काम लटका हुआ है। प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम के अफसरों से दो टूक में कहा कि अपनी जिम्मेदारी खुद पूरी करें। बहानेबाजी नहीं चलेगी। ओवरब्रिज मार्च तक हर हाल में पूरा हो जाए।
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सेतु निगम अफसरों की क्लास, बिना प्लानिंग क्यों शुरू कर देते हैं काम
लालफाटक का दौरा करते वक्त प्रभारी मंत्री ने सेतु निगम अफसरों की इस बात पर भी डांट लगाई कि जब एनओसी और अधिग्रहण जैसे तमाम मसले अटके हुए थे तो उन्होंने बगैर प्लानिंग के काम क्यों शुरू कर दिया। इस पर डीएम नितीश कुमार ने बताया कि लालफाटक की तरह चौपुला पुल का काम भी बगैर प्लानिंग शुरू कर दिया गया है। वहां न वन विभाग की एनओसी है न पुलिस लाइन की बाउंड्री के अंदर पिलर बनाने को पुलिस से अनुमति ली गई है। आधे-अधूरे काम से पब्लिक को परेशानी हो रही है। लालफाटक पर प्रभारी मंत्री के ट्रैफिक डायवर्जन बगैर काम शुरू कराने पर सवाल किया तो सेतु निगम अधिकारियों ने पहले यहां तैनात रहे अफसरों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। बताया, लालफाटक पर काम शुरू करते वक्त यह सोचा गया था कि बदायूं रूट का ट्रैफिक चौपुला से निकल जाएगा लेेकिन बाद मेें चौपुला पर भी काम शुरू हो गया।
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नहीं किया आईवीआरआई ओवरब्रिज का निरीक्षण
तय प्रोग्राम के तहत प्रभारी मंत्री को आईवीआरआई के निर्माणाधीन ओवरब्रिज के निर्माण को भी देखने जाना था। इसके लिए सुबह से ही सेतु निगम और रेलवे का स्टाफ मौजूद था। लंबे समय से टूटी पड़ी नैनीताल रोड की सर्विस लेन भी सुधारी जा रही थी, लेकिन प्रभारी मंत्री जी ओवरब्रिज का जायजा लेने ही नहीं पहुंचे।