Bareilly News: पूर्व विधायक के पौत्रों से दोस्ती निभाई, जानलेवा हमले की धारा हटाई; देवरनियां पुलिस ने किया खेल
बरेली में पूर्व विधायक के दो पौत्रों के खिलाफ दर्ज मामले में देवरनियां थाना पुलिस ने खेल कर दिया। शुरू से एक मुकदमे में हाईकोर्ट तक जानलेवा हमले की बात स्वीकारने वाले विवेचक ने स्थानीय कोर्ट में तीन धाराएं कम करके हलफनामा दाखिल कर दिया।
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बरेली के बहेड़ी से देवरनिया तक मारपीट और दबंगई के लिए चर्चित पूर्व विधायक के दो पौत्रों पर दर्ज मामले में देवरनियां थाना पुलिस ने खेल कर दिया। शुरू से एक मुकदमे में हाईकोर्ट तक जानलेवा हमले की बात स्वीकारने वाले विवेचक ने स्थानीय कोर्ट में तीन धाराएं कम करके हलफनामा दाखिल कर दिया। पीड़ित दुकानदार ने मामले में विवेचक व थाना प्रभारी पर आरोप लगाकर एसएसपी से धाराओं को पूर्ववत करने की मांग की है।
देवरनिया के कठर्रा निवासी प्रीतम सिंह ने एसएसपी को बताया है कि 19 अगस्त को सुबह वह अपने मेडिकल स्टोर की सफाई कर रहे थे, तभी शशांक वर्मा, उसके भाई मयंक वर्मा और उसके तीन साथी उसे पड़ोसी राजीव कुमार की दुकान खाटूश्याम कन्फेक्शनरी में आग लगाते दिखे। उन्होंने इसका वीडियो बनाने के साथ ही राजीव को कॉल करके सूचना दी तो आरोपियों ने उन पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया।
उनकी दुकान में तोड़फोड़ के साथ ही शशांक ने फायरिंग भी की थी। इनके हमले से उनके बाएं कान में गंभीर चोट आई थी। एक कान से सुनने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो गई। आरोपी दोनों भाई उनसे पहले 50 हजार की रंगदारी वसूल चुके थे। और रुपये नहीं देने की वजह से उनसे नाराज थे। पुलिस ने उस वक्त उनकी और राजीव की ओर से दो अलग रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
हाईकोर्ट तक व्यापारियों के साथ रही पुलिस
प्रीतम सिंह ने बताया कि उनके मुकदमे में जानलेवा हमले की धारा 109 पहले से दर्ज थी। शुरू में विवेचक ने निष्पक्षता से काम किया। आरोपियों ने जब हाईकोर्ट से स्टे लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया तो विवेचक ने कोर्ट को जानकारी दी कि मुकदमे में धारा 111 (2) व 118 की बढ़ोतरी की जा चुकी है। जिला जज के यहां जब आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी तो पुलिस ने वहां भी यही तर्क प्रस्तुत किए।
एक ही विवेचक-एक ही थानेदार...सेटिंग के बाद खेल की चर्चा
प्रीतम ने बताया कि जब पुलिस ने तीन दिन पहले मयंक वर्मा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बहेड़ी कोर्ट में पेश किया तो धारा 109 के साथ ही 117 (2) का जिक्र नहीं किया। प्रीतम का आरोप है कि जब दुकानदारों पर हमला व दुकान में आग लगाने की घटनाएं दिनदहाड़े की हैं, तमाम लोग इसके गवाह हैं तो पुलिस ने केवल सेटिंग के आधार पर ही ये खेल किया है। पूरी विवेचना के दौरान जब एक ही थाना प्रभारी व एक ही विवेचक हैं और हाईकोर्ट तक वह जिन धाराओं को लगाने का जिक्र कर चुके हैं, तब धाराएं हटाने का कोई आधार नहीं है।
सपा नेता से जुड़े हैं दबंग, व्यापारी ने जताया खतरा
प्रीतम ने देवरनिया थाना पुलिस पर भरोसा न होने की बात कहते हुए एसएसपी से विवेचना किसी और थाने से कराने या फिर देवरनिया पुलिस को पूर्व में लगी धाराओं को बहाल करके आरोपियों का चालान कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित करने की मांग की है। विवेचक व थाना प्रभारी की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की है। प्रीतम ने यह भी डर जताया है कि आरोपी शशांक वर्मा व मयंक वर्मा सपा के एक जनप्रतिनिधि से जुड़े हैं और काफी दबंग प्रवृत्ति के हैं। इनके स्वर्गवासी दादा कई साल पहले बहेड़ी से विधायक रहे हैं। इस वजह से आरोपियों का राजनीति व पुलिस प्रशासन में काफी दखल है। उसे व उसके परिवार को जान का खतरा भी हो सकता है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि देवरनिया थाना पुलिस पर विवेचना में खेल करने का आरोप लगाया गया है। मामले की जांच कराई जाएगी। किसी व्यापारी या नागरिक को किसी से डरने की जरूरत नहीं है।