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Bareilly News: फूलों के पराग में भरा जहर, चूसकर मर रहीं मधुमक्खियां, कीटनाशकों का बेहिसाब इस्तेमाल बन रहा वजह

Tue, 20 May 2025 03:39 PM IST
बरेली ब्यूरो अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 20 May 2025 03:39 PM IST
सार

शहद की तलाश मधुमक्खियों की जान पर भारी पड़ रही है। कीटनाशकों के बेहिसाब इस्तेमाल से फूलों में जहर घुल रहा है, जिसे चूसकर मधुमक्खियां मर रही हैं। 

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Poison filled in the nectar of flowers bees are dying after sucking it in bareilly
मौन पालक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खेतों और बाग-बगीचों में कीटनाशकों के बेहिसाब छिड़काव से फूलों और फलों में जहर घुल रहा है। यही जहर मधुमक्खियों की मौत की वजह बन रहा है। बढ़ता तापमान भी मधुमक्खियों को झुलसा रहा है। बरेली में नवाबगंज के मौन पालक कमलवीर श्रीवास्तव के मुताबिक, गर्मियों में वह मौन पालन के बक्से लेकर बागों और खेतों में जाते थे, ताकि मधुमक्खियों को भरपूर रस मिल सके। इस बीच खेतों से लौटने वाली मधुमक्खियां मरने लगीं। 

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अन्य मौन पालकों से संपर्क किया तो उन्होंने खेतों में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशकों के दुष्प्रभाव के बारे में बताया। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान परिसर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ को परेशानी बताई तो उन्होंने मधुमक्खियों को चीनी आदि का घोल मुहैया कराने का सुझाव दिया। बताया कि वर्ष 2020 में जब कारोबार शुरू किया तो जिले में जगह-जगह घूमकर बक्से लगाते रहे। एक बार आम के बाग में बक्से रखे तो सभी मधुमक्खियां मर गईं। इससे काफी नुकसान हुआ। हालांकि, तब वजह पता नहीं चल सकी थी। अब जांच-परखकर ही बक्से लगाते हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एचआर मीणा के मुताबिक, खेतों में कीटनाशक के छिड़काव से मधुमक्खियों को जान का जोखिम होता है। इसलिए केंद्र में पल रही मधुमक्खियों को चीनी का घोल दिया जाता है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. रंजीत सिंह ने बताया कि किसानों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है।

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उत्पादन बढ़ाने की चाहत में दांव पर मधुमक्खियों का जीवन
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के मुताबिक, गेहूं, धान की फसल के बजाय मधुमक्खियां फूलदार फसल जैसे सरसों, सूरजमुखी, सब्जियां समेत पुष्प नर्सरियों की ओर जाती हैं। आम, अमरूद, लीची, आंवला के बागों से रस चूसती हैं। खेत से ज्यादा घातक बाग हैं, क्योंकि उत्पादन बढ़ाने के लिए कीटनाशकों का बेहिसाब इस्तेमाल होता है। मधुमक्खियों समेत अन्य कीटों के मरने से पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

कम से कम चार एकड़ का बाग जरूरी : डॉ. रंजीत सिंह
डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक, शहर में कंक्रीट के जाल बिछने से बड़ी तादाद में फलदार वृक्ष काट दिए गए। मधुमक्खियों को रस चूसने के लिए करीब चार एकड़ का क्षेत्रफल जरूरी है। लिहाजा, शहर में अब उनके छत्ते नजर नहीं आते। वहीं, कैंट, आईवीआरआई, मिनी बाइपास, महानगर कॉलोनी की तरफ छत्ते दिखते हैं। 

मधुमक्खियों की खास बातें
  • कॉलोनी में एक रानी समेत कई नर व श्रमिक मधुमक्खियां होती हैं। 
  • छह पैर रस जुटाने में मदद करते हैं। 
  • नृत्य के माध्यम से संवाद करती हैं। छत्ते की सफाई भी करती हैं। 
  • सिर्फ मादा मधुमक्खी ही डंक मारती हैं। फिर वे मर जाती हैं। 
  • प्राकृतिक जीपीएस होता है। भटकने पर भी छत्ते तक पहुंच जाती हैं। 
  • खतरे से निपटने की योजना बनाती हैं। कॉलोनी में बैठक होती है। 
  • रानी मधुमक्खी अंडे न दे तो उसे श्रमिक मक्खियां मार देती हैं।
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