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Bareilly News: भुगतान के बावजूद नहीं मिला भूखंड, आवंटी कर रहे इंतजार
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बरेली। प्राधिकरण दिवस पर बृहस्पतिवार को अधिकारियों ने लोगों की समस्याएं सुनीं और समाधान के आदेश दिए। दो मामले ऐसे भी आए, जिनमें भुगतान करने के बावजूद आवंटियों को भूखंड नहीं मिले। उनको इंतजार पर इंतजार करना पड़ रहा है।
बीडीए की रामगंगानगर आवासीय परियोजना की अलकनंदा कॉलोनी में 15 सितंबर 2021 को बैंककर्मी उपासना नेगी के नाम 162 वर्गमीटर का भूखंड आवंटित हुआ था।
ढाई साल पहले 41.75 लाख रुपये देकर रजिस्ट्री भी करा ली, लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिल सका। उपासना के पिता पदमेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि जब-जब बीडीए कार्यालय आए, इंतजार करने की सलाह दी गई। कारण पूछने पर बताया कि अभी साइट प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हरिचरण सिंह का ममला दूसरी बार आया। उन्होंने बेटे अजय यादव के नाम ढाई साल पहले 29.81 लाख रुपये जमा करके 112.5 वर्गमीटर का भूखंड रामगंगानगर आवासीय योजना में लिया था।
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साइट प्लान फंसा होने की वजह से न तो रजिस्ट्री हुई, न ही कब्जा मिला। अब एक ओर अजय यादव बैंक को ब्याज भर रहे हैं, दूसरी ओर बीडीए दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। इससे पहले 18 दिसंबर के प्राधिकरण दिवस में भी उन्होंने शिकायत की थी। इस बार उन्हें बताया गया कि साइट प्लान बन रहा है। उन्हें भूखंड मिलेगा। अमर उजाला ब्यूरो
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बीडीए की रामगंगानगर आवासीय परियोजना की अलकनंदा कॉलोनी में 15 सितंबर 2021 को बैंककर्मी उपासना नेगी के नाम 162 वर्गमीटर का भूखंड आवंटित हुआ था।
ढाई साल पहले 41.75 लाख रुपये देकर रजिस्ट्री भी करा ली, लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिल सका। उपासना के पिता पदमेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि जब-जब बीडीए कार्यालय आए, इंतजार करने की सलाह दी गई। कारण पूछने पर बताया कि अभी साइट प्लान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
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सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हरिचरण सिंह का ममला दूसरी बार आया। उन्होंने बेटे अजय यादव के नाम ढाई साल पहले 29.81 लाख रुपये जमा करके 112.5 वर्गमीटर का भूखंड रामगंगानगर आवासीय योजना में लिया था।
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साइट प्लान फंसा होने की वजह से न तो रजिस्ट्री हुई, न ही कब्जा मिला। अब एक ओर अजय यादव बैंक को ब्याज भर रहे हैं, दूसरी ओर बीडीए दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। इससे पहले 18 दिसंबर के प्राधिकरण दिवस में भी उन्होंने शिकायत की थी। इस बार उन्हें बताया गया कि साइट प्लान बन रहा है। उन्हें भूखंड मिलेगा। अमर उजाला ब्यूरो