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दर्शन के शिक्षक को रास न आया हाथ में डंडा
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:06 AM IST
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दर्शनशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसी त्रिपाठी को अपने हाथ में डंडा रास नहीं आया। उन्होंने बरेली कालेज के चीफ प्राक्टर पद को एक महीने में ही छोड़ दिया। शुक्रवार को उन्होंने अपना इस्तीफा सायं चार बजे प्राचार्य कार्यालय में रिसीव करा दिया और फोन पर भी सूचना दे दी। प्राचार्य इस मामले पर शनिवार को निर्णय लेंगे।
डॉ. त्रिपाठी को मैनेजमेंट के आदेश पर पांच जुलाई को कालेज का चीफ प्राक्टर बनाया गया था। यह निर्णय चौंकाने वाला था क्योंकि वे विशुद्ध तौर पर पढ़ने-पढ़ाने वाले शिक्षक माने जाते हैं। तमाम लोगों का मानना था कि चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी उनके मिजाज से मेल नहीं खाती। हालांकि मैनेजमेंट के आदेश पर उन्होंने यह जिम्मेदारी ले ली लेकिन कालेज में आठ अगस्त से होने वाली शिक्षण सत्र की विधिवत शुरुआत से पहले ही डॉ. त्रिपाठी ने चीफ प्राक्टर का पद छोड़ दिया। उन्होंने अपने पत्र में पठन-पाठन के लिए समय मांगते हुए चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी से मुक्त करने की मांग की है। यह भी माना जा रहा है कि नए सत्र में होने वाले छात्र संघ चुनाव को लेकर बखेड़ों की आशंकाओं को देखते हुए उन्होंने विवाद से बचने के लिए इस्तीफा दिया है। वैसे भी, एडमिशन के दौरान पिछले दिनों शिक्षक-कर्मचारियों के आंदोलन से हंगामा हुआ, इन सभी चीजों से अकेले जूझना पड़ा। इसके बाद ही इस्तीफे का मन बना लिया था। हालांकि अभी उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। प्राचार्य और मैनेजमेंट को उनके इस्तीफे पर निर्णय लेना है।
अब डॉ. वंदना पर निगाहें
डॉ. एसी त्रिपाठी का इस्तीफा अगर मंजूर होता है तो नए चीफ प्राक्टर के नाम पर कालेज प्रशासन को विचार करना पड़ेगा। किसी को चीफ प्राक्टर बनाना आसान इसलिए नहीं है क्योंकि बखेड़ों से बचने को यह जिम्मेदारी लेने के लिए कालेज के अधिकांश शिक्षक तैयार नहीं होते। ऐसे में, कालेज प्रशासन दो डिप्टी चीफ प्राक्टर डॉ. डीआर यादव और डॉ. वंदना शर्मा में से किसी एक को आगे बढ़ा सकता है। इनमें से डॉ. वंदना को इसलिए वरीयता दी जा सकती है क्योंकि वह तेजतर्रार मानी जाती हैं और कालेज प्रशासन इस पहलू पर विचार कर सकता है कि महिला होने के नाते चीफ प्राक्टर के रूप में वह अनुशासन के लिए ज्यादा बेहतर हो सकती हैं।
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कोट...
चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी के साथ अपनी क्लास के बच्चों के साथ न्याय नहीं कर पाता इसलिए इस्तीफा दिया है, इसकी दूसरी और कोई वजह नहीं है।
-डॉ. एसी त्रिपाठी, चीफ प्राक्टर
मेरे सामने अभी चीफ प्राक्टर का इस्तीफा नहीं आया है। सुबह देखूंगा और उसके बाद ही इस पर विचार करके निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य
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डॉ. त्रिपाठी को मैनेजमेंट के आदेश पर पांच जुलाई को कालेज का चीफ प्राक्टर बनाया गया था। यह निर्णय चौंकाने वाला था क्योंकि वे विशुद्ध तौर पर पढ़ने-पढ़ाने वाले शिक्षक माने जाते हैं। तमाम लोगों का मानना था कि चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी उनके मिजाज से मेल नहीं खाती। हालांकि मैनेजमेंट के आदेश पर उन्होंने यह जिम्मेदारी ले ली लेकिन कालेज में आठ अगस्त से होने वाली शिक्षण सत्र की विधिवत शुरुआत से पहले ही डॉ. त्रिपाठी ने चीफ प्राक्टर का पद छोड़ दिया। उन्होंने अपने पत्र में पठन-पाठन के लिए समय मांगते हुए चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी से मुक्त करने की मांग की है। यह भी माना जा रहा है कि नए सत्र में होने वाले छात्र संघ चुनाव को लेकर बखेड़ों की आशंकाओं को देखते हुए उन्होंने विवाद से बचने के लिए इस्तीफा दिया है। वैसे भी, एडमिशन के दौरान पिछले दिनों शिक्षक-कर्मचारियों के आंदोलन से हंगामा हुआ, इन सभी चीजों से अकेले जूझना पड़ा। इसके बाद ही इस्तीफे का मन बना लिया था। हालांकि अभी उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। प्राचार्य और मैनेजमेंट को उनके इस्तीफे पर निर्णय लेना है।
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अब डॉ. वंदना पर निगाहें
डॉ. एसी त्रिपाठी का इस्तीफा अगर मंजूर होता है तो नए चीफ प्राक्टर के नाम पर कालेज प्रशासन को विचार करना पड़ेगा। किसी को चीफ प्राक्टर बनाना आसान इसलिए नहीं है क्योंकि बखेड़ों से बचने को यह जिम्मेदारी लेने के लिए कालेज के अधिकांश शिक्षक तैयार नहीं होते। ऐसे में, कालेज प्रशासन दो डिप्टी चीफ प्राक्टर डॉ. डीआर यादव और डॉ. वंदना शर्मा में से किसी एक को आगे बढ़ा सकता है। इनमें से डॉ. वंदना को इसलिए वरीयता दी जा सकती है क्योंकि वह तेजतर्रार मानी जाती हैं और कालेज प्रशासन इस पहलू पर विचार कर सकता है कि महिला होने के नाते चीफ प्राक्टर के रूप में वह अनुशासन के लिए ज्यादा बेहतर हो सकती हैं।
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चीफ प्राक्टर की जिम्मेदारी के साथ अपनी क्लास के बच्चों के साथ न्याय नहीं कर पाता इसलिए इस्तीफा दिया है, इसकी दूसरी और कोई वजह नहीं है।
-डॉ. एसी त्रिपाठी, चीफ प्राक्टर
मेरे सामने अभी चीफ प्राक्टर का इस्तीफा नहीं आया है। सुबह देखूंगा और उसके बाद ही इस पर विचार करके निर्णय लिया जाएगा।
-डॉ. सोमेश यादव, प्राचार्य