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Bareilly News: पालतू कुत्ते ने राजमिस्त्री को काटा, रैबीज संक्रमण से हुई मौत
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- कुत्ते का कराया टीकाकरण पर खुद को नहीं लगवाई थी वैक्सीन
बरेली। रैबीज की चपेट में आने से दूसरी मौत स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर बृहस्पतिवार को दर्ज हुई। भोजीपुरा निवासी एक राजमिस्त्री को डेढ़ माह पूर्व कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते को टीका लगवा दिया लेकिन खुद वैक्सीन नहीं लगवाई। रैबीज की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।
आईडीएसपी सेल इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक भोजीपुरा के लक्ष्मियापुर गांव के रामदुलारे (40) राजमिस्त्री थे। कुछ दिन पूर्व ही किसी के यहां से कुत्ता पालने के लिए घर लेकर आए थे। वे कुत्ते को एआरवी लगवाने जा रहे थे पर रास्ते में ही उसने हाथ पर काट लिया।
अस्पताल पहुंचे तो कुत्ते को वैक्सीन लगवा दी पर खुद को टीका नहीं लगवाया। माह भर बाद उन्हें हाइड्रो फोबिया और एयरोफोबिया के लक्षण आने लगे। हालत बिगड़ी तो परिजन अस्पताल पहुंचे। यहां से लखनऊ केजीएमयू रेफर किया गया था।
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अस्पताल पहुंचते उससे पहले रास्ते में ही हालत बिगड़ गई और उल्टियां होने लगी। किसी नजदीकी अस्पताल में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। डॉ. अब्बास के मुताबिक कुत्ते के दांत हाथ के पार हो गए थे। एआरवी के साथ सीरम लगने पर ही जान बचने की उम्मीद थी। अमर उजाला ब्यूरो
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बरेली। रैबीज की चपेट में आने से दूसरी मौत स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर बृहस्पतिवार को दर्ज हुई। भोजीपुरा निवासी एक राजमिस्त्री को डेढ़ माह पूर्व कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते को टीका लगवा दिया लेकिन खुद वैक्सीन नहीं लगवाई। रैबीज की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई।
आईडीएसपी सेल इंचार्ज डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक भोजीपुरा के लक्ष्मियापुर गांव के रामदुलारे (40) राजमिस्त्री थे। कुछ दिन पूर्व ही किसी के यहां से कुत्ता पालने के लिए घर लेकर आए थे। वे कुत्ते को एआरवी लगवाने जा रहे थे पर रास्ते में ही उसने हाथ पर काट लिया।
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अस्पताल पहुंचे तो कुत्ते को वैक्सीन लगवा दी पर खुद को टीका नहीं लगवाया। माह भर बाद उन्हें हाइड्रो फोबिया और एयरोफोबिया के लक्षण आने लगे। हालत बिगड़ी तो परिजन अस्पताल पहुंचे। यहां से लखनऊ केजीएमयू रेफर किया गया था।
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अस्पताल पहुंचते उससे पहले रास्ते में ही हालत बिगड़ गई और उल्टियां होने लगी। किसी नजदीकी अस्पताल में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। डॉ. अब्बास के मुताबिक कुत्ते के दांत हाथ के पार हो गए थे। एआरवी के साथ सीरम लगने पर ही जान बचने की उम्मीद थी। अमर उजाला ब्यूरो