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Bareilly News: झगड़ालू भाई के निशाने पर था दिव्यांग, पहले भी किया हमला
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बरेली। दिव्यांग दीपचंद्र की गला दबाकर हत्या किसने की, इसे लेकर तहरीर और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ और जांच से उसका भाई सतीश ही कार्रवाई के लपेटे में है।
पुलिस के अनुसार सतीश झगड़ालू किस्म का व्यक्ति है। उसने दीपचंद्र पर पहले भी हमला किया था। पुलिस सतीश समेत गांव के कुछ ऐसे आवारा लड़कों से पूछताछ कर रही है जो शराब की तलब लगने पर दीपचंद्र के पास आते-जाते रहते थे।
सीओ हाईवे देवेश सिंह ने बताया कि दीपचंद्र का घर काफी बड़ा है और उसमें तीन कमरे हैं। इनमें से एक कमरा बाहरी हिस्से में है जिसका दरवाजा भी सड़क और अंदर दोनों ओर खुलता है। चूंकि दीपचंद्र अविवाहित और अकेला रहता था तो इसी दरवाजे से आता-जाता था। यही दरवाजा घटना के वक्त बाहर से बंद मिला लेकिन कमरे में आवाजाही अंदर से हो सकती थी।
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इस कमरे में शराब के छह पव्वा (क्वार्टर) व एक डंडा भी पड़ा मिला। दिव्यांग पेंशन व दो बीघा जमीन के दम पर जीवनयापन कर रहे दीपचंद्र के बारे में पुलिस को बताया गया कि वह शराब के लती थे। लोगों ने यह भी बताया कि दीपचंद्र लाइसेंसी दुकान से शराब के कुछ क्वार्टर लाकर रख लेते थे जिन्हें गांव के लोग जरूरत पर उनसे कुछ रुपये ज्यादा देकर ले जाते थे।
चूंकि दीपचंद्र दिव्यांग थे तो पड़ोसी जानबूझकर उनकी शिकायत नहीं करते थे। यही वजह थी जो उनके कमरे पर इस तरह के लोगों का आना-जाना लगा रहता था, ऐसे ही कुछ लोगों से पुलिस पूछताछ भी कर रही है। देर रात दीपचंद्र का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पुलिस के अनुसार सतीश झगड़ालू किस्म का व्यक्ति है। उसने दीपचंद्र पर पहले भी हमला किया था। पुलिस सतीश समेत गांव के कुछ ऐसे आवारा लड़कों से पूछताछ कर रही है जो शराब की तलब लगने पर दीपचंद्र के पास आते-जाते रहते थे।
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सीओ हाईवे देवेश सिंह ने बताया कि दीपचंद्र का घर काफी बड़ा है और उसमें तीन कमरे हैं। इनमें से एक कमरा बाहरी हिस्से में है जिसका दरवाजा भी सड़क और अंदर दोनों ओर खुलता है। चूंकि दीपचंद्र अविवाहित और अकेला रहता था तो इसी दरवाजे से आता-जाता था। यही दरवाजा घटना के वक्त बाहर से बंद मिला लेकिन कमरे में आवाजाही अंदर से हो सकती थी।
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इस कमरे में शराब के छह पव्वा (क्वार्टर) व एक डंडा भी पड़ा मिला। दिव्यांग पेंशन व दो बीघा जमीन के दम पर जीवनयापन कर रहे दीपचंद्र के बारे में पुलिस को बताया गया कि वह शराब के लती थे। लोगों ने यह भी बताया कि दीपचंद्र लाइसेंसी दुकान से शराब के कुछ क्वार्टर लाकर रख लेते थे जिन्हें गांव के लोग जरूरत पर उनसे कुछ रुपये ज्यादा देकर ले जाते थे।
चूंकि दीपचंद्र दिव्यांग थे तो पड़ोसी जानबूझकर उनकी शिकायत नहीं करते थे। यही वजह थी जो उनके कमरे पर इस तरह के लोगों का आना-जाना लगा रहता था, ऐसे ही कुछ लोगों से पुलिस पूछताछ भी कर रही है। देर रात दीपचंद्र का अंतिम संस्कार कर दिया गया।