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राहु से पीड़ित हो सकते हैं ‘व’ अक्षर के नाम वाले लोग और शहर
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rahu
- फोटो : demo photo
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बरेली। छह दिसंबर से व अक्षर के नाम वाले लोग और शहरों के राहु ग्रह से पीड़ित होने की आशंका है। उनमें संक्रामक रोग बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। यह प्रभाव 18 महीने तक रहेगा।
विश्व पंचांग काशी हिंदू विश्व विद्यालय के अनुसार छह दिसंबर से राहु अपनी वक्र गति से वृष राशि में आएगा। यह 18 महीने तक प्रभावित रहेगा। इनमें व अक्षर के नाम के लोग, शहर, देश, उद्योग आदि प्रभावित रहेंगे। उसके बाद ओ, ए, उ, इ अक्षर के नाम वाले भी धीमी गति से प्रभावित होंगे। 24 फरवरी से 15 अप्रैल तक राहु और मंगल वृृष राशि में एक साथ होंगे। इस कारण लोग हवा के जरिये फैलने वाले रोग से पीड़ित होंगे। संक्रमण से फैलने वाले बुखार से पीड़ित होने वालों की संख्या भी ज्यादा रहेगी। 28 दिसंबर से शनि और गुरू एक साथ मकर राशि में होंगे जो 15 मार्च तक एक साथ रहेंगे। शनि और गुरू का एक साथ मकर राशि में पहुंचना अर्थ व्यवस्था में गिरावट लाएगा। जिससे पीड़ित लोगों को धन की समस्या होगी। साथ ही बेवजह भ्रमण करना पड़ेगा, वृद्धों और बच्चों के दवाई की जरूरत पड़ेगी। इससे बचने के लिए घर में हवन आदि करना होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय ने बताया कि हवन होने से घर में बीमारियां निम्न स्तर पर रहती हैं। संक्रमण के बचने के लिए लोगों को बुद्धि से काम लेना होगा।
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विश्व पंचांग काशी हिंदू विश्व विद्यालय के अनुसार छह दिसंबर से राहु अपनी वक्र गति से वृष राशि में आएगा। यह 18 महीने तक प्रभावित रहेगा। इनमें व अक्षर के नाम के लोग, शहर, देश, उद्योग आदि प्रभावित रहेंगे। उसके बाद ओ, ए, उ, इ अक्षर के नाम वाले भी धीमी गति से प्रभावित होंगे। 24 फरवरी से 15 अप्रैल तक राहु और मंगल वृृष राशि में एक साथ होंगे। इस कारण लोग हवा के जरिये फैलने वाले रोग से पीड़ित होंगे। संक्रमण से फैलने वाले बुखार से पीड़ित होने वालों की संख्या भी ज्यादा रहेगी। 28 दिसंबर से शनि और गुरू एक साथ मकर राशि में होंगे जो 15 मार्च तक एक साथ रहेंगे। शनि और गुरू का एक साथ मकर राशि में पहुंचना अर्थ व्यवस्था में गिरावट लाएगा। जिससे पीड़ित लोगों को धन की समस्या होगी। साथ ही बेवजह भ्रमण करना पड़ेगा, वृद्धों और बच्चों के दवाई की जरूरत पड़ेगी। इससे बचने के लिए घर में हवन आदि करना होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पांडेय ने बताया कि हवन होने से घर में बीमारियां निम्न स्तर पर रहती हैं। संक्रमण के बचने के लिए लोगों को बुद्धि से काम लेना होगा।
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