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Bareilly News: 15 साल में चार गुना हुए यात्री, सुविधाएं जस की तस
Sun, 27 Oct 2024 04:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 27 Oct 2024 04:25 AM IST
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बरेली। सेटेलाइट और पुराने बस अड्डे पर बीते 15 साल में यात्रियों की संख्या में चार गुना इजाफा हुआ है, लेकिन यात्री सुविधाएं जस की तस हैं। दोनों बस अड्डों पर रोजाना 500-600 बसों का आवागमन होता है। रोज 30-35 हजार यात्री आते-जाते हैं। उनको पीने के लिए पानी और बैठने के लिए बेंच तक मयस्सर नहीं होती।
पुराने बस अड्डे पर 20 साल से नई बेंच नहीं लगाई गईं हैं। इस बार गर्मियों के सीजन में भी आधे से ज्यादा पंखे भी बंद रहे। दोनों बस अड्डों पर गंदगी और अतिक्रमण से बुरा हाल है। रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। सेटेलाइट बस अड्डे के अंदर तक अतिक्रमण हो गया है। दिवाली पर भी जिम्मेदारों ने इसे हटवाना जरूरी नहीं समझा।
सेटेलाइट बस अड्डे पर रोज यूपी के साथ ही, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा और चंडीगढ़ से 360 से ज्यादा बसों का आवागमन होता है। दिल्ली, लखनऊ समेत उत्तराखंड और पूर्वांचल के लिए बसों का संचालन भी यहीं से होता है। यात्री सुविधाओं के नाम पर हाल ही में यहां सर्कुलेटिंग एरिया की इंटरलॉकिंग कराई गई है। सामान्य दिनों में यहां 15-17 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इस संख्या के मुकाबले सुविधाओं का अभाव है।
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पुराने बस अड्डे से ही रोडवेज की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चलती है। आरएम, रुहेलखंड व बरेली डिपो के एआरएम के कार्यालय भी यहीं हैं। एआरएम वित्त, प्रशासन, कार्मिक भी यहीं से कामकाज देखते हैं। इसके बाद भी यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं। शेड में यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं। प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। परिसर में पानी का इंतजाम नहीं है।
यात्री सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं। सेटेलाइट बस अड्डे का पीपीपी मॉडल पर विकास प्रस्तावित है। पुराना बस अड्डे से ई-बसों का संचालन प्रस्तावित है। यात्री सुविधाओं में अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कराया जाएगा। - दीपक चौधरी, आरएम
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पुराने बस अड्डे पर 20 साल से नई बेंच नहीं लगाई गईं हैं। इस बार गर्मियों के सीजन में भी आधे से ज्यादा पंखे भी बंद रहे। दोनों बस अड्डों पर गंदगी और अतिक्रमण से बुरा हाल है। रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। सेटेलाइट बस अड्डे के अंदर तक अतिक्रमण हो गया है। दिवाली पर भी जिम्मेदारों ने इसे हटवाना जरूरी नहीं समझा।
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सेटेलाइट बस अड्डे पर रोज यूपी के साथ ही, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा और चंडीगढ़ से 360 से ज्यादा बसों का आवागमन होता है। दिल्ली, लखनऊ समेत उत्तराखंड और पूर्वांचल के लिए बसों का संचालन भी यहीं से होता है। यात्री सुविधाओं के नाम पर हाल ही में यहां सर्कुलेटिंग एरिया की इंटरलॉकिंग कराई गई है। सामान्य दिनों में यहां 15-17 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इस संख्या के मुकाबले सुविधाओं का अभाव है।
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पुराने बस अड्डे से ही रोडवेज की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चलती है। आरएम, रुहेलखंड व बरेली डिपो के एआरएम के कार्यालय भी यहीं हैं। एआरएम वित्त, प्रशासन, कार्मिक भी यहीं से कामकाज देखते हैं। इसके बाद भी यहां व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हैं। शेड में यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं। प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। परिसर में पानी का इंतजाम नहीं है।
यात्री सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं। सेटेलाइट बस अड्डे का पीपीपी मॉडल पर विकास प्रस्तावित है। पुराना बस अड्डे से ई-बसों का संचालन प्रस्तावित है। यात्री सुविधाओं में अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर कराया जाएगा। - दीपक चौधरी, आरएम