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शिक्षा के धंधेवालों के फंदे से नहीं निकल पाए अभिभावक

Fri, 18 Mar 2016 01:48 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Fri, 18 Mar 2016 01:48 AM IST
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Parent education , could not come from the snare of Dndewalon  Open in
‌कमीशनबाजी
बुक सेलर, पब्लिशर और स्कूल वालों के काकस को लेकर खूब हो हल्ला मचा। अभिभावकों को उम्मीद थी कि शायद प्रशासन के दखल के बाद उनको कुछ राहत मिलेगी लेकिन अफसरों के साथ बैठक भी दिखावा ही रही। कुछ बिंदुओं पर घुड़की, कुछ पर नाटकीय आदेश और कुछ मुद्दों पर आश्चर्य व्यक्त करने के अलावा बैठक में कुछ नहीं हुआ। अभिभावक बेचारे बनकर आए थे और बेचारे बनकर ही बैठक से चले गए। 
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किताब और ड्रेस के बहाने अभिभावकों ने स्कूल एसोसिएशन को प्रशासन के सामने खरी- खोटी सुना दी। बैठक में न केवल अभिभावक त्रस्त दिखे बल्कि बीएसए और डीआईओएस ने भी कांवेंट स्कूलों के साथ आ रही विभागीय समस्या और निजी समस्या को भी सामने रखा। कई सवाल ऐसे रहे जिस पर स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी चुप हो गए। प्रशासन का पक्ष हल्का नजर आया। बैठक का कोई नतीजा नहीं निकला है। एडीएम सिटी ने बैठक के बिंदु बनाकर संयुक्त शिक्षा निदेशक को आगे की कार्यवाही के लिए भेज दिया है। 
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एडीएम सिटी आलोक कुमार ने गुरुवार को इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ अभिभावक और शिक्षा अधिकारियों की बैठक बुलाई। डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने कहा कि स्कूलों की मनमानी का आलम ये है कि किसी भी स्कूल की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की जा सकती। प्राइवेट गार्ड अधिकारियाें को भी बाहर खड़ा कर देता है। अब पुस्तकें और ड्रेस स्कूल ही बेचने लगे हैं जिससे वे मनमानी करते हैं। पैरेंट्स फोरम के संयोजक खालिद जिलानी ने कहा कि अगर एनसीईआरटी किताबें खरीदने में दिक्कत है तो दिसंबर में डिमांड भेजे, फोरम किताबें पूरी कराने में जी तोड़ कोशिश करेगा। अभिभावक संघ के शोभित सक्सेना ने ड्रेस और किताब सिर्फ एक ही दुकान पर मिलने का मुद्दा उठाया। एडीएम ने कहा कि ड्रेस एक जगह न बिके और किताब के मामले पर बुक डीलरों से भी बात होगी। 
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किताबों पर रेट बदले तो होगी एफआईआर
किताबों में चिप्पी लगाकर और डार्क ब्लैक कर रेट छिपाकर नए रेट लगाने वाले दुकानदार और प्रकाशकों पर अब कार्रवाई होगी। अगर शिकायत मिली तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अभी तक कई किताबों में चिप्पी लगाकर उसके दाम बढ़ाए जाते हैं। कापियां भी अलग साइज व रेट की हैं। 
 कमेटी ने कुछ किया ही नहीं 
एडीएम सिटी ने कहा कि पिछले साल एक कमेटी गठित की गई थी, लेकिन इसने कुछ किया ही नहीं। इसे स्कूल से संबंधित शिकायताें पर काम करना था।
 एडमिशन फार्म 1400 रुपये 
शिक्षामित्र संगठन के अध्यक्ष केपी सिंह ने मुद्दा उठाया कि कई स्कूलों में एडमिशन के फार्म ही 1400 रुपये के हैं। अभिभावक इतनी रकम रखें तो स्कूल में एडमिशन कराने की सोचें। शासनादेश न होने के चलते एडीएम सिटी ने मामले को छोड़ दिया।  
छोटी कक्षाओं की मान्यता 
बीएसए देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि किताब और ड्रेस की मनमानी छोड़िए इनके स्कूलों की मान्यता तक सीबीएसई नहीं देता है। सीबीएसई केवल 9 से 12 की मान्यता देता है। इस पर पारुष अरोड़ा ने अस्वीकार किया। उन्हाेंने एनओसी की बात की। तो एनओसी के बिंदु भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। 
ये रहे बैठक में शामिल 
एडीएम सिटी आलोक कुमार, डीआईओएस गजेंद्र कुमार, बीएसए देवेंद्र स्वरूप, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा, सचिव बिन्नी चिक्कर, पैरेंट्स फोरम के खालिद जिलानी, रूहेलखंड अभिभावक सेवा समिति के शोभित सक्सेना, पोपिंदर सिंह बक्शी, जतिन अरोड़ा, शिक्षामित्र संगठन केपी सिंह, यशतेंद्र सिंह, पुरुषोत्तम पटेल।  

स्कूल प्रबंधन के लिए बुद्धि शुद्धि हवन
सोमवार 21 मार्च को बार एसोसिएशन के सामने मंदिर में वकील और अभिभावक मिलकर स्कूल प्रबंधकों की बुद्धि शुद्धि हवन करेंगे। वकील यशतेंद्र सिंह, पुरुषोत्तम पटेल, अभिभावक केपी सिंह और शोभित सक्सेना ने बताया कि दोपहर दो बजे हवन होगा। 
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