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किसानों के नाम पर अनुमति लेकर माफिया ने जगह-जगह किया बालू खनन
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पीलीभीत। नदियों किनारे वाले खेतों बरसात में नदी की बालू आने से फसल उगाने की समस्या सरकार तक पहुंची तो जांच के बाद डीएम की अनुमति से ऐसे खेतों में बालू हटाने का आदेश जारी कर दिया गया था। तभी पहले से परेशान माफिया ने इस नए आदेश में अपना ‘रास्ता’ निकाल लिया। माफिया गरीब किसानों के नाम से प्रशासनिक अफसरों से बालू निकालने की अनुमति लेने के बाद मनमाने तरीके से जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से खनन निकासी करके करोड़ों का फायदा उठा रहे हैं।
योगी सरकार ने दो साल पहले अवैध तरीके से खनन निकासी पर सख्ती की तो माफिया परेशान हो गए। इसी के बाद जब नया आदेश आया तो माफिया के मजे आ गए। उनके अवैध तरीके से खनन करने से देवहा और गोमती नदियों के किनारे भारी भरकम गड्ढे बन चुके हैं। इससे आने वाली बरसात में दर्जनों गांव डूबने का खतरा पैदा हो गया है। बीसलपुर के ढुकसी और कुर्रखेड़ा गांव माफिया के कारनामे का एक उदाहरण भर है। ढुकसी के गरीब किसान महेंद्रपाल के नाम से माफिया ने 24 घंटे में प्रशासनिक अफसरों से बालू निकासी की अनुमति हासिल कर ली। फिर देवहा नदी किनारे जिस खेत में अनुमति मिली थी, वहां तो खनन निकासी की। साथ ही नदी के आसपास कई बीघा इलाके में जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से जमीन खोदकर भारी भरकम गड्ढे बना दिए। हालात ये हैं कि यहां नदी की धारा से 40 मीटर की दूरी तक जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से कई मीटर गहराई तक खुदाई की गई। जब ये मामला उछला। बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने गांव जाकर हालात देखे और आपत्ति जताई तो प्रशासनिक अफसरों ने किसान के नाम पर 17 लाख का जुर्माना ठोक दिया और बालू निकासी की अनुमति निरस्त कर दी।
नियमानुसार नदी किनारे बंजर या उस जमीन पर जिस पर खेती नहीं हो रही हो, वहां से बालू निकासी के लिए ईं टेंडर कराए जाने चाहिए थे। उसमें जिसका टेंडर निकलता, वह सरकार को शासन से निर्धारित 375 रुपये प्रति घन मीटर की रॉयल्टी दर अदा करके बालू निकालता। मगर, इतनी बड़ी प्रक्रिया से बचने के लिए खनन निकासी करने वाले माफिया ने इस तरह का तरीका निकाल लिया। मामला जब पकड़ा जाता है तो महेंद्रपाल जैसे किसान पर जुर्माना लगता है जबकि लाखों की बालू बेचकर माफिया फायदा उठाते हैं।
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अमरिया तहसील के गांव में भी दी गई थी बालू निकालने की अनुमति
ढुकसी से पहले अमरिया तहसील के एक गांव में भी एक किसान के नाम से खेत में बालू निकालने की अनुमति 23 नवंबर को दी गई थी। इसमें भी कहने को खेत से बालू निकालने की अनुमति दी गई, लेकिन इस गांव में भी देवहा नदी के किनारे माफियाओं ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक जमीनों से जेसीबी मशीन से खनन निकासी करके करोड़ों का मुनाफा कमाया। चूंकि, अनुमति किसान के नाम से उसके खेत से बालू निकालने की मिली थी, इसलिए खनन विभाग को एक पैसे का भी राजस्व नहीं मिला। माफिया मालामाल हो गए। माफियाओं ने निजी कृषि योग्य जमीन बताकर एक प्रार्थना किसान से दिलाया। उसके बदले किसान को कुछ लालच दे दिया गया। उस प्रार्थना पत्र पर लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट लगवाकर अफसरों से बालू निकासी की अनुमति ले ली। फिर सार्वजनिक जमीन से बालू और रेत निकालकर बेचने लगे। इतना ही नहीं, पूरनपुर और बीसलपुर के अलावा कलीनगर और माधोटांडा के कई गांवों में भी माफिया इसी तरह किसानों के नाम पर उसके खेत से बालू निकालने की अनुमति लेकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने में लगे हैं। खनन विभाग को हर महीने लाखों के राजस्व की चपत लग रही है। इस मामले में एडीएम (एफआर) अतुल सिंह से प्रशासनिक पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया।
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योगी सरकार ने दो साल पहले अवैध तरीके से खनन निकासी पर सख्ती की तो माफिया परेशान हो गए। इसी के बाद जब नया आदेश आया तो माफिया के मजे आ गए। उनके अवैध तरीके से खनन करने से देवहा और गोमती नदियों के किनारे भारी भरकम गड्ढे बन चुके हैं। इससे आने वाली बरसात में दर्जनों गांव डूबने का खतरा पैदा हो गया है। बीसलपुर के ढुकसी और कुर्रखेड़ा गांव माफिया के कारनामे का एक उदाहरण भर है। ढुकसी के गरीब किसान महेंद्रपाल के नाम से माफिया ने 24 घंटे में प्रशासनिक अफसरों से बालू निकासी की अनुमति हासिल कर ली। फिर देवहा नदी किनारे जिस खेत में अनुमति मिली थी, वहां तो खनन निकासी की। साथ ही नदी के आसपास कई बीघा इलाके में जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से जमीन खोदकर भारी भरकम गड्ढे बना दिए। हालात ये हैं कि यहां नदी की धारा से 40 मीटर की दूरी तक जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से कई मीटर गहराई तक खुदाई की गई। जब ये मामला उछला। बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा ने गांव जाकर हालात देखे और आपत्ति जताई तो प्रशासनिक अफसरों ने किसान के नाम पर 17 लाख का जुर्माना ठोक दिया और बालू निकासी की अनुमति निरस्त कर दी।
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नियमानुसार नदी किनारे बंजर या उस जमीन पर जिस पर खेती नहीं हो रही हो, वहां से बालू निकासी के लिए ईं टेंडर कराए जाने चाहिए थे। उसमें जिसका टेंडर निकलता, वह सरकार को शासन से निर्धारित 375 रुपये प्रति घन मीटर की रॉयल्टी दर अदा करके बालू निकालता। मगर, इतनी बड़ी प्रक्रिया से बचने के लिए खनन निकासी करने वाले माफिया ने इस तरह का तरीका निकाल लिया। मामला जब पकड़ा जाता है तो महेंद्रपाल जैसे किसान पर जुर्माना लगता है जबकि लाखों की बालू बेचकर माफिया फायदा उठाते हैं।
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अमरिया तहसील के गांव में भी दी गई थी बालू निकालने की अनुमति
ढुकसी से पहले अमरिया तहसील के एक गांव में भी एक किसान के नाम से खेत में बालू निकालने की अनुमति 23 नवंबर को दी गई थी। इसमें भी कहने को खेत से बालू निकालने की अनुमति दी गई, लेकिन इस गांव में भी देवहा नदी के किनारे माफियाओं ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक जमीनों से जेसीबी मशीन से खनन निकासी करके करोड़ों का मुनाफा कमाया। चूंकि, अनुमति किसान के नाम से उसके खेत से बालू निकालने की मिली थी, इसलिए खनन विभाग को एक पैसे का भी राजस्व नहीं मिला। माफिया मालामाल हो गए। माफियाओं ने निजी कृषि योग्य जमीन बताकर एक प्रार्थना किसान से दिलाया। उसके बदले किसान को कुछ लालच दे दिया गया। उस प्रार्थना पत्र पर लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट लगवाकर अफसरों से बालू निकासी की अनुमति ले ली। फिर सार्वजनिक जमीन से बालू और रेत निकालकर बेचने लगे। इतना ही नहीं, पूरनपुर और बीसलपुर के अलावा कलीनगर और माधोटांडा के कई गांवों में भी माफिया इसी तरह किसानों के नाम पर उसके खेत से बालू निकालने की अनुमति लेकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने में लगे हैं। खनन विभाग को हर महीने लाखों के राजस्व की चपत लग रही है। इस मामले में एडीएम (एफआर) अतुल सिंह से प्रशासनिक पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उनका फोन रिसीव नहीं हो पाया।