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बंदरों के साथ क्रूरता पर मेनका का डीएम को फोन, जांच शुरू
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पीलीभीत। नगर पंचायत मझोला में बंदरों को पकड़कर क्रूरतापूर्वक उन्हें बोरी में बंद करने के मामले को सुल्तानपुर की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने इस मामले में डीएम से जानकारी ली है। वहीं इस मामले का खुलासा होने पर डीएफओ (सामाजिक वानिकी) ने जांच के आदेश दिए हैं।
मझोला में बंदरों से आजिज आ चुके कस्बावासियों ने वन विभाग से बंदरों को पकड़वाने की मांग की थी। इस पर सामाजिक वानिकी प्रभाग ने बंदरों को पकड़ने की अनुमति दे दी थी।। अनुमति पत्र में नियमों का हवाला देते हुए वन कर्मचारियों के अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष को वन्यजीव संरक्षण नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था। इधर अनुमति मिलने के बाद रविवार को मथुरा से आए कुछ माहिरों ने कस्बे में पहुंचकर बीस बंदरों को पकड़ा था। वन कर्मियों की मौजूदगी में बंदर पकड़ने वाली टीम ने पहले बंदरों को खाना देकर लालच दिया और इसके बाद जाल डालकर कैद कर लिया। पकड़े गए बंदरों को बोरों में बंद कर दिया गया। वह इतना गलत तरीके से बंद किया कि बंदरों की हालत दम घुटने जैसी हो गई थी। वहीं नियमानुसार बंदरों को पकड़कर उन्हें पिंजरे में रखा जाना चाहिए था। पकड़े गए बंदरों बोरों को बंद किए ही नगर पंचायत के एक कचरा वाहन मेें लादकर 50 किलोमीटर दूर घुंघचाई क्षेत्र की खन्नौत नदी के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक बंदरों को बोरी में बंद करने का मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ गया था। मामला संज्ञान में आने पर डीएफओ संजीव कुमार ने रेंजर सतेंद्र सिंह को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
मेनका गांधी पहले से रही हैं ऐसे मामलों में सख्त
बंदरों को क्रूरतापूर्वक पकड़ने के बाद उन्हें बोरों में बंद करने के मामले को यहां से सांसद रहीं मेनका गांधी ने भी संज्ञान में लिया है। उन्होंने इस मामले में डीएम वैभव श्रीवास्तव से भी जानकारी ली है। इसके चलते किसी जिम्मेदार पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। अभी तक देखा गया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पशुओं के साथ बरती गई क्रूरता के मामले में बेहद सख्त रही हैं।
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बंदरों को पकडकर उनके साथ क्रूरता बरतने का मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जा रही है। रेंजर सतेंद्र सिंह से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर जिसकी लापरवाही होगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
बंदरों को पकड़ने के बाद उनके साथ क्रूरता बरती गई। यह पूूरी तरह से गलत है। मैं इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से भी बात करूंगी। दोषियों को दंडित कराया जाएगा। -मेनका गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री
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मझोला में बंदरों से आजिज आ चुके कस्बावासियों ने वन विभाग से बंदरों को पकड़वाने की मांग की थी। इस पर सामाजिक वानिकी प्रभाग ने बंदरों को पकड़ने की अनुमति दे दी थी।। अनुमति पत्र में नियमों का हवाला देते हुए वन कर्मचारियों के अलावा नगर पंचायत अध्यक्ष को वन्यजीव संरक्षण नियमों का पालन करने के लिए कहा गया था। इधर अनुमति मिलने के बाद रविवार को मथुरा से आए कुछ माहिरों ने कस्बे में पहुंचकर बीस बंदरों को पकड़ा था। वन कर्मियों की मौजूदगी में बंदर पकड़ने वाली टीम ने पहले बंदरों को खाना देकर लालच दिया और इसके बाद जाल डालकर कैद कर लिया। पकड़े गए बंदरों को बोरों में बंद कर दिया गया। वह इतना गलत तरीके से बंद किया कि बंदरों की हालत दम घुटने जैसी हो गई थी। वहीं नियमानुसार बंदरों को पकड़कर उन्हें पिंजरे में रखा जाना चाहिए था। पकड़े गए बंदरों बोरों को बंद किए ही नगर पंचायत के एक कचरा वाहन मेें लादकर 50 किलोमीटर दूर घुंघचाई क्षेत्र की खन्नौत नदी के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक बंदरों को बोरी में बंद करने का मामला सोशल मीडिया पर तूल पकड़ गया था। मामला संज्ञान में आने पर डीएफओ संजीव कुमार ने रेंजर सतेंद्र सिंह को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
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मेनका गांधी पहले से रही हैं ऐसे मामलों में सख्त
बंदरों को क्रूरतापूर्वक पकड़ने के बाद उन्हें बोरों में बंद करने के मामले को यहां से सांसद रहीं मेनका गांधी ने भी संज्ञान में लिया है। उन्होंने इस मामले में डीएम वैभव श्रीवास्तव से भी जानकारी ली है। इसके चलते किसी जिम्मेदार पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। अभी तक देखा गया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पशुओं के साथ बरती गई क्रूरता के मामले में बेहद सख्त रही हैं।
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बंदरों को पकडकर उनके साथ क्रूरता बरतने का मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जा रही है। रेंजर सतेंद्र सिंह से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर जिसकी लापरवाही होगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
बंदरों को पकड़ने के बाद उनके साथ क्रूरता बरती गई। यह पूूरी तरह से गलत है। मैं इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से भी बात करूंगी। दोषियों को दंडित कराया जाएगा। -मेनका गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री