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गांव में वन्यजीव आने की खबर पाने को सक्रिय किए पीआरटी सदस्य
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पीलीभीत। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की ओर से हुई कार्यशाला में मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर कैसे अंकुश लगे, वन्यजीवों की पहचान आदि करने की जानकारी दी गई है। कार्यशाला में पीआरटी (प्राइमरी रेस्पांस टीम) के सदस्यों ने भाग लिया, यही सदस्य गांव में वन्यजीव आने की तत्काल खबर देंगे, ताकि समय रहते आगे घटना होने से रोका जा सके। टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने में सहयोग की बात कही।
शहर के एक होटल में रविवार को हुई कार्यशाला में डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड पीसी पांडेय ने कार्यशाला के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजा मोहन ने पीआरटी सदस्यों को बताया कि डब्ल्यूटीआई वन और वन्यजीव हित में सराहनीय कार्य कर रहा है। इन प्रयासों से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सकता है। पीआरटी सदस्य वन्यजीवों को देखने जाने पर तत्काल सूचना दें। कहा कि वन और वन्यजीव की सुरक्षा से ही मानव और पर्यावरण सुरक्षित होगा। डिप्टी डायेरक्टर नवीन खंडेलवाल ने कहा कि विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के पीछे वनों को भी सुरक्षित रखना है। ताकि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके। इसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली है जहां पूरी हवा ही जहरीली हो चुकी है। यदि हम पर्यावरण का संरक्षण नहीं कर सके तो आने वाले वाली पीढ़ी के लिए यह काफी घातक सिद्ध होगा। डब्ल्यूटीआई टीम के डॉ. दक्ष गंगवार ने पीआरटी के सदस्यों को वन्यजीव की पहचान के तरीकों को बताया। इसमें उन्होंने पगमार्क, मल और खरोंच के निशानों को प्रोजेक्टर पर दिखाकर पहचान कराई। इसके अलावा डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड ने बताया कि दुधवा के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में तराई टाइगर प्रोजेक्ट के तहत काम हो रहा। पीआरटी में बराही, माला, दियूरिया और अमरिया क्षेत्र के जागरूक लोगों को शामिल किया गया। पीआरटी की सूचना पर रैपिड रेस्पांस टीम सक्रिय होगी। इससे समय रहते अधिकारियों को गांव में आने वाले वन्यजीव की जानकारी आसानी से हो सकेगी। कार्यशाला में 30 से अधिक पीआरटी सदस्यों ने भाग लिया।
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शहर के एक होटल में रविवार को हुई कार्यशाला में डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड पीसी पांडेय ने कार्यशाला के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच राजा मोहन ने पीआरटी सदस्यों को बताया कि डब्ल्यूटीआई वन और वन्यजीव हित में सराहनीय कार्य कर रहा है। इन प्रयासों से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सकता है। पीआरटी सदस्य वन्यजीवों को देखने जाने पर तत्काल सूचना दें। कहा कि वन और वन्यजीव की सुरक्षा से ही मानव और पर्यावरण सुरक्षित होगा। डिप्टी डायेरक्टर नवीन खंडेलवाल ने कहा कि विभाग का उद्देश्य वन्यजीवों के संरक्षण के पीछे वनों को भी सुरक्षित रखना है। ताकि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके। इसका जीता जागता उदाहरण दिल्ली है जहां पूरी हवा ही जहरीली हो चुकी है। यदि हम पर्यावरण का संरक्षण नहीं कर सके तो आने वाले वाली पीढ़ी के लिए यह काफी घातक सिद्ध होगा। डब्ल्यूटीआई टीम के डॉ. दक्ष गंगवार ने पीआरटी के सदस्यों को वन्यजीव की पहचान के तरीकों को बताया। इसमें उन्होंने पगमार्क, मल और खरोंच के निशानों को प्रोजेक्टर पर दिखाकर पहचान कराई। इसके अलावा डब्ल्यूटीआई के प्रोजेक्ट हेड ने बताया कि दुधवा के अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व में तराई टाइगर प्रोजेक्ट के तहत काम हो रहा। पीआरटी में बराही, माला, दियूरिया और अमरिया क्षेत्र के जागरूक लोगों को शामिल किया गया। पीआरटी की सूचना पर रैपिड रेस्पांस टीम सक्रिय होगी। इससे समय रहते अधिकारियों को गांव में आने वाले वन्यजीव की जानकारी आसानी से हो सकेगी। कार्यशाला में 30 से अधिक पीआरटी सदस्यों ने भाग लिया।
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